शेयर बाज़ार के चक्रों को जज्ब कर लिया और उसकी दशा-दिशा पकड़ ली तो समझो कि पहला अध्याय पूरा कर लिया। छमाही, तिमाही से लेकर महीने, हफ्ते व दिन तक का चक्र। महीने के पहले हफ्ते में भरपूर जोश व उत्साह रहता है। ट्रेडर पुरानी पोजिशन को बराबर करने के बाद नई पोजिशन शुरू करते हैं। दूसरा हफ्ता शांत रहता है। तीसरे हफ्ते से पोजिशन को रोल या स्क्वायर करना शुरू हो जाता है। डेरिवेटिव सौदों के चक्र में दूसरे हफ्ते के बाद ऑप्शंस का प्रीमियम घटने लगता है। तीसरे हफ्ते से तो कॉल व पुट, दोनों ही ऑप्शंस के प्रीमियम बहुत तेज़ी से घटते हैं। इसी के साथ ट्रेडर व्याकुल होने लगते हैं। अब सोमवार का व्योम…
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