अफरातफरी में ज़रूरी है बाज़ की नज़र!

आम लोगों के लिए शेय़र बाज़ार में अल्पकालिक ट्रेडिंग और दीर्घकालिक निवेश की रणनीति अलग-अलग होती है क्योंकि उन्हें अपना जोखिम संभालकर चलना होता है। रिटेल ट्रेडर के लिए उसकी सीमित पूंजी बहुत मायने रखती है क्योंकि ट्रेडिंग पूंजी डूबी तो उसका सारा आधार डूब जाएगा। उसे ट्रेडिंग तभी करनी चाहिए, जबकि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न की गुंजाइश हो। उसे युद्ध जैसी अनिश्चितता के माहौल में बाज़ार का तमाशा दूर खड़े रहकर देखना चाहिए और हमेशा अपनी ट्रेडिंग पूंजी संभालकर रखनी चाहिए। लेकिन लम्बे समय के निवेशक समझदारी से काम करें तो अनिश्चितता और अफरातफरी के माहौल में उनकी चांदी हो जाती है। जब हर कोई बेचकर भाग रहा होता है, तब बिकवाली के दबाव में अच्छे-खासे मजबूत शेयर सस्ते होते चले जाते हैं। लम्बे समय के निवेशक के लिए यही मौका होता है जब वो अच्छी कंपनियों के शेयर वाजिब भाव पर पकड़ सकता है। इसलिए अनिश्चितता भरे माहौल में उसे बाज़ार से भागना नहीं चाहिए और उसे बाज़ की दृष्टि से देखना चाहिए। जहां शिकार दिखे, फौरन झपट्टा मारकर पकड़ लिया। शेयर आगे और गिर जाए तो एसआईपी की तरह उसे खरीदकर औसत भाव कम करते जाएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…

यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं। इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...

Existing Users Log In
   
New User Registration
Please indicate that you agree to the Terms of Service *
captcha
*Required field