दुनिया के 20 प्रमुख देशों के समूह जी-20 की बैठक जब शुरू हो रही हो, अमेरिका व यूरोप समेत तमाम विकसित देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई हों, प्रमुख मुद्राओं में युद्ध की स्थिति आ गई हो, तमाम केंद्रीय बैंक व बड़े निवेशक सुरक्षा के लिए सोने की तरफ भाग रहे हों, ठीक उस वक्त विश्व बैंक भी सोने की अहमियत बताने लगे तो किसी का भी चौंकना स्वाभाविक है। लेकिन विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉयलिक नेऔरऔर भी

बाजार का बर्ताव वैसा ही रहा जैसा कि रोलओवर के करीब आने के दौरान होना चाहिए था। मालूम हो कि डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए शुक्रवार, 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सेटलमेंट गुरुवार, 28 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा। इन 28 दिनों में कारोबारी दिन केवल 20 ही हैं। दिक्कत यह है कि हमें सेटलमेंट के करीब आने और रोलओवर होने का ख्याल ही नहीं रहता, जबकि इसके आसपास का समय भारी उतार-चढ़ाव और अफवाहों से भरा होताऔरऔर भी

विश्व बैंक ने तीन भारतीय कंपनियों और एक कारोबारी पर बंदिश लगा दी है कि वे भारत में उसकी परियोजना में भाग नहीं ले सकते। उसका कहना है कि इन कंपनियों और उस शख्स से उसके साथ कामकाज करते हुए धोखाधड़ी की है। ये तीन कंपनियां हैं – बीएसई में लिस्टेड अंबालाल साराभाई एंटरप्राइसेज, मुंबई की केमितो टेक्नोलॉजीज और नई दिल्ली की ग्लोबल स्पिन वीव लिमिटेड। साथ ही ग्लोबल स्पिन वीव के निदेशक सुधीर अग्रवाल पर अलगऔरऔर भी

साल 2021 तक भारत में महानगरों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा होगी और हर महानगर में एक करोड़ से ज्यादा लोग रह रहे होंगे। अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन ऐसा मानता है। वहीं, भारत सरकार की जनगणना के मुताबिक भी बीते एक दशक में गांवों से तकरीबन 10 करोड़ ने पलायन किया है, जबकि निवास स्थान छोड़ने के आधार पर 30 करोड़ 90 हजार लोगों ने अपना निवास स्थान छोड़ा है। योजना आयोग के मुताबिक 1999-2000 में अप्रवासीऔरऔर भी

शिरीष खरे विश्व बैंक की शर्तों के तहत गरीबी हटाने के नाम पर किए गए ढांचागत समायोजन कार्यक्रमों के परिणाम अब सर्वत्र दिखाई देने लगे हैं। भारत विश्व बैंक के चार सबसे बड़े कर्जदारों में शामिल है। नव-उपनिवेशवादी नीतियों के कारण देश की 65 फीसदी आबादी का भरण-पोषण करने वाला कृषि क्षेत्र आज दयनीय हालत में है। हरित क्रांति की आत्ममुग्धता के बावजूद खाद्यान्न आत्मनिर्भरता लगातार कम हो रही है। विदेशी मुद्रा भण्डार का बड़ी मात्रा मेंऔरऔर भी