सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि रुपए को और गिरने से रोकना बेहद ज़रूरी है। लेकिन रुपया डॉलर के मुकाबले बेरोकटोक गिरता ही जा रहा है, भले ही डॉलर सूचकांक बढ़े या गिरे। डॉलर सूचकांक इस साल जनवरी में 98.25 हुआ करता था। मार्च अंत में 100.59 हो गया। अब फिर 98.80 हो गया है। लेकिन रुपया केवल गिरना जानता है। वो जनवरी में औसतन प्रति डॉलर 90.73 का हुआ करता था, अब 95.88 का हो गया। पांच महीने में करीब 5.5% की गिरावट! इसको रोकना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन नागेश्वरन ने इसका कोई तरीका या रोडमैप नहीं पेश किया। सरकार की कृपा पर पलते निवेश विशेषज्ञ और कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं कि हम भारत के लोग प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते हुए कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की देशभक्ति दिखाएं तो लाखों देशवासियों का जीवन स्तर उठाया जा सकता है और रोजगार सृजन भी बढ़ सकता है। लेकिन देश को वर्तमान गर्त से इन बोलवचन दिग्गजों की बातें कतई नहीं निकाल सकतीं। न ही स्पॉट, फॉरवर्ड या अंतरराष्ट्रीय एनडीएफ (नॉन डिलीवरेबल फॉरवर्ड) बाज़ार में भारतीय रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप रुपए को बचा पा रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था में देशी-विदेशी निवेशकों का टूटा भरोसा तो रिजर्व बैंक वापस नहीं जोड़ सकता। टैक्स छूट भी नाकाफी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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