बाज़ार में डर और लालच की दो अतियां चलती हैं और ये एक-दूसरे को बेअसर भी करती हैं। राजन के जाने से लगा झटका सरकार ने इन्हीं दो भावनाओं के दम पर संभाला है। सोमवार को घरेलू संस्थाओं, ब्रोकरेज हाउसों व कंपनी मालिकों ने मोर्चा संभाला तो मंगलवार को विदेशी संस्थाओं ने एफडीआई के नियमों में ढील से खरीद बढ़ा दी। पूंजी की कोई नैतिकता नहीं होती, मुनाफा ही उसकी एकमात्र प्रेरणा है। अब बुधवार की बुद्धि…
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