अमेरिका में बेरोजगारी 1929 की महामंदी के बाद सबसे बदतर अवस्था में है। चीन पहले से त्रस्त है। भारत की विकास दर का अनुमान मूडीज़ ने शून्य कर दिया है। कुछ अर्थशास्त्री तो इसके ऋणात्मक होने की गणना कर रहे हैं। शेयर बाज़ार से निवेशक दूर भाग रहे हैं। अप्रैल में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश 47% घट गया है। ऐसे में भागना उचित है या डटे रहना। तथास्तु में इसका जवाब एक कंपनी के साथ…औरऔर भी

देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि 0.33% कोरोना मरीज ही वेंटीलेटर पर हैं। लेकिन बाद में ज़रूरत तो बढ़ ही सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में अभी 19,398 वेंटीलेटर ही उपलब्ध हैं, जबकि 60,884 का ऑर्डर दिया गया है जिसमें से 59,884 वेंटीलेटर घरेलू कंपनियां बना कर देंगी। साफ है देश में वेंटीलेटर काफी कम हैं। तथास्तु में कोरोना काल में बिजनेस के मौके पकड़ती एक कंपनी…औरऔर भी

कोरोना के कहर ने शेयर बाज़ार के गुब्बारे की हवा निकाल दी। तमाम शेयर अब अपनी औकात, यानी अंतर्निहित मूल्य पर आ चुके हैं। शायद यही वजह है कि आम भारतीय निवेशकों का रुझान शेयर बाज़ार की तरफ दोबारा तेज़ी से बढ़ने लगा है। लेकिन अब भी हालत ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली है। बाज़ार एक बार फिर गोता लगा सकता है। इसलिए मजबूत कंपनियों में ही वाजिब भाव पर निवेश करना चाहिए। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

कोरोना के कोहराम में ऐसा हल्ला है जैसे दुनिया खत्म होने जा रही है, जबकि सच यही है कि यह एक आम वायरस है जो कुछ महीने में गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो जाएगा। फिर जीवन बहुत जल्दी पटरी पर आने लगेगा। संभव है इसके बाद दुनिया के राजनीतिक व अंतरराष्ट्रीय संबंधों के समीकरण थोड़े बदल जाएं। लेकिन बिजनेस की लंबी छलांग की गुंजाइश बनी रहेगी। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

तीन महीने पहले 11 जनवरी को चीन ने कोरोना वायरस से हुई पहली मौत की घोषणा की थी। उसके बाद सारी दुनिया उलट-पुलट चुकी है। कोरोना की महामारी कोने-कोने तक जा पहुंची है। एशिया ही नहीं, यूरोप से लेकर अमेरिका तक कोहराम मचा हुआ है। विश्व अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आ गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता। लेकिन यह घना अंधेरा भविष्य का उजाला भी लाएगा। आज तथास्तु में निवेश लायक 11 कंपनियां…औरऔर भी

मार्च 2020 में सेंसेक्स 23% गिर गया। शेयर बाज़ार से निवेशकों के करीब 15 लाख करोड़ रुपए उड़ गए। विश्व वित्तीय संकट के आगाज़ के दौरान अक्टूबर 2008 में भी सेंसेक्स 24% गिरा था। पर, तब निवेशकों को इतना नुकसान नहीं हुआ था। जाहिर है बाज़ार अब तेज़ी से मंदी के चक्र में गिर चुका है। खरीदने का शानदार मौका। मगर, आम निवेशकों के पास बाज़ार में लगाने को धन ही नहीं। फिर भी पेश है तथास्तु…औरऔर भी

पिछले 30 दिनों में निफ्टी 26.59% गिरा है, जबकि रिलायंस 24.60%, इनफोसिस 17.96%, एचडीएफसी 23.76%, लार्सन एंड टुब्रो 32.29% और एचडीएफसी बैंक 25.02% गिर चुका है। जाहिर है, ऐसी मजबूत कंपनियों के शेयर आंधी में ज़मीन पर टपके पक्के आम की तरह हैं जिन्हें उठा लेना एक-दो साल में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस वक्त बाज़ार में निवेश के अवसरों की कमी नहीं। ऐसे में आज तथास्तु में महज जानने के लिए एक कंपनी…औरऔर भी

कोरोना के कहर के चलते बीएसई सेंसेक्स इस साल 20 जनवरी के शिखर से 20 मार्च तक 29.23% गिर चुका है, वह भी तब जब 20 मार्च को 5.75% उछला है। शिखर पर वह 29 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। अभी लगभग 18 के पी/ई पर। निवेश की आदर्श स्थिति इसके 15 के पी/ई तक गिरने पर आएगी। फिर भी इस वक्त निवेश के बहुतेरे मौके हैं। आज तथास्तु में इनमें से एक मौका…औरऔर भी

सब कुछ आराम से चले तो उसे शेयर बाज़ार नहीं कहते। बीते हफ्ते के आखिरी दो दिन देश-दुनिया के बाज़ारों में जैसा हुआ, उसने 1987 के काले सोमवार की याद दिला दी। तब अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकाक एक दिन में 22.6% गिर गया था। शुक्रवार को निफ्टी 10% गिरा तो निचला सर्किट लग गया। फिर उठा तो 3.81% बढ़कर बंद हुआ। एक दिन में 1600 अंक या 16% का चक्कर! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

डेढ़ साल पहले 24 अगस्त 2018 को यस बैंक का शेयर 404 रुपए के शिखर पर था। लेकिन 6 मार्च 2020 को 5.50 रुपए तक लुढ़क गया। सारी की सारी पूंजी लगभग स्वाहा। ऐसा तब हुआ, जब यस बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात मार्च 2019 में 16.5% और सितंबर 2019 में 16.3% रहा है जबकि बासेल-3 का अंतरराष्ट्रीय मानक 10.5% का है। यह है शेयरों में निवेश का रिस्क। फिर भी तथास्तु में आज एक और बैंक…और भीऔर भी