शेयर बाज़ार कोई मां या मौसी नहीं कि आपकी परवाह करे। उसे नहीं लगता कि आप इतने खास हैं कि आपको औरों से ज्यादा मिलना चाहिए। आप अगर नाकाम होते हैं तो शेयर बाज़ार आपको बचाने या ढाढस बंधाने नहीं आता। मगर हम यह हकीकत स्वीकार करने से भागते हैं। धन गंवाने का दोष दूसरों पर मढ़ते हैं। ध्यान रखें कि यहां अपने किए की सारी ज़िम्मेदारी खुद उठानी पड़ती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बहुत छोटी कंपनियां शेयर बाज़ार में अक्सर बहुत बड़ा कमाल कर देती हैं। हमने करीब पांच साल पहले 10 अगस्त 2014 इसी कॉलम में केवल बीएसई में लिस्टेड कंपनी मॉरगैनाइट क्रुसिबल को चुना था। पिछले चार सालों में कंपनी का शुद्ध लाभ ढाई गुना बढ़ा है, जबकि इसी दौरान उसका शेयर छह गुना (385 से 2330) तक उठने के बाद अब भी साढ़े तीन गुना (1365) ऊपर है। आज भी तथास्तु में पेश है एक माइक्रोकैप कंपनी…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था की लटें शिव की जटाओं की तरह उलझी हुई हैं। एक लट खुलते ही गंगा बह निकलती है। अर्थव्यवस्था की लटें भी जितनी अच्छी तरह खोली जाएं, देश में विकास की गंगा उतनी ही बेधड़क बहने लगती है। हर साल बजट इन्हीं लटों को खोलने का काम करता है। देखना यह है कि पांच साल के कदमताल के बाद मोदी सरकार नए कार्यकाल के पहले बजट में क्या करती है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

बड़ी व ब्लूचिप कंपनियों के शेयर चढ़ते जा रहे हैं, जबकि स्मॉल व मिडकैप कंपनियों के शेयर ज़मीन से उठ नहीं पा रहे। यह सिलसिला जनवरी 2018 के बाद से बदस्तूर जारी है। खास वजह यह है कि अर्थव्यवस्था के मुश्किल वक्त में निवेशकों को ब्लूचिप कंपनियों में सुरक्षा दिखती है, जबकि छोटी व मझोली कंपनियों में खतरा। लेकिन वक्त सुधरते ही शीर्ष सूचकांकों से बाहर पड़ी कंपनियां भी चमक सकती हैं। तथास्तु में एक संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

कंपनियां छोटी से बड़ी बनती हैं। कुछ राज्यों तक सीमित ब्रांड बढ़ते-बढ़ते बड़े ब्रांडों तक का अधिग्रहण कर लेते हैं और कंपनी अचानक क्षेत्रीय से राष्ट्रीय बन जाती है। उद्योग में एक तरीका अंदर से धीरे-धीरे बढ़ने का है जिसे ऑर्गेनिक या कार्बनिक विकास कहते हैं। दूसरा तरीका इन-ऑर्गेनिक विकास या अधिग्रहण का है। आज हम तथास्तु में ऐसी कंपनी पेश कर रहे हैं जो अधिग्रहण के जरिए बढ़ी है और उसकी भावी रणनीति भी यही है।औरऔर भी

अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2018-19 में पांच सालों में सबसे कम रही है। कृषि की विकास दर मात्र 2.9% है, जबकि पिछले साल 5.9% रही थी। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सुस्ती का शिकार है। शेयर बाज़ार में लिस्टेड 1619 कंपनियों का समग्र शुद्ध लाभ मार्च 2019 की तिमाही में साल भर पहले से कम रहा है। लेकिन शायद दबने के बाद अब उठने का दौर शुरू हो रहा है। तथास्तु में आज उठने को तैयार एक कंपनी…औरऔर भी

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद शेयर बाज़ार में नई तेज़ी आ गई है। निफ्टी 12,000 और सेंसेक्स 40,000 के पार जा चुका है। यह तेज़ी जारी रह सकती है, बशर्ते कंपनियों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) बढ़ने लगे। अभी तक पी/ई अनुपात का जलवा छाया रहा है। कंपनियों का मुनाफा नहीं बढ़ा तो बाज़ार कभी भी भरभराकर गिर सकता है। तथास्तु में आज अपने उद्योग में औरों से बेहतर काम कर रही कंपनी…औरऔर भी

राजनेता अपनी ताकत चुनावों में जनता के वोट पाकर हासिल करते हैं। जनता के बम्पर वोट मिलने से ही उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। लिस्टेड कंपनियां भी शेयर बाजार के ज़रिए निवेशकों से पूंजी, साख व ताकत हासिल करती हैं। साख व ताकत बढ़ने से उनके शेयर का मूल्य बढ़ता है। इससे कंपनी के साथ उसके शेयरधारकों को भी लाभ मिलता है और दोनों साथ-साथ जीतते चले जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार से आप ज्यादा रिटर्न महज इसलिए नहीं कमाते कि आपने बहुत जटिल बिजनेस मॉडल वाली कंपनी में निवेश किया है। कंपनी ऐसी होनी चाहिए जिसका बिजनेस मॉडल आपको अच्छी तरह समझ में आ जाए। साथ ही उसके धंधे में एंट्री बैरियर इतना तगड़ा होना चाहिए कि दूसरा आसानी से घुस न पाए। वह एक-एक कदम भी बढ़ती रही तो काफी है, दस कदम की छलांग लगाने की ज़रूरत नहीं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी