जो लोग शेयर बाज़ार में आंख मूंदकर कूद पड़ते हैं, जिन्हें लगता है कि यहां नोट बनाना बहुत आसान है, वे अपने सपने ही नहीं, सारी पूंजी तक गंवा बैठते हैं। दो बात गांठ बांध लीजिए। पहली यह कि शेयर बाज़ार से थोड़े समय में नोट बनाना बेहद-बेहद कठिन है। दूसरे, यहां वही लोग ज्यादा कमाते हैं, जिनके पास जमकर इफरात पूंजी होती है। कम पूंजीवाले ज्यादा कमाकर भी पर्याप्त नहीं कमा पाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

साल 2018 अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच गया। आगे बढ़ने से पहले क्या खोया, क्या पाया इसका थोड़ा हिसाब लगा लेना चाहिए। लेकिन इसको लेकर ज्यादा मगजमारी नहीं करनी चाहिए क्योंकि पल-पल बदलती इस दुनिया में गुजरी बातें नहीं, हमारी सतर्कता ही काम आती है। बीते पलों से हम यह सर्तकता बढ़ाने का सबक ही सीख सकते हैं। बाकी जो पहले सफल हुआ, वह आगे भी सफल होगा, यह ज़रूरी नहीं है। अब परखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में फैले ठगों ने देश में इक्विटी संस्कृति का स्वस्थ विकास रोक रखा है। इस संस्कृति का स्वस्थ विकास ज़रूरी है ताकि उद्योग को अवाम की रिस्क पूंजी मिले, आम लोग भी रिस्क को समझते हुए उद्योग के बढ़ने का फायदा उठाएं और देश का औद्योगिकीकरण हो जिससे रोज़गार के नए अवसरों का सृजन हो। अर्थकाम आम निवेशकों का रक्षा-कवच बनने में लगा है ताकि उन्हें ठगी से बचाया जा सके। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के गुर सिखाने के नाम पर भी निवेशकों के साथ ठगी हो रही है। ऐसे गुरु-घंटाल सोशल मीडिया या निजी संपर्कों का सहारा लेकर अपना जाल फेंकते हैं। वित्तीय आज़ादी की लालच में हर कोई इनके फ्री सेमिनार में चला जाता है। उसके बाद एकमुश्त 30-35 हज़ार फीस में आजीवन सिखाने का वादा। लेकिन उनका जालबट्टा कसता जाता है और आप उनके मकड़जाल में कीट की तरह फंसते चले जाते हो। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ब्रोकर आम निवेशकों को कैसे ठगते हैं, इसके किस्से मुंबई ही नहीं, जयपुर व इंदौर से लेकर लुधियाना, बनारस, कानपुर, मेरठ व रांची तक बिखरे हुए मिल जाएंगे। यह खेल ब्रोकरों से जुड़ी फ्रैंचाइजी जमकर करती हैं। जिस ब्रोकर का दायरा जहां तक फैला है, वह वहां तक निवेशकों के साथ फ्रॉड करता है। वो निवेशकों से ली गई पावर ऑफ एटॉर्नी का फायदा उठाते हैं। कमीशन के लिए जमकर सौदे करते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अर्थकाम ने अपनी शुरुआत ही बीएसई में लिस्टेड एक इक्विटी रिसर्च कंपनी के साथ गठजोड़ से की थी ताकि पाठकों को शेयर बाज़ार की रिसर्च आधारित सूचनाएं दी जा सकें। हम पूरी शिद्दत से उससे मिली सूचनाएं और सिफारिशों को पेश करते रहे। लेकिन दो साल बीतने से पहले ही साफ हो गया कि उक्त कंपनी कहीं से भी निष्पक्ष नहीं है और ऑपरेटरों के साथ मिलकर रिटेल निवेशकों को चरका पढ़ाती है। अब मंगल की दृष्टि…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ार के दूसरे क्षेत्रों की बात मैं नहीं जानता। पर दस साल के अपने अनुभव से भलीभांति जान गया हूं कि अपने शेयर बाज़ार में हर तरफ ठगों की भरमार है। ब्रोकरेज़ फर्मों से लेकर रिसर्च कंपनियां तक रिटेल निवेशकों को झांसा देने का काम करती हैं। करोड़ों की पूंजीवाले ग्राहकों से इनसे रिश्ते अलग रहते होंगे। लेकिन 20-25 लाख तक की पूंजीवाले सामान्य निवेशकों को चरका पढ़ाना इनके डीएनए में है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बुद्ध ने करीब ढाई हजार साल पहले विपश्यना की पुरानी पद्धति खोज निकाली थी। इसमें शरीर में पल-पल होती संवेदनाओं को देखते-देखते आप मन के विकारों, खासकर राग व द्वेष से मुक्त होने लगते हो। इसी तरह आप शेयर बाज़ार में पल-पल के भावों को निष्पक्ष भाव से देखने लगें तो लालच व भय की भावना से ऊपर उठकर उनकी सच्चाई से वाकिफ हो जाएंगे और ट्रेडिंग से कमाई का सूत्र पा जाएंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भले ही सुबह 9.15 से शाम 3.30 बजे तक होती है। लेकिन ग्लोबल हो चुकी दुनिया में सारे वित्तीय बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की हलचलों से प्रभावित होते हैं। एशिया के तमाम बाज़ार हमसे पहले खुलते हैं। उसके बाद यूरोप में ट्रेडिंग शुरू होती है। फिर अमेरिका का बाज़ार सक्रिय हो जाता है। वित्तीय बाज़ार की धड़कन छुट्टियों के अलावा कभी नहीं रुकती। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वीतराग या वीतद्वेष हो जाने का मतलब जीवन से पलायन नहीं है। इस अवस्था में आप अपने मन के गुलाम नहीं, बल्कि उसके मालिक बन जाते हो। तब आप जीवन आवेश या आवेग में नहीं, नियम-धर्म से जीते हो। प्रकृति के नियमों को समझकर उनके माफिक चलने से आपको जीवन में सुख और सफलता मिलती है। इसी तरह यह अवस्था आपको शेयर बाज़ार के नियमों को समझकर उससे कमाने में मदद करती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी