दुनिया में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत करीब 400 साल पहले हुई थी। इसके कुछ उदाहरण यूरोप में ट्यूलिप के फॉरवर्ड सौदे और जापान में चावल के फ्यूचर्स हैं। मशहूर कैंडल स्टिक पद्धति का आगाज़ जापान में चावल के फ्यूचर्स की ट्रेडिंग से ही हुई। दुनिया के सबसे पुराना फ्यूचर्स व ऑप्शंस एक्सचेंज – शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड का गठन 1848 में हुआ। वहीं, भारत में पहला फ्यूचर्स बाज़ार साल 1875 में बॉम्बे कॉटन ट्रेड एसोसिएशन के रूपऔरऔर भी

कोरोना वायरस के प्रकोप से देश को बचाने के लिए लॉकडाउन या घरबंदी की मीयाद 19 दिन और बढ़ा दी गई है। इस बीच शेयर बाज़ार छुट्टियों के अलावा बराबर खुला रहा। वह पस्ती से थोड़ा बाहर निकला नज़र आ रहा है। 24 मार्च को घरबंदी लागू होने से सोमवार 13 अप्रैल तक के मात्र बारह ट्रेडिंग सत्रों में निफ्टी-50 सूचकांक 15.29% बढ़ चुका है। लेकिन बाज़ार से अनिश्चितता का साया अभी तक उठा नहीं है तोऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 शुरू। कोरोना के चलते बीते वित्त वर्ष 2019-20 में अंत तक सेंसेक्स 24% और निफ्टी 26% से ज्यादा टूट गया। जल्दी ही मौसम विभाग मानसून का अनुमान पेश करेगा। लॉक-डाउन उठने में अभी 13 दिन बाकी हैं। इसमें से मात्र 5 दिन ट्रेडिंग होगी। रामनवमी, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे व अम्बेडकर जयंती पर 4 दिन बाज़ार बंद है। ऊपर से 4 दिन शनि-रवि। सो, अगला कॉलम अब 15 अप्रैल को। फिलहाल बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ब्रोकर संगठन बराबर मांग करते रहे कि शेयर बाज़ार में जिस तरह अफरातफरी मची है, निफ्टी हर दिन 400-500 अंक उठता-गिरता है, उसमें उसे कम से कम लॉक-डाउन की अवधि तक बंद कर देना चाहिए क्योंकि मौजूदा स्थिति न ट्रेडरों के लिए अच्छी है, न निवेशकों के लिए। लेकिन पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इसके लिए तैयार नहीं हुई। कमाल है कि शेयर बाज़ार को आवश्यक सेवाओं का हिस्सा माना जा रहा है। अब मंगलवार का दृष्टि…औरऔर भी

मार्च का महीना शेयर बाज़ार में शॉर्ट-सेलिंग करनेवाले ट्रेडरों के लिए वैसे भी खतरनाक होता है। फिर इस बार तो कोरोना के कहर ने हालात को ज्यादा ही संगीन बना दिया है। ऊपर से दुनिया की शीर्ष रेटिंग एजेंसियों में से स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान घटाकर 3.5% और मूडीज़ ने मात्र 2.5% कर दिया है। ऐसी भयंकर निराशा में धन का प्रवाह सूखता जा रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार गिर रहा हो तो शॉर्ट-सेलिंग उसे गिराती ही चली जाती है। गिरावट जब बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो मांग उठती है कि शॉर्ट-सेलिंग पर रोक लगा दी जाए। हफ्ते भर पहले सेबी ने कुछ स्टॉक फ्यूचर्स की पोजिशन लिमिट आधी कर दी, इंडेक्स डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-सेलिंग की सीमा बांध दी और कुछ शेयरों पर मार्जिन दर बढ़ा दी। मकसद था बाज़ार की उथल-पुथल को रोकना। वैसे, इधर शॉर्ट-कवरिंग भी चली है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के गिरने पर लोग शॉर्ट-सेलिंग, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग का रुख करते हैं। मगर, ऑप्शंस में अभी कमाने की कम और गंवाने की प्रायिकता बेहद ज्यादा है। दरअसल, डर व घबराहट का सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 24 मार्च को 86.6350 की चोटी पर पहुंच गया तो ऑप्शंस सौदा उल्टा पड़ने की आशंका इस समय चरम पर है। पहले इसका उच्चतम स्तर वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 17 मार्च 2008 को 85.13 का था। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले कुछ हफ्तों से जब से शेयर बाज़ार में भारी गिरावट व अनिश्चितता का सिलसिला शुरू हुआ है, तभी से हम बराबर कह रहे हैं कि रिटेल ट्रेडरों को बाज़ार से दूर रहना चाहिए। अन्यथा, वे संस्थाओं की चक्की में पिसकर रह जाएंगे और पलक झपकते ही अपनी ट्रेडिंग पूंजी गवां बैठेंगे। फिर, जब ट्रेडिंग पूंजी ही नहीं रहेगी तो ट्रेड कहां से करेंगे। अपनी पूंजी सुरक्षित रखना ट्रेडिंग का मूलभूत नियम है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2019-20 में शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के लिए आज को मिलाकर अब मात्र छह दिन बचे हैं। शेयर बाज़ार के सबसे बड़े खिलाड़ियों में गिने जाते हैं म्यूचुअल फंड, एलआईसी जैसी बीमा कंपनियां और विदेशी निवेशक संस्थाएं। अमूमन ये सभी संस्थागत निवेशक मार्च अंत में अपनी खरीद बढ़ा देते हैं। इस बार देशी संस्थाएं ज़रूर खरीद रही हैं। लेकिन विदेशी संस्थाओं की बिक्री उनका पूरा कचूमर निकाल दे रही है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

देखते-देखते वित्त वर्ष 2019-20 बीत गया। ट्रेडिंग के लिए इस हफ्ते पांच दिन और अगले हफ्ते दो दिन बाकी हैं। फिर बुधवार, पहली अप्रैल से नया वित्त वर्ष 2020-21 शुरू। तब क्या होगा, पता नहीं। अभी तो पिछले कई हफ्तों से शेयर बाज़ार में कोरोना को कोहराम छाया हुआ है। बाज़ार इस साल जनवरी से अब तक लगभग 30% गिर चुका है। चालू वित्त वर्ष के बाकी सात दिनों का क्या होगा हाल? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी