पूरे एक साल जनता के बहुमत से चुनी हुई सरकार राष्ट्र के साथ धोखा करती रही, बार-बार सैकड़ों बार झूठ बोलती रही कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। सबसे पहले यह झूठ नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्रमण्यम ने बाकायदा 25 मई 2025 को एक प्रेस कॉन्फेंस में ऐलानिया तौर पर बोला था कि भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। किसी ने उनसे यह नहीं पूछा कि जो साल भर बाद 2025-26 का प्रोजेक्शन है, वो आज का सच कैसे बन गया? मीडिया की इस पस्ती से सरकार मनबढ़ हो गई। फिर तो झूठ का कौआ-रोर शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल तक समवेत स्वर से हर मंच पर भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देने का दंभ भरने लगे। शोर इतना बढ़ा कि विपक्ष तक ने सरकार के इस दावे को ब्रह्म-सत्य मानकर स्वीकार कर लिया। बुद्धिजीवियों और पत्रकारों में दम नहीं था कि वे सच उजागर कर देते क्योंकि उन्हें राष्ट्रदोही घोषित किए जाने का डर था। इस तरह देश छल-छद्म व झूठ की गहन अंधकारा में डूब गया। किसी को इससे निकलने की कोई सूरत नहीं दिखती। आखिर आईएमएफ का अनुमान सरकारी झूठ का विजय अभियान कैसे बन गया? अब सोमवार का व्योम…
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