भारतीय कृषि मानसून पर बहुत ज्यादा निर्भर है। मानसून में हुई शुरुआती देरी से खरीफ की फसलों की बोवाई लगभग 5% घट गई है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक 23 जून तक देश में 129.52 लाख हेक्टेयर में बोवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह रकबा 135.64 लाख हेक्टेयर का था। महाराष्ट्र में कपास का रकबा घटने की खबरें आ रही हैं। अल निनो का नकारात्मक असर धान, गन्ना, मोटे अनाज व दालों तक पर पड़ना तय है। इससे आवश्यक खाद्य पदार्थों की तंगी और मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। हालांकि रिजर्व बैंक की ताज़ा बुलेटिन में कहा गया है कि अल निनो से ज़रूरी नहीं है कि बारिश कम हो या खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ जाए। सारा कुछ हिंद महासागर के द्वि-धुवीय दोलन पर निर्भर करता है। इससे अभी तक तो अल निनो से बारिश या मुद्रास्फीति पर ज्यादा असर पड़ता नहीं दिखता। आज तथास्तु में कृषि से जुड़ी एक कंपनी…
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