शेयर/कमोडिटी बाज़ार में जो भी ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं, उन्हें यह सच अपने जेहन में बैठा लेना चाहिए कि यहां भावी अनिश्चितता को मिटाना कतई संभव नहीं। यहां सांख्यिकी या गणित की भाषा में प्रायिकता और आम बोलचाल की भाषा में संभावना या गुंजाइश चलती है। जो भी यहां भाव के पक्का बढ़ने/घटने की बात करता है वह या तो अहंकारी मूर्ख है या तगड़ा धंधेबाज़। इस सच को समझते हुए करते हैं हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

जिस तरह ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती, उसी तरह ट्रेडिंग में हर शेयर की तरफ भागने से कमाई नहीं होती। जिस तरह आपका अपना व्यक्तित्व है, उसी तरह हर शेयर का खास स्वभाव होता है। अपने स्वभाव से मेल खाता एक भी स्टॉक चुन लेंगे तो वो आपका फायदा कराता रहेगा। तमाम कामयाब ट्रेडर पांच-दस से ज्यादा स्टॉक्स में ट्रेड नहीं करते। इसलिए वही-वही नाम देखकर बोर होने की ज़रूरत नहीं। अब मंगल का ट्रेड…औरऔर भी

चूंकि हमारे शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशक संस्थाएं (एफआईआई) बड़ी दबंग स्थिति में हैं। इसलिए बाज़ार का उठना गिरना इससे भी तय होता है कि डॉलर के मुकाबले रुपए का क्या हाल है। कल डॉलर का भाव 62.30 रुपए पर लगभग जस का तस रहा तो निफ्टी भी ज्यादा नहीं गिरा। हालांकि लगातार पांचवें दिन बाज़ार का गिरना पिछले तीन साल की सबसे बुरी शुरुआत है। पर सुबह दस बजे बाज़ार को बहुत तेज़ झटका लगा कैसे?…औरऔर भी

रामचरित मानस की यह चौपाई याद कीजिए कि मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी सोधि के लगन धरी, सीताहरण मरण दशरथ को, वन में विपति परी। जीवन और बाज़ार की यही खूबसूरती है कि वह बड़े-बड़े विद्वानों की भी नहीं सुनता। जहां लाखों देशी-विदेशी निवेशकों का धन-मन लगा हो, भाव हर मिनट पर बदलते हों, वहां बाज़ार को मुठ्ठी में करने का दंभ भला कैसे टिकेगा! इसलिए फायदे के साथ रखें घाटे का हिसाब। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

क्या शेयर बाज़ार में वाकई ऐसे लोग भरे पड़े हैं जो भावनाओं के गुबार में गुब्बारा बन जाते हैं या यह गुबार सिर्फ नई मछलियों को फंसाने का चारा भर होता है? बीते सोमवार को निफ्टी सुबह-सुबह 6670.30 तक उछलकर आखिर में 6363.90 पर बंद हुआ था। वही इस सोमवार तक हफ्ते भर में ही महीना भर पीछे जाकर 6154.70 पर बंद हुआ। भावनाओं के इस खेल में खिलाड़ी कौन है? चिंतन-मनन करते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

विदेशी निवेशक (एफआईआई) हमारे बाज़ार के गुब्बारे में हवा भर चुके हैं। करीब महीने पर पहले इकनॉमिक टाइम्स ने एक अध्ययन किया था। सेंसेक्स से ज्यादा एफआईआई हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 16000 पर आ गया और कम हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 41000 पर चला गया। घरेलू संस्थाओं से लेकर कंपनियों के प्रवर्तक तक बेच रहे हैं, विदेशी खरीदे जा रहे हैं। आखिर क्यों? जवाब जटिल है। अब इस हफ्ते की चाल…औरऔर भी

कल कोल इंडिया और एनटीपीसी दोनों में सुबह-सुबह मीडिया में नकारात्मक खबरें आ गईं। फिर भी कोल इंडिया का शेयर 1.26% और एनटीपीसी का शेयर 2.32% बढ़ गया। इसीलिए हम सावधान करते आए हैं कि आम लोगों को छपी खबरों के आधार पर ट्रेड नहीं करना चाहिए। असल में खबरों के आने और जाहिर होने का जो भी समीकरण है, वो हमारे लिए झांसे जैसा है। भावों में ही हर ऊंच-नीच समाहित है। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में आम लोगों के लिए ऐसे सरकारी बांड जारी कर दिए जाएंगे जिसमें बचत को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा जा सकता है। इन बांडों का नाम है इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज – क्यूमुलेटिव (आईआईएसएस-सी)। इन्हें रिजर्व बैंक केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे के बाद लांच कर रहा है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने आधिकारिक जानकारी दी कि इन्हें दिसंबर माह के दूसरे हिस्से में पेश कर दिया जाएगा। बता देंऔरऔर भी

हर दिन सैकड़ों शेयर बढ़ते हैं, सैकड़ों गिरते हैं। जैसे, कल एनएसई में 677 शेयर बढ़े तो 481 गिरे। इन सभी में ट्रेडिंग के अवसर थे। लेकिन कौन बढ़ा, कौन घटा, यह हो जाने के बाद पता चलता है। हमें इन अवसरों को पहले पकड़ना होता है ताकि अपनी पूंजी बढ़ा सकें। हर ट्रेडर अपनी रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से शेयर चुनता है। लेकिन हमारा मकसद होना चाहिए न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी

ज़िंदगी में बहुत सारी घटनाएं बिना बुलाए चली आती है, जबकि कुछ का पता पहले से रहता है। इन घटनाओं के वक्त हम क्या करते हैं, इसी से हमारे लिए उसका फल तय होता है। लेकिन कभी-कभी कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन पर कुछ न करना ही सबसे अच्छी रणनीति है। आज मौद्रिक नीति की दूसरी त्रैमासिक समीक्षा के रूप से ऐसी ही घटना होने जा रही है। इसे देखिए, समझिए। लेकिन ट्रेडिंग बहुत सावधानी से…औरऔर भी