चरका पढ़ानेवाले गए, अब बुद्धि का दौर!

अपने शेयर बाज़ार में बड़ों का नाम लेकर छोटों को चरका बढ़ाने का सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। किसी ज़माने में कहा जाता था कि फलानां शेयर हर्षद मेहता ने खरीदा है। केतन पारिख से लेकर दामाणी का नाम भी चलता रहा। फिर राकेश झुनझुनवाला का झुनझुना बजने लगा। आज वही सिलसिला एफआईआई और म्यूचुअल फंडों व डीआईआई तक आ गया है। कहा जाता है कि फलानां शेयर एफआईआई खरीद रहे हैं या कोई नामी म्यूचुअल फंड खरीद रहा है। असल बात यह है कि जब तमाम दिग्गज, एफआईआई या म्यूचुअल फंड खरीद चुके होते हैं, तब मुनाफा काटने के लिए हवा फैलाई जाती है ताकि भोले-भाले मासूम निवेशक लालच में आकर उन स्टॉक्स को खरीद लें। लेकिन टिप्स का वो ज़माना अब लद गया है। हमें अपनी बुद्धि-विवेक व रिसर्च के आधार पर ही निवेश का फैसला करना चाहिए। एफआईआई और डीआईआई अपने हित के हिसाब से खरीदते-बेचते हैं। हम उनकी नकल करेंगे तो फंस जाएंगे। एफआईआई और डीआईआई की शुद्ध खरीद या बिकवाली का डेटा किसी ट्रेडर के लिए अहम है। लेकिन दो-चार साल की सोच वाले छोटे व रिटेल निवेशक के लिए इसका कोई मतलब नहीं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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