हम कभी-कभी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस को मिला देते हैं। सोचते हैं कि कंपनी का फंडामेंटल सॉलिड है, तो उसका शेयर पक्का बढ़ेगा। लेकिन इस बढ़त में महीनों नहीं, सालों लग सकते हैं, जबकि ट्रेडिंग का सौदा कुछ दिनों या एकाध महीने का होता है। बाज़ार बंद होने के दिन शनिवार को आए शानदार नतीजों के बावजूद सोमवार को कंपनी का शेयर गिर जाता है क्योंकि उसमें मांग सप्लाई से कम होती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग से पहले ज़रूरी है कि मन को एकदम साफ व निर्मल कर लिया जाए ताकि बाहर जो चल रहा है, उसकी सही तस्वीर उसमें बन सके। मन को साफ करने का काम आप गौतम बुद्ध द्वारा खोजकर निकाली गई विपश्यना साधना के नियमित अभ्यास से कर सकते हैं। शेयर बाज़ार में जो चल रहा है, वो भावों के चार्ट में दिखता है जिसे डिकोड करने की आंशिक कला टेक्निकल एनालिसिस सिखाती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर आपको लगता है कि वॉरेन बफेट, जॉर्ज सोरोस या राकेश झुनझुनवाला के तरीके आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सफलता दिला देंगे तो यह आपका कोरा भ्रम है। यहां पर हर किसी को अपने रिस्क प्रोफाइल, पूंजी, मानसिक बुनावट व स्वभाव को ध्यान में रखते हुए खुद का ट्रेडिंग स्टाइल गढ़ना होता है। हमारे शेयर बाज़ार की क्या खासियत है, यहां किस तरह के लोग सक्रिय हैं, यह सब समझना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

किसी बाहरी मंत्र या टिप्स से आपको ट्रेडिंग में सफलता नहीं मिल सकती। बाहरी कम्पन तो आपको कहीं और भटका ले जाएंगे। आपको कल्पना लोक में गुम कर देंगे, जबकि आपकी मुक्ति आपके अपने कम्पनों में छिपी पड़ी है। हर बाहरी प्रभाव से परे आप जितना ज्यादा अपनी काया, चित्त, उसकी वृत्तियों और संवेदनाओं में हर पल उभरते कम्पनों को पकड़ते हैं, उतनी ही ज्यादा आपकी दृष्टि साफ होती चली जाती है। अब सोम का व्योम…और भीऔर भी

ट्रेडिंग में आपकी पूंजी लगी होती है, सारा जोखिम आप उठाते हो। इसलिए अंतिम फैसला भी शांत मन से पूरी व्यावहारिक व यथार्थपरक गणना के बाद आपका ही होना चाहिए। शांत मन और यथार्थपरक गणना की क्षमता हासिल करने में विपश्यना काफी मददगार हो सकती है। वह असल में बाहर से कुछ नहीं करती, बल्कि आपकी ही नैसर्गिक क्षमता को उभारती है और वहीं से निकलते हैं हर क्षेत्र में सफलता के सूत्र। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

विपश्यना साधना और उसका नियमित अभ्यास आपको न केवल अवचेतन में जड़ जमा चुकी निरर्थक धारणाओं से मुक्त करता है, बल्कि वह तमाम बाहरी प्रभावों के झांसे से भी निकालता है। लेकिन यह धीरे-धीरे होता है, अचानक किसी चमत्कार की तरह नहीं। रोजमर्रा के जीवन के साथ ही वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में भी इसका लाभ मिलता है। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और जो जैसा है, आप उसे वैसा देखने लगते हो। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

नहीं पता कि शेयर बाज़ार में सक्रिय कितने लोगों ने विपश्यना साधना अपनाई है। लेकिन एनाम ग्रुप के चेयरमैन वल्लभ भंसाली का नाम इस बाबत काफी चर्चित है। वे 1989 से विपश्यना कर रहे हैं। भारतीय शेयर बाज़ार के बेहद शांत व सफल कारोबारियों में शुमार हैं। अगर किसी को भागमभाग में फंसे बगैर पूरी शांति से शेयर बाज़ार से कमाई करनी हो तो वह वल्लभ भंसाली से बहुत कुछ सीख सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

चेतन व अवचेतन मन के बीच की लौह दीवार को भेदने की बड़ी व्यावहारिक विद्या गौतम बुद्ध ने वैदिक शिक्षाओं को मथने के बाद गहन आत्मसाधना से खोजकर निकाली थी। इस विपश्यना साधना ने तब आम से लेकर खास, सभी लोगों का भला किया। लेकिन करीब 2500 साल पहले पुरोहितों ने इसे गायब कर दिया। वह विद्या अब भारत में वापस आ गई है। ट्रेडरों के लिए यह विद्या बड़े काम की है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग इसलिए कर रहे हैं ताकि बाज़ार से कमा सकें। मगर पूंजी ही न रही तो कमाएंगे कैसे और किससे? इसलिए अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलनी है, यह लक्ष्य बहुत साफ होना चाहिए। इस लक्ष्य से जो भी भावनाएं भटकाती हैं, उनके प्रति आप जितना सचेत होते जाएंगे, पूर्वाग्रहों से मुक्त होते जाएंगे, उतना ही आपका निर्णय तर्क व तथ्यपरक होता जाएगा। बाकी बचा बाज़ार का जोखिम तो धीरे-धीरे उसे भी साध लेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

नकारात्मक विचारों, मान्यताओं और भावनाओं की फांस से निकलकर जब आप जो जैसा है, उसे यथाभूत देखने में समर्थ हो जाते हो तो आपको अपने कर्म की कमियां खुद ही दिखने लग जाती हैं। तब प्रतिक्रिया करने के बजाय आप क्रिया को अधिक महत्व देते हो। दूसरों या हालात पर तोहमत लगाने के बजाय अपनी कमियों को दूर करने लगते हो ताकि बाज़ार की प्रतिस्पर्धा में आप हर उन्नीस पर बीस पड़ सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी