सीमित अपने तक
भगवान पर ध्यान लगा हम अपने अंदर की शक्तियों और बाहर की ताकतों को साधते हैं। भगवान यहीं तक सीमित रहे तो बड़ा कल्याणकारी है। लेकिन, कोई जब दूसरों को खींचने के लिए भगवान का इस्तेमाल करने लगता है तो वह बड़ा विनाशकारी हो जाता है।और भीऔर भी
ज़िद और जड़ता
लंबे समय तक किसी गफलत में जीना न खुद के लिए अच्छा है और न ही औरों के लिए। धीरे-धीरे झलकने लगता है कि हम कितने भ्रम में पड़े हुए थे। लेकिन अपनी जिद और जड़ता के कारण हम सच को स्वीकार करने से भागते रहते हैं।और भीऔर भी
जीना शिद्दत से
भगत सिंह 23 साल ही जीकर अमर हो गए। 39 साल के जीवन में विवेकानंद दुनिया पर अमिट छाप छोड़ गए। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अपने लिए नहीं, उन अपनों के लिए जिए जो परिवार तक सीमित नहीं थे।और भीऔर भी
मन की तसल्ली
अपनी तसल्ली के लिए मन में यही भाव बैठा लेना श्रेयस्कर है कि हम जो भी काम करते हैं, मूलतः अपने लिए करते हैं, दूसरों के लिए नहीं। दूसरा तो बस बहाना है। वह न होता तो हम निठल्ले पड़े रहते।और भीऔर भी




