बैंक व देशी-विदेशी वित्तीय संस्थान पुख्ता इंतज़ाम रखते हैं कि उनकी ट्रेजरी डेस्क को कंपनियों की जो खास अंदरूनी जानकारियां हासिल हैं, वे किसी भी तरह लीक न हों। उनके इस विभाग के किसी भी नए-पुराने कर्मचारी को शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की इजाज़त नहीं होती। मसलन, मेरे एक दोस्त की बेटी आईआईएम से एमबीए करने के बाद जेपी मॉर्गन में कार्यरत है, लेकिन वो ट्रेड या निवेश नहीं कर सकती। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अंदर की, अघोषित सूचनाओं के आधार पर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश करना अपराध है। इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं। यह अलग बात है कि यह अपराध तय होने में दसियों साल लग जाते हैं। उसके ऊपर भी अपील पर अपील चलती रहती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का ताज़ा मामला साल 2007 का है। इसमें बड़े मलाई खाते हैं, जबकि छोटे व रिटेल ट्रेडरों को ‘इनसाइडर’ खबरों के नाम पर फंसाया जाता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का युद्ध है जिसमें आप अपनी चाल से दूसरों के बैंक खाते का धन अपने खाते में खींचते हो। दूसरे को कम समझना या अपने को उस्ताद समझना यहां घातक है। शांत मन, साफ बुद्धि व सटीक विश्लेषण आपके हथियार हैं। सिद्धांतः जो सूचनाएं सबको उपलब्ध हैं, वही आपको भी मिल सकती हैं। अंदर की सूचनाओं पर आधारित इनसाइडर ट्रेडिंग भी चलती है। लेकिन वो अपवाद है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हम एक ही शेयर में बार-बार निवेश नहीं कर सकते। लेकिन एक ही शेयर में बार-बार ट्रेडिंग कर सकते हैं। वजह यह है कि निवेश में हम शेयर के भाव की दीर्घकालिक दिशा पर नज़र रखते हैं, उसकी लाइन को ध्यान में रखते हैं। लेकिन भाव असल में रेखा के रूप में नहीं, बल्कि लहरों के रूप में चलते हैं। उनकी इस अल्पकालिक लहरों के उतार-चढ़ाव को पकड़कर हम ट्रेडिंग में कमाते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बात साफ बड़ी साफ है कि वित्तीय बाज़ार में कमाई शुद्ध रूप से साफ समझ और अनुशासन का खेल है। हर सौदे का रिस्क व रिवॉर्ड का अनुपात समझा और मुनाफे को अधिकतम व घाटे को न्यूनतम रखने का अनुशासन माना तो दिल-दिमाग के साथ आपका बैंकखाता भी सुरक्षित रहेगा। लेकिन बुद्धि को छोड़ मन या इन्ट्यूशन पर चले तो कभी भी किनारा नहीं मिलेगा। आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी हमेशा बचाकर चलनी है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

महीनेभर में बीस दिन ट्रेडिंग की। सौदे वैसे चुने जिसमें गिरने की आशंका एक और बढ़ने की संभावना दो हो। रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात 1:2 का। मान लें कि बीस में से 60% यानी बारह सौदे गलत हों और आपने स्टॉप-लॉस 2% लगाया हो तो कुल नुकसान हुआ 12×2 यानी 24% का। लेकिन बाकी आठ सौदों में फायदा होगा 8×4 यानी 32% का। इस तरह बहुत खराब स्थिति में भी महीने भर में 8% कमाई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में बड़ा रिस्क है। लेकिन ट्रेडिंग की सलाह देनेवालों के लिए यह बड़ा सुरक्षित पेशा है। आप इस बात को अच्छी तरह समझ लें। उन्होंने तो चैनल से लेकर वेबसाइट या अखबार में सलाह फेंकी, नोट पकड़े और किनारे हो लिए। लेकिन उस सलाह पर डूबने या उठनेवाली पूंजी आपकी है। बच्चे से भी परची उठवा लें तो प्रायिकता 50-50% रहेगी। नीति बनाइए कि 50-50% में भी लाभ कमाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बंधे-बंधाए ढर्रे पर चलनेवाले भविष्य को लेकर निश्चिंत हो सकते हैं क्योंकि लगभग तय होता है कि आगे क्या होगा। मगर, लीक छोड़कर चलनेवाले हमेशा ऐसी धार पर खड़े होते हैं जहां पक्का पता नहीं होता कि कल क्या होगा। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह लीक से हटकर चलने का दुस्साहस है। यहां कुछ भी पक्का नहीं। इसलिए यहां हमेशा प्रायिकता की गणना करके चलें। सही तो क्या, गलत तो क्या? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कुछ दिनों पहले एक दुर्जन का फोन आया। बोले कि उनकी रिसर्च फर्म कैश व फ्यूचर्स में इंट्रा-डे टिप्स देती है। रोज़ एक पक्की सलाह। मैंने पूछा कि स्टॉक सेलेक्शन का उनका सिस्टम क्या है। लगे आंय-बांय बकने। लेकिन दावा कि उनकी दस में से आठ टिप्स सटीक बैठती है। फीस 11,000 रुपए प्रति माह। ऐसे ठगों से सावधान रहें। कमाना है तो ऐसा सिस्टम बनाइए कि लोग आपके बाद खरीदें या बेचें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडरों को अगर बाज़ार से कमाना है तो उन्हें सच्चाई को जस का तस समझने की कोशिश करनी होगी और अपनी सीमाओं को स्वीकार करना होगा। मन का फंदा तोड़कर उसके ऊपर बुद्धि को मांजकर रखना होगा। कोई कितना भी झांसा दे, हमें कम मेहनत में ज्यादा कमाई के लालच में नहीं फंसना है क्योंकि हमें लालच में फंसानेवाले दरअसल अपनी आसान कमाई का इंतज़ाम करने में लगे होते हैं। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी