Skip to content
arthkaam narrow header
।।अर्थकाम।। Be financially clever!

निफ्टी की दशा-दिशा: 30 अक्टूबर 2026 शुक्रवार, शाम 3.30 बजे अंतिम रुख↑

पिछला बंद शुक्र का उच्चतम शुक्र का न्यूनतम शुक्र का बंद वास्तविक दायरा
22936.75 23118.10 22905.10 23053.10 22905-23115

 

Secondary Navigation Menu
Menu
  • अर्थव्यवस्था
    • उद्योगमैन्यूफैक्चरिंग से लेकर समूचे सेवा क्षेत्र से जुड़ी नीतियां व विकासक्रम
    • कृषिउस क्षेत्र का हाल जिस पर निर्भर है देश की 60 फीसदी से ज्यादा आबादी
    • वित्त बाजारवित्तीय बाजार पर असर डालनेवाली हर खबर, विश्लेषण के साथ
    • बजटबजट के प्रावधानों से लेकर सरकारी नीतियों का लेखाजोखा
  • ऋद्धि-सिद्धि
  • ऑप्शन ट्रेडिंग
  • जीवन-सार
  • ट्रेडिंग-बुद्ध
  • धन-मंत्र
  • निवेश
  • तथास्तु
  • विचार
    • आपकी बातसमाज के बीच से आए असली व सार्थक विचार
    • मेरी बातकिसी सामयिक प्रसंग पर संपादक का विश्लेषण
    • इनकी बातकिसी खास हस्ती के रोचक विचार
    • उनकी बातवित्तीय जगत से जुड़े किसी शख्स के व्यवहारिक विचार
  • संपर्क
  • पेड सेवा
  • Login

society (Page 120)

away from grief

दुख से दूर, सुख से भरपूर

2019-05-04
By: अनिल रघुराज
On: May 4, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

jaroorat

जहां ज़रूरत, वहां पहुंचे

2019-05-02
By: अनिल रघुराज
On: May 2, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

each other

अपने भले में सबका भला

2019-04-11
By: अनिल रघुराज
On: April 11, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

holi colors

रंग ही रंग, बदरंग क्यों!

2019-03-21
By: अनिल रघुराज
On: March 21, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

good bad

अच्छे बिखरे, बुरे संगठित

2019-03-15
By: अनिल रघुराज
On: March 15, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

talent and opportunities

प्रतिभाएं और अवसर

2019-03-14
By: अनिल रघुराज
On: March 14, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

free flow

बाहर की स्वतंत्र गति

2019-03-07
By: अनिल रघुराज
On: March 7, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

skill world and wants

दुनिया, काबिलियत और चाहत

2019-03-05
By: अनिल रघुराज
On: March 5, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

unfair society

भेदभाव वहां नहीं, यहां

2019-02-21
By: अनिल रघुराज
On: February 21, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

walk to health

रुके सो रोगी, चले सो मस्त

2019-02-10
By: अनिल रघुराज
On: February 10, 2019
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

Posts pagination

Previous 1 … 119 120 121 … 150 Next

निवेश – तथास्तु

  • अफरातफरी भागमभाग, रुको तो सही!
    25 Oct 2026

    जबरदस्त हताशा व निराशा का आलम है। वजह चाहे जो भी हो, कच्चे तेल का 114 प्रति डॉलर पर पहुंच जाना, भारतीय शेयर बाज़ार का मूल्यांकन या मार्जिन ट्रेड के सौदों को समेटने का दबाव। अब तो लार्जकैप से कहीं ज्यादा मार स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स पर पड़ रही है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को निफ्टी-50 सूचकांक 0.39% ही घटा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 2.94% और मिडकैप-100 सूचकांक 2.21% गिर गया। अभी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक ही […]

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30  
« Oct    

पेड सेवा

tathastu logo

Pages

  • Free, फ्री, Free
  • Login
  • Mem Profile
  • अर्थकाम का बैनर अपने यहां लगाइए
  • अर्थकाम की पेड-सेवा
  • अर्थकाम कैलेंडर 2013
  • अर्थकाम कैलेंडर 2014
  • अर्थकाम कैलेेंडर 2015
  • आपके लेख
  • इस सेवा से जुड़ी ज़रूरी शर्तें
  • काम के लिंक
  • कॉपीराइट
  • डिस्क्लेमर
  • निवेश – तथास्तु!
  • पेड सेवा रजिस्ट्रेशन
  • बारी आपकी
  • मैं नहीं हम
  • यह पहल क्यों?
  • संपर्क

क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

Subscribe to ।।अर्थकाम।। by Email
         Paid Registration-Trading-Buddha                               Paid Registration -Tathastu                                    Free Registration

ट्रेडिंग – बुद्ध

  • टैक्स-टूल से न जुड़े खंडित विकासगाथा
    30 Oct 2026

    मोदी सरकार यह मानने को तैयार नहीं कि उसने भारत की विकासगाथा का अंत कर दिया है। उसके लिए कॉरपोरेट क्षेत्र का मतलब अडाणी, अंबानी व चंद उद्योगपति है। आत्मनिर्भर भारत का नारा और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को पूरी तरह चीन पर निर्भर बना दिया। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लगता है कि शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स घटा दो और इसकी गणना रुपए के बजाय डॉलर में करने लगो तो भारतीय बाज़ार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भागना रुक जाएगा। लेकिन टैक्स की भूखी सरकार को यह नहीं दिखता कि अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स ही समस्या होती तो अप्रैल 2018 में जब इसे 10% की दर से वापस लाया गया, तभी से विदेशी निवेशक भागने लगते। फिर जुलाई 2024 में मोदी सरकार ने तीसरे कार्यकाल के पहले बजट में इसे बढ़ाकर 12.5% कर दिया, तब भी एफपीआई नहीं भागे। वे रिकॉर्ड निवेश करते रहे। सितंबर 2024 में निफ्टी व सेंसेक्स ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए। तभी विदेशी निवेशकों को लगने लगा कि मोदी सरकार आर्थिक विकास का जो ढोल पीट रही है, वो अंदर से खोखला है। यहीं से भारत की विकासगाथा से उनका मोहभंग हो गया। सरकार को इस टैक्स से 2024-25 में ₹1,29,158 करोड़ मिले थे। वो इसे छोड़ कही और से वसूल लेगी। लेकिन विकासगाथा का क्या? अब शुक्रवार का अभ्यास…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

और भी

© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom