शेयर बाज़ार हर तर्क को धता बताते हुए बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि धन के प्रवाह का तर्क उसके साथ है। देश में 80% लोगों के पास खाने को अनाज नहीं है तो सरकार को उन्हें हमारे टैक्स से हर माह पांच किलो राशन मुफ्त देना पड़ रहा है। कोविड में कम से कम ढाई-तीन करोड़ लोगों को रोज़ी-रोज़गार से हाथ धोना पड़ा है। अब बचते हैं करीब 25 करोड़ लोग। इसमें से भी करीब 15 करोड़ लोगों का विष हमारी खेती-किसानी अपने गले में रोककर नीलकंठ बनी हुई है। बाकी सात-आठ करोड़ प्रॉपराइटरी या पार्टनरशिप फर्मों में फंसे लोग होंगे। बाकी करीब दो करोड़ लोग ही हैं जिनका धन शेयर बाज़ार में बहता आ रहा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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