जीडीपी की नई सीरीज़ में जो पद्धति अपनाकर गणना की गई है, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बड़बोले मंत्रियों व नेताओं की बोलती बंद कर दी है। 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का दावा करनेवालों के लिए अब 4 ट्रिलियन की बात करना भी मुश्किल हो गया है। पुरानी पद्धति के अनुसार जनवरी में आए पहले अग्रिम अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 में नॉमिनल या वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी ₹357.14 लाख करोड़ निकाला गया था। वहीं, नई सीरीज़ के तहत दूसरे अग्रिम अनुमान में नॉमिनल या वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी ₹345.47 लाख करोड़ ही निकला है। इसकी गणना ₹92.26 प्रति डॉलर की मौजूदा विनियम दर पर करें तो नई सीरीज़ में देश का जीडीपी 3.74 ट्रिलियन डॉलर निकलता है। वैसे, पुरानी पद्धति में भी यह 3.87 ट्रिलियन डॉलर ही निकलता है। लेकिन तब इसका 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना उतना कठिन नहीं था। अब तो वहां तक इसका पहुचना काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है। नई सीरीज़ में वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में भी नॉमिनल जीडीपी पुरानी सीरीज़ की तुलना में क्रमशः 2.9%, 3.8% और 3.8% घटा दिया गया है। इस बदलाव से केंद्र सरकार के खजाने और राजकोषीय़ घाटे का सारा गणित गड़बड़ा गया है। प्रति व्यक्ति सालाना आय भी पहले ₹2.51 लाख आंकी गई थी, जो अब ₹2.43 लाख रह गई है। अब मंगलवार की दृष्टि…
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