अगर दक्ष प्रबंधन और मजबूत मूलाधार वाली कंपनी का शेयर गिर गया हो तो उसके निवेश करना लंबे समय में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। लेकिन कोई शेयर अगर छह-आठ महीने से बराबर गिरता जा रहा है तो सस्ता समझकर उसमें ट्रेडिंग करना बड़ा महंगा पड़ता है। मगर, क्या किया जाए! दूध के जले भी पेन्नी स्टॉक्स के चक्कर में पड़ जाते हैं। ट्रेडिंग और निवेश के बुनियादी सूत्र भिन्न हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

धंधे की दुनिया है। यहां कुछ भी मुफ्त नहीं। लेना-देना ही व्यवहार है। जहां मुफ्त मिलता है, वहां आप ही बिकाऊ माल या सेवा हो। तरीके बदल गए, लेकिन धंधा बदस्तूर जारी है। ईमेल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन स्टोरेज़ और न जाने कितने ऐप्प। सब मुफ्त। कैश में कोई अदायगी नहीं। लेकिन वे आपकी ही नहीं, आपके दोस्तों तक की सारी जानकारी खींच लेते हैं ताकि आपको बेचा जा सके, मनमाफिक दुहा जा सके। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

उलटा-सीधा खा-पी लिया तो शरीर का सारा रासायनिक संतुलन बिगड़ जाता और लयताल टूट जाती है। इसी तरह खबरें किसी स्टॉक का सारा पैटर्न बिगाड़ देती हैं। तब कोई गणित या समीकरण नहीं चलता। दुलकी चाल में चलता स्टॉक एकबारगी ऐसा फिसलता या उछलता है कि कोई पकड़ नहीं पाता। अपने यहां प्रमोटर या पहुंचवाले लोग रोक के बावजूद खबरों पर खेलते हैं। इसलिए हमें खबरों के दिन ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मूल है भावों के उतार-चढ़ाव से कमाना। इसलिए दिमाग में स्पष्ट होना चाहिए कि शेयरों के भाव बढ़ते या गिरते क्यों हैं? अर्थव्यवस्था या कंपनी में बेहतरी की आशा है या जेब में जमकर नोट हों तो सभी खरीदना चाहते हैं। बेचनेवाले इस चाहत का फायदा उठाकर भाव चढ़ाते जाते हैं। वहीं, निराशा के आलम में हर कोई निकलना चाहता है तो जो भी दाम मिले, उस पर बेच डालता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयरों के उठते-गिरते भावों, उनकी धड़कन और लय में सारा रहस्य छिपा है। लेकिन हम अपने मन में पहले से बैठी धारणाओं के चलते उसे पकड़ नहीं पाते। जब हम भावों की लय पर ध्यान लगाते हैं तो मन की धारणाएं पिघलने लगती हैं और उस शेयर का सच्चा स्वभाव हमें साफ-साफ दिखने लगता है। यही वह ज्ञान है जिसके आधार पर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाई की जा सकती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हमें उन्हीं शेयरों में ट्रेडिंग करनी चाहिए जिनमें अच्छा कारोबार होता है। ऐसे स्टॉक्स चुनने के लिए अलग से मशक्कत की जरूरत नहीं है क्योंकि स्टॉक एक्सचेंजों के सूचकांक में ऐसे स्टॉक्स ही रखे जाते हैं। अपने माफिक कुछ स्टॉक्स इनमें से चुन लें। फिर उनके साप्ताहिक व दैनिक भावों के चार्ट पर बराबर ध्यान देना शुरू कर दें। दो-चार टेक्निकल इंडीकेटरों की मदद से विश्लेषण करें। धीरे-धीरे लय पकड़ में आने लगेगी। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सांसों का आना-जाना रुक जाए तो जिंदगी थम जाती है। इसी तरह किसी स्टॉक में खरीद-बिक्री बंद हो जाए तो वह एक तरह से मरने लगता है। और, जो मरने लग गया, उससे कैसी अपेक्षा, काहे की उम्मीद। इसीलिए जिस स्टॉक में इतनी कम ट्रेडिंग हो कि वह ठंडा पड़ गया हो, उनमें कभी ट्रेडिंग की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कभी गलती से खरीद लिया तो वह आपके गले की हड्डी बन जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शिक्षा या रोज़गार के लिए देशों की सीमाएं खत्म हो रही हैं। इस तरह ग्लोबल होती दुनिया में कम से कम शेयर बाज़ार तो ग्लोबल हो ही चुके हैं। इसलिए ट्रेडिंग के आगाज़ से पहले विश्वबाज़ार पर नज़र डाल लेना ज़रूरी है। अमेरिका के डाउ जोन्स और S&P-500 सूचकांक की स्थिति कल क्या रही? आज ऑस्ट्रेलिया व एशिया के बाज़ारों का क्या हाल है? सारा कुछ गूगल फाइनेंस पर लाइव मिल जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कुछ प्रोफेशनल ट्रेडर लंबे समय के निवेश का मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि जब खरीदा गया शेयर बढ़ने के बजाय गिरता ही जाता है तो लोग मजबूरन लंबे निवेशक बन जाते हैं। लेकिन आम ट्रेडर के लिए अच्छी रणनीति यह होगी कि वह फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों के ही शेयर खरीदे। गिरे तो और ज्यादा खरीद ले। साथ ही 15-20 दिन नहीं, बल्कि पोजिशनल ट्रेड करे और मुनाफा कमाकर ही निकले। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार के साथ चलें, उसके विपरीत नहीं। बाज़ार जब जमकर गिरता है, तब भी बहुत सारे शेयर बढ़ते हैं। लेकिन जब सुबह से ही बाज़ार का गिरना साफ हो गया हो, तब क्या हमें खरीदने का सौदा करना चाहिए? नहीं, क्योंकि हम शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने आए हैं, जबरदस्ती की बहादुरी दिखाने नहीं। बाप बहादुर शेर से भिड़ गए। फिर क्या हुआ? शेर खा गया! ऐसी बहादुरी से दूर रहना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी