बैंक, संस्थाएं या प्रोफेशनल ट्रेडर रिटेल ट्रेडरों की तरह सारे शेयर एकमुश्त नहीं खरीदते। वे धीरे-धीरे कुछ दिनों में पोजिशन बनाते हैं। साथ ही वे सौदा एक नहीं, बल्कि कई ब्रोकरों के ज़रिए करते हैं। एक बार उनको वांछित मात्रा में शेयर मिल जाते हैं, फिर वे फेटना शुरू कर देते हैं। लेकिन इंट्रा-डे कतई नहीं। बैंकों की न्यूनतम होल्डिंग अवधि ट्रेडिंग वाले दिन को छोड़कर दो दिन, यानी टी+2 की होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ऑपरेटरों के खेल को हमें दूर से ही नमस्कार कर देना चाहिए। लेकिन बैंकों, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों के तौर-तरीकों को हम समझ सकते हैं और हमें समझना भी चाहिए। यूं तो इनमें सबकी अलग-अलग ट्रेडिंग स्टाइल होती है। लेकिन यह बात सबमें समान है कि वे फंडामेंटल रूप से मजबूत और लिक्विड कंपनियों में ही ट्रेड करते हैं। लिक्विड मतलब ऐसी कंपनियां जिनके लाखों शेयरों की ट्रेडिंग औसतन हर दिन होती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सक्रिय ऑपरेटरों के खेल निराले हैं। तमाम ऑपरेटर कंपनी प्रवर्तकों के साथ मिलकर खेल करते हैं। दरअसल, प्रवर्तकों के पास कंपनी के शेयर घोषित मात्रा से कहीं ज्यादा होते हैं। वे अन्य व्यक्तियों या फर्मों के नाम से शेयर लेकर रखते हैं और इनके ज़रिए अपनी कंपनी के शेयरों को उठाते-गिराते हैं। इन ऑपरेटरों से तो पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी तक नहीं पार पाती। हमें इनसे सतर्क रहना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

किसी भी काम में कामयाबी के लिए सहजता व अपने पर विश्वास बहुत ज़रूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाने के वास्ते रिटेल ट्रेडर के लिए ये दोनों ही बातें बड़ी नुकसानदेह होती हैं। कारण, जिस भी तरीके से हमारा विकास हुआ है, उसमें सहजता से निकला इन्ट्यूशन बाज़ार में हमेशा गलत सिग्नल देता है। यहां सफलता का एकमात्र सूत्र है बैंकों, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों के सिग्नल को पकड़ना। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के व्यापक मायाजाल में रिटेल ट्रेडरों का अपना अलग स्थान है, बशर्ते वे शांत भाव से अनुशासन व अभ्यास से अपना सिस्टम विकसित कर लें। किसी सलाह पर आंख मूंदकर चले तो कभी अपना सिस्टम नहीं बना सकते। रोज़ाना डायरी में लिखना होगा कि कोई सौदा क्यों किया। अगर लिखा कि फलांने के बताने पर सौदा किया तो सीखेंगे कैसे! खुद को बराबर सुधारते जाने से ही पुख्ता सिस्टम बनता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो हमेशा के लिए गांठ बांध लीजिए कि कभी भी टिप्स के चक्कर में नहीं पड़ना। दरअसल, शेयर बाज़ार में भांति-भांति के ‘हिंसक’ जीव सक्रिय हैं। उनका पूरा तंत्र है जो निरीह निवेशकों व ट्रेडरों को शिकार बनाता है। वो बड़ी-बड़ी बातों के ज़रिए लालच का जाल फैलाते हैं। इनसे अलग बैंकों, संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों का समूह है जो शांति और पूरे अनुशासन से बराबर कमाता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग करते हैं तो किसी न किसी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट या ब्रोकर के पास आपका डिमैट एकाउंट होगा। वो बराबर आपको मेल या एसएमएस पर ट्रेडिंग व निवेश की चटपटी सलाह भेजता ही होगा। अक्सर ये सलाहें पहले से चढ़े हुए स्टॉक को खरीदने की होती हैं। साथ ही तमाम पेन्नी स्टॉक्स को बड़ी मात्रा में खरीदने की मुफ्त सलाह आपको भी एसएमएस से मिलती होगी। इनका मकसद आपकी जेब खाली करना होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

रोज़ाना शेयर बाज़ार में औसतन 1800 से ज्यादा कंपनियों में सक्रिय ट्रेडिंग होती है। इनमें से एक-दो कंपनी को चुनना काफी मुश्किल है। बाहरी सेवा इसे आसान बनाने में आपकी मदद कर सकती है। लेकिन उस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकते क्योंकि ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने का कोई त्रुटिहीन फॉर्मूला है ही नहीं। इसमें भी अगर आप ब्रोकरों की सेवा के चक्कर में पड़ गए, तब तो बेवजह निपट जाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने और उसमें ट्रेडिंग क्यों करनी है, इसका फैसला खुद करने का ज़िम्मा उठाने को तैयार नहीं हैं तो आप हज़ार से लेकर लाख रुपए तक की कोई सेवा ले लें, आप बाज़ार से नियमित कमाई नहीं कर सकते। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई करना शेर के जबड़े से शिकार निकालने जैसा मुश्किल काम है। इसे आसान समझना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा काम होगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कोई गिरा हुआ शेयर हमारे जैसे हज़ारों लोग भी खरीद लें तो वह गीली फुलझड़ी की तरह ज़रा-सा जलकर फिर बुझ जाएगा क्योंकि निकलने की ताक में लगे पिछले खरीदार भाव बढ़ने पर बेचने लग जाएंगे। शेयर तभी बराबर बढ़ता है जब उसमें बैंकों, म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों जैसी संस्थाओं और प्रोफेशनल ट्रेडरों की खरीद आने लगती है। परखें कि बेचने को बचे हैं कितने बेताब और संस्थाएं खरीद शुरू करेंगी क्या! अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी