कंपनियां किसी निर्वात में नहीं काम करतीं। वे जिस उद्योग में काम करती हैं, उसके उतार-चढ़ाव व हालात से प्रभावित होती हैं। जिस देश में काम करती हैं, उसकी नीतियों से प्रभावित होती हैं। घरेलू नीतियों से देश का भीतरी बाज़ार प्रभावित होता है तो व्यापार संधियों से कंपनियों को विदेशी बाज़ार पाने में सहूलियत हो जाती है। भारत ने हाल में यूरोपीय संघ और अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे कई देशों के साथ व्यापार संधियों की हैं। जाहिर है कि भारत टेक्सटाइल, लेदर उत्पाद, रत्न व आभूषण, समुद्री उत्पाद व मसालों जैसी पारम्परिक चीजों से बाहर निकलकर बड़े पैमाने पर मैन्यूफैक्चरिंग उत्पाद निर्यात नहीं करता तो उसे इन संधियों का कोई फायदा नहीं मिलेगा और वो दुनिया की खपत का बड़ा बाज़ार बनकर ही रह जाएगा। पिछले कुछ सालों में देश की चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने शानदार काम किया है। आज हमने तथास्तु में इस क्षेत्र की जो कंपनी चुनी है, उसने पिछले पांच सालों में अपनी बिक्री नौ गुना और शुद्ध लाभ दस गुना बढ़ा लिया है। उसके रिटर्न भी जबरदस्त हैं। कंपनी की बैलेंस शीट दुरुस्त है और उस पर ज्यादा ऋण नहीं। शेयर पहले चढ़ा था। अब ठंडा हो गया है। कौन-सी है यह कंपनी…
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