भागने का नहीं, वक्त है निवेश का
इस समय शेयर बाज़ार की स्थिति साल 2008 जैसी हो गई है। वैसी ही निराशा हर तरफ छाई है। कोरोना वायरस का कहर कितना तबाही मचाएगा, पता नहीं। शुक्रवार को बाज़ार खुलने के 5 मिनट के भीतर ही निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। निवेशक घबराकर शेयरों से सोने की तरफ भाग रहे हैं। लेकिन समझदारी की बात करें तो यही वक्त है अच्छी कंपनियों में निवेश का। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी
सच है कि हस्ती नहीं मिटती हमारी!
भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक ताकत इतनी जबरदस्त है कि सरकार गलत से गलत नीतियां अपना लें, फिर भी यह पलटकर उठ खड़ी होती है। सरकार की अनीति और सच्चाई को ही नकारने के चलते हमारी आर्थिक विकास दर घटती जा रही है। लेकिन आश्चर्य है कि जनवरी 2020 में हमारा परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) आठ साल के रिकॉर्ड शिखर पर पहुंच गया। मतलब, देश का मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र उठने लगा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी
इन्हें भी मिलेगी दिल्ली जैसी शान!
देश में अच्छे लोगों की कमी नहीं है। लेकिन हमारी राजनीति में अच्छे लोगों को बहुत कम भाव मिलता है। हालांकि दिल्ली में अचानक ऐसे अच्छे लोग राजनीति में छा जाते हैं। शेयर बाज़ार में भी इस समय बहुत सारी अच्छी कंपनियों को भाव नही मिल रहा। लेकिन यकीन मानें कि जल्दी ही दिल्ली की राजनीति की तरह इन्हें भी इनका अंतर्निहित भाव मिलना शुरू हो जाएगा। आज तथास्तु में ऐसी ही संभावनामय, मगर दबी हुई कंपनी…और भीऔर भी
मिट गया बजट का तगड़ा झटका
बजट ने अर्थव्यवस्था को भले ही निराश किया हो, लेकिन शेयर बाज़ार थोड़ा-सा झटका खाने के बाद दोबारा बजट-पूर्व स्थिति में आ गया। सेंसेक्स अब भी 24.49 के पी/ई पर ट्रे़ड हो रहा है, जबकि उसका दीर्घकालिक औसत पी/ई अनुपात 18-19 गुने का है। जाहिर है कि निवेश की माकूल रेंज में आने के लिए बाज़ार को 25% से ज्यादा गिरना होगा। क्या यह संभव है? न भी संभव हो तो पेश हैं निवेश लायक दो कंपनियां…और भीऔर भी
या तो चढ़े या गिरे, बीच की बेकार
शेयर बाज़ार में तीन तरह की कंपनियां। पहली, जिनके शेयर बराबर चढ़ रहे हैं और तभी तभी गिरते हैं जब धंधे या प्रबंधन पर चोट लग जाए। दूसरी, जिनके शेयर बंधे दायरे में भटक रहे हैं। तीसरी, जिनके शेयर लगातार गिरे जा रहे हैं और तभी उठते हैं जब उनसे जुड़ी कोई बड़ी अच्छी खबर आ जाए। पहली ट्रेडिंग के लिए मुफीद। तीसरी लंबे निवेश के लिए। मगर, बीच वाली बेकार। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी
कंपनी मजबूत तो शेयर भी चमकेंगे
कंपनियों की मूलभूत मजबूती कभी-कभी उनके शेयरों के भाव में नहीं झलकती। ऐसा प्रायः कम अवधि, कुछ महीने या साल तक होता है। लंबी अवधि में शेयरों के भाव कंपनी की मजबूती पकड़ लेते हैं। इसीलिए लंबी अवधि का निवेश छोटी अवधि की ट्रेडिंग से कम रिस्की होता है। इस पर अगर कंपनी के पास विपुल आस्तियां हों तो अंततः उसका दम शेयरों में दिख ही जाता है। तथास्तु में आज ऐसी ही विपुल आस्तियों वाली कंपनी…औरऔर भी
निवेश का कोई सुनहरा क्षितिज नहीं
निवेश का कोई सुनहरा क्षितिज नहीं, जिसके पार अच्छे ही अच्छे अवसर हों। हर निवेश में रिस्क है। यह रिस्क शेयरों में सर्वाधिक है। बैंक जमा का रिस्क पीएमसी बैंक ने साफ कर दिया। इसलिए ‘2020 के ट्वेंटी-ट्वेंटी’ महज जुमला है। फिर भी ज़माने के साथ चलना है तो हम भी आज तथास्तु में नए साल के लिए 20 स्टॉक्स पेश कर रहे हैं। इन सभी पर यहां पहले विस्तार से लिखा जा चुका है।और भीऔर भी
बाज़ार की पहेली, दिग्गज भी दंग!
शेयर बाज़ार चढ़ता ही जा रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था डूब रही है। यह हमारे या आपके लिए ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यन तक के लिए दुरूह पहेली है। उन्होंने गुरुवार को आईआईएम अहमदाबाद में फाइनेंस, अर्थव्यवस्था व मार्केटिंग में बर्ताव संबंधी विज्ञान के एनएसई केंद्र के उद्घाटन करते हुए छात्रों से कहा कि यह पहेली सुलझा लो तो वे अमेरिका से उनके पास आ जाएंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
आज हालात उतने भी बदतर नहीं
अर्थव्यवस्था के आंकड़े जो निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह नौकरीपेशा लोगों से लेकर काम-धंधे में लगे उद्यमियों तक में झलकने लगी है। कहीं से उजाले की किरण नहीं दिख रही। औद्योगिक उत्पादन व रोज़गार घटने के बाद अब मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी है। लेकिन इस निराशा के बीच याद रखें कि 1991 में तो इससे कहीं ज्यादा बदतर स्थिति थी। इसलिए निवेश के मौके अब भी हैं। आज तथास्तु में ऐसा ही एक मौका…और भीऔर भी




