शेयर बाज़ार में छाए मौजूदा उन्माद व सन्निपात के बीच तमाम मजबूत व अच्छी कंपनियां सबकी नज़रों से ओझल पड़ी हैं। अगर ऐसी कंपनियों की सही शिनाख्त कर ली जाए तो वे निवेशकों के लिए दौलत बनाने व बढ़ाने का काम कर सकती हैं। सामान्य निवेशकों के लिए ऐसे मौके शानदार तोहफा लेकर आते हैं। इन्हें पकड़ने के लिए ज़रूरी है कि हम शोर के बीच सच का सूत्र पकड़ लें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

चुनावों ही नहीं, शेयर बाज़ार तक में छवि का बड़ा महत्व है। नहीं तो दो रुपए का पानी बिसलेरी बनकर बीस रुपए में नहीं बिकता। सामान्य माल जब ब्रांडेड उत्पाद बनता है तो उसके विज्ञापन पर होनेवाले खर्च से कहीं ज्यादा मुनाफा कंपनी को मिलने लगता है। कोकाकोला या पेप्सी इसके नायाब उदाहरण हैं। निवेश लायक कंपनियां चुनते वक्त हमें उनके ब्रांडों की ताकत का भी ध्यान रखना चाहिए। आज तथास्तु में ऐसे ही दमखम वाली कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार लंबे समय में झांकियों पर नहीं, ठोस तथ्यों पर चलता है। लगने और होने भी फर्क है। हमें लगता है कि मोदीराज में शेयर बाज़ार जमकर बढ़ा है। लेकिन हकीकत यह है कि मई 2014 से अप्रैल 2019 तक बीएसई सेंसेक्स की सालाना चक्रवृद्धि दर 10.1% रही है, जबकि जून 2004 से मई 2009 तक यह दर 27.1% और जून 2009 से मई 2009 के बीच 12.3% रही थी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

सरकारें आती रहीं, जाती रहीं। हमारी अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से बढ़ी, उससे ज्यादा रफ्तार से शेयर बाज़ार बढ़ा। बीते 39 सालों में बीएसई सेंसेक्स 305 गुना से ज्यादा बढ़ा है। इसने उन सभी लोगों को दौलत बनाने का मौका दिया, जिन्होंने समझदारी से अच्छी कंपनियों में लंबे समय के लिए निवेश किया। हमें भी यही रास्ता अपनाना चाहिए और चुनावी तमाशे व टीवी चैनलों पर मचे शोर से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

सारा देश चुनावों के राग में डूबा हुआ है। हर तरफ राजनीति का शोर। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अभी तक हमारी अर्थव्यवस्था राजनीति की परवाह किए बिना बढ़ती रही है और उसी से जुड़ा है हमारा शेयर बाज़ार। हालांकि इधर चुनाव नतीजों की अनिश्चितता के बीच बाज़ार में छोटी कंपनियों के शेयर ज्यादा ही गिर गए हैं। लेकिन अनिश्चितता के हटते ही उनके उठने की भरपूर संभावना है। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

भारत में उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं। हमारे नगरों-महानगरों की छोटी-छोटी गलियों में आपको इसकी झलक मिल जाती है। न जाने कितने चरणों में अपना माल बनवाकर छोटी कंपनियां बडे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। यही छोटी कंपनियां एक दिन बड़ी बन जाती हैं तो उनके मूल्य का कोई ठिकाना नहीं रहता। हम आज तथास्तु में ऐसी ही एक छोटी से बड़ी बनी कंपनी लेकर आए हैं जिसने आठ साल में आठ गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है…औरऔर भी

सेवा के लिए बनी राजनीति आज देश में जबरदस्त मुनाफा कमानेवाला धंधा बन गई है। लेकिन क्या इस क्षेत्र में कंपनियां बनाकर लिस्ट करवा दी जाए तो उनका मूल्यांकन बहुत ज्यादा होगा? नहीं, क्योंकि राजनीति के धंधे में पारदर्शिता नहीं है और जहां पारदर्शिता नहीं है, वहां मूल्यांकन नहीं हो सकता। हालांकि इससे इतर तमाम धंधे हैं जहां पारदर्शिता और अच्छी कमाई दोनों ही हैं। उनमें निवेश लाभ का सौदा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगर आप शेयर बाज़ार में यह सोचकर निवेश कर रहे हैं कि बराबर हर साल मुनाफा कमाते रहेंगे तो यह भ्रम फौरन मन से निकाल दीजिए। हकीकत यह है कि यहां बड़े से बड़े दिग्गज़ निवेशकों को भी घाटा खाना पड़ता है। बीते साल 2018 में अपने यहां जिस तरह मिडकैप व स्मॉल-कैप शेयरों की अंधाधुंध धुनाई हुई है, उसमें अधिकांश धुरंधर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर घाटा सहना पड़ा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश करना बहुत रिस्की है। फिर भी देश में लगभग 4.14 करोड़ लोग फिलहाल यह रिस्क उठा रहे हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड में निवेश करनेवालों के खातों की संख्या 8.91 करोड़ पर पहुंच चुकी है। ज़रूरी नहीं कि इन सबके पास ज़रूरत से ऊपर इफरात धन हो। हालांकि शेयर बाज़ार मूलतः उन्हीं लोगों के लिए है जिनका धन इसमें डूब भी जाए तो खास फर्क नहीं पड़ता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

इधर कुछ दिनों से स्मॉल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों में जान आ गई लगती है। लेकिन पिछले 13 महीनों में बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक लगभग 35% और मिडकैप सूचकांक 25% लुढ़क चुका है। इस दौरान अच्छी-खासी कंपनियों के शेयरों ने आम निवेशकों को रुला डाला। लेकिन कंपनी अगर अच्छी है तो पछताने के बजाय उसमें खरीद बढ़ा देने में कोई हर्ज नहीं है। समझिए कि यह आपके धैर्य की परीक्षा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी