डॉलर के मुकाबले रुपए के कमज़ोर होने से भारत अगर दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था न बनकर छठे नंबर पर आ गया तो सवाल यह उठता है जब डॉलर खुद दुनिया की तमाम मुद्राओं के सापेक्ष कमज़ोर हो रहा था, तब हमारा रुपया डॉलर के मुकाबले कमज़ोर क्यों हुआ? ब्रिटिश पाउंड और जापान येन तक डॉलर के मुकाबले मजबूत हुए हैं, जबकि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के खिलाफ लगातार गिरता जा रहा है। इसकी राजनीतिक व आर्थिक, दोनों वजहें हैं। राजनीतिक वजह यह कि हमारी सरकार ने भारत की संप्रभुता को अमेरिका के कदमों में बिछा दिया है। आर्थिक वजह यह कि देश से विदेशी निवेशक भागे जा रहे हैं, देशी कंपनियां तक विदेश में निवेश कर रही है, एफडीआई के लाले पड़ गए हैं और एनआरआई कम डॉलर भेज रहे हैं। इससे देश में डॉलर का प्रवाह घटा है, जबकि कच्चे तेल से लेकर सोने और हथियारों की खरीद से डॉलर की मांग बढ़ती जा रही है। रही बात नई सीरीज में जीडीपी का आकार घटा देने की तो ऐसा तो देर-सबेर होना ही था। आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने जब नवंबर 2025 में भारत के राष्ट्रीय खातों को सी ग्रेड में डाल दिया था तो भारत सरकार को मुंह दिखाने और साख बचाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था। नहीं तो विदेश से ऋण नहीं मिलता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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