ट्रेडिंग के स्टॉक्स चुनते वक्त सबसे अहम है उनके भावों का ट्रेन्ड। हमें देखना होता है कि उनका लॉन्ग टर्म (दो-तीन साल) ट्रेन्ड, मीडियम टर्म (तीन से छह महीने) ट्रेन्ड और शॉर्ट टर्म (5-20 दिन) ट्रेन्ड क्या चल रहा है। अगर तीनों ट्रेन्ड तेज़ी के हों तो सबसे अच्छा है। अन्यथा, कम से कम लॉन्ग और मीडियम टर्म तो तेज़ी के होने ही चाहिए। इनमें हम रिट्रेसमेंट ट्रेड से कमाते हैं। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कमानेवाले तेज़ी से भी कमाते हैं और मंदी से भी। मसलन, अभी गिरावट का दौर चल रहा है। गिरनेवाले शेयरों की संख्या बढ़नेवाले शेयरों के कहीं ज्यादा है। मगर, हम खरीद के ही सौदे क्यों तलाशते हैं? जवाब है न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाने का लक्ष्य। गिरावट पर शॉर्ट-सेलिंग से कमाते हैं और ऐसा डेरिवेटिव्स में ही किया जा सकता है, जहां बहुत रिस्क है और भरपूर पूंजी लगती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हमारी इच्छा से परे शेयरों के भावों की स्वतंत्र गति होती है। वैसे तो हर सौदा विपरीत सौदे से नत्थी होकर ही पूरा होता है। लेकिन जब खरीदने की आतुरता ज्यादा और बेचने की कम हो या ज्यादातर बेचनेवाले निकल चुके हों, तभी भाव बढ़ते हैं। इसकी उल्टी स्थिति में गिरते हैं। हमें शांतभाव से यही पकड़ना है कि किस भाव पर प्रोफेशनल निवेशकों व संस्थाओं में खरीदने की आतुरता हो सकती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का कोई इकलौता स्टाइल नहीं है। यहां लोग तरह-तरह से कमाते हैं। एक परिचित सज्जन हैं जो 25-30% सालाना कमाने का लक्ष्य केवल 3-4 शेयरों में ही ट्रेडिंग से पूरा कर लेते हैं। एक अन्य जानकार हैं जो कभी स्टॉप-लॉस नहीं लगाते। फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के चढ़ते स्टॉक खरीदते हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ गिरने पर ज्यादा खरीद लेते हैं। पर्याप्त कमा लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह ट्रेडिंग में हर तरफ मुंह मारने से कमाई नहीं होती। किसी के बताए स्टॉक की तरफ लपक लेने की आदत सही नहीं है। हमें अपनी लय-ताल से मिलनेवाले 15-20 स्टॉक्स चुन लेने चाहिए। बहुत हुआ तो दायरा 40-50 तक जा सकता है। लेकिन उसके बाहर नहीं। ट्रेडिंग में कमाई का आधार है शेयरों के भाव की छोटी-बड़ी लहरों पर नीचे से ऊपर तक कमाना। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जिस तरह हर इंसान का स्वभाव अलग होता है, उसी तरह हर स्टॉक का भी स्वभाव अलग-अलग होता है। हालांकि कुछ स्टॉक्स एकदम एक-सा बर्ताव करते हैं। पर अमूमन हरेक की बारीकियां अलग होती हैं। दरअसल, किसी स्टॉक में किस तरह के निवेशक व ट्रेडर सक्रिय हैं, उसी से उसका स्वभाव बनता है। ऐसे में सबसे अच्छी स्थिति तब होती है जब स्टॉक का स्वभाव हमारे अपने स्वभाव की लय से मिल जाए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

अखबार के सोलह पन्नों में हर पन्ना सबके लिए नहीं होता। न्यूज़ चैनल का हर प्रोग्राम भी सबके लिए नहीं होता। इसी तरह हर दिन इस कॉलम में ट्रेडिंग के माकूल मौके पेश जाते हैं। हमारी कोशिश न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिवॉर्ड के सौदे पकड़ने की होती है। फिर भी ज़रूरी नहीं है कि कोई सब्सक्राइबर रोज़ाना ट्रेडिंग करे। कहावत भी है कि सौ सुनार की, एक लोहार की। हिसाब-किताब लगाकर सौदा करें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

यहां सुझाए चार स्टॉक्स में से चुनाव कैसे करें? इसके लिए चार टेक्निकल संकेतकों को लेकर आपको अपना ट्रेडिंग सिस्टम बनाना होगा। ये चार संकेतक हैं: चार्ट पर भाव जहां से ठीक पिछली बार उठे या गिरे थे; नीचे की आखिरी कैंडल हैमर है या ऊपर की कैंडल शूटिंग स्टार; 5, 13, 20 दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज और 50, 75, 100, 200 300 व 365 दिनों के सिम्पल मूविंग एवरेज; और आरएसआई। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

क्या हम रोज़ाना जो तीन शेयर अभ्यास के लिए चुनकर कहते हैं कि इसमें स्टॉप-लॉस वगैरह खुद निकाल लें, वो एकदम फालतू जानकारी है और आपको अंतिम पैरा में एंट्री, एक्जिट व स्टॉप-लॉस की पूरी गणना के साथ चुने गए स्टॉक को ही देखना है? नहीं। दरअसल, हम ट्रेडिंग की टिप्स नहीं देते, बल्कि स्टॉक चुनने में आपकी मदद करते हैं। आप तीन + एक में से किसी को ठोंक-बजाकर चुन सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

इस कॉलम के दो-तिहाई हिस्से में बताया जाता है कि ठीक पिछले दिन निफ्टी का क्या हाल रहा, शेयर बाज़ार में घबराहट का सूचकांक क्या कहता है, संस्थाओं की खरीद, अमेरिका व यूरोप में बाजार का बंद स्तर और आज एशिया व ऑस्ट्रेलिया में शुरुआती रुख। फिर निफ्टी की संभावित दिशा के साथ तीन शेयर अभ्यास के लिए। हर दिन इतना बताने का मसकद है आपको खुद निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी