इस दुनिया में कुछ भी अकारण नहीं होता। जो कुछ होता है, उसका कोई न कोई कारण ज़रूर होता है। शेयर बाजार में जहां तक यह नियम लगता है, वहां तक अध्ययन व अभ्यास से कार्य-कारण संबंध को जान-समझकर हम उस पर अपनी पकड़ बना सकते हैं। फिर भी शेयर बाज़ार में देश ही नहीं, ग्लोबल स्तर पर इतनी सारी शक्तियां एकसाथ काम कर रही होती हैं कि अनिश्चितता बराबर बनी रहती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

रिस्क लेने की अपनी क्षमता समझ ली तो यह जानना होगा कि शेयर बाज़ार में कितना रिस्क है। कंपनी की बैलेंस शीट, उसका वित्तीय कामकाज, उसका प्रबंधन और उसकी शेयरधारिता के पैटर्न जैसी चीजों को हम पढ़कर थोड़ी मशक्कत से जान सकते हैं। लेकिन कब कौन उसके कितने शेयर खरीदने जा रहा है, अंदरखाने की ऐसी बातें हम नहीं जान सकते। इसके अलावा कुछ चीजें हम घटने से पहले जान ही नहीं सकते। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का सूत्र मूलतः रिस्क संभालने की कला में निहित है। लेकिन पहले रिस्क की सही-सही समझ ज़रूरी है। शुरुआत इस आकलन से करें कि आपके रिस्क लेने की क्षमता कितनी है। यह पूंजी के पैमाने से भिन्न है। मसलन, आप 1000 रुपए के दस, 100 रुपए के 100, दस रुपए के 1000 शेयर खरीदें तो पूंजी तो 10,000 रुपए ही लगती है, लेकिन रिस्क बढ़ता जाता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों के भावों के पैटर्न को परखते हुए उनके स्वभाव को भांपना, उनमें से अपने माफिक कंपनियां चुनना, दैनिक व साप्ताहिक चार्ट पर संस्थाओं व प्रोफेशनल ट्रेडरों की डिमांड व सप्लाई के बिंदुओं को जानना, खुद का सिस्टम बनाना और हर वक्त रिस्क को संभालने के अनुशासन का कड़ा पालन। ये पांच सूत्र साध लिए तो ट्रेडिंग में आपकी सफलता की प्रायिकता काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें रिस्क संभालना सबसे खास है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयरों के भावों पर सबसे ज्यादा सटीक असर पड़ता है खबरों का। ये खबरें कंपनी के कामकाज, सरकारी नीति और किसी बड़े निवेशक या देशी-विदेशी संस्था द्वारा उसके शेयर खरीदने से संबंधित हो सकती हैं। दिक्कत यह है कि ये खबरें जब हम तक पहुंचती हैं, तब तक बाज़ार में उनका पूरा असर हो चुका होता है। रिटेल ट्रेडर कभी भी खबरों पर नहीं खेल सकता। भावों का पैटर्न ही उसका सहारा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बात बड़ी सीधी-सी है कि अगर खरीदनेवालों का ज़ोर ज्यादा हुआ और बेचने का उत्साह कम रहा तो शेयर के भाव बढ़ते जाते हैं क्योंकि लोग ज्यादा भाव लगाकर बेचनेवाले के लालच को बढ़ावा देते हैं। लेकिन किसी वजह से लोग खरीदने के बजाय बेचकर मुनाफावसूली पर उतर आए तो शेयर धड़ाम हो जाता है। तब, पुराने पैटर्न के विश्लेषण पर टिकी सारी गणनाएं फेल हो जाती हैं और तगड़ा झटका लगता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयरों से लेकर कमोडिटी और फॉरेक्स बाज़ार तक ट्रेडर टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेते हैं। करीब 400 साल पहले जापान में चावल के थोक व्यापार में कैंडल-स्टिक पैटर्न से शुरू हुई यह विद्या आज बहुत सारे संकेतकों तक पहुंच चुकी है। इसमें पिछले पैटर्न के आधार पर भावों की नई चाल का अनुमान लगाते हैं। लेकिन यह दिल को महज दिलासा ही दिलाती है क्योंकि भाव पिछले पैटर्न पर चलें, यह ज़रूरी नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इंसान किसी काम में माहिर नहीं हो जाता, तब तक उसे बाहरी मदद की दरकार रहती है। यह बड़ी स्वाभाविक इच्छा है। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की शुरुआत में भी टिप्स पाने की इच्छा जगती है। लेकिन धीर-धीरे जब आप बाज़ार के स्वभाव को समझकर अपना सिस्टम विकसित कर लेते हो, तब बाहरी टिप्स या सलाह का कोई मतलब नहीं रह जाता। तब उसका महत्व बच्चे से उंगली पकड़वाने जितना रह जाता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

सभी जानते हैं कि भारतीय बैंकों का एनपीए फिलहाल 10 लाख करोड़ रुपए से ऊपर चल रहा है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि शेयर बाज़ार में लिस्टेड 2947 कंपनियों के प्रवर्तकों ने अपने लगभग 2.26 लाख करोड़ रुपए के शेयर अभी गिरवी रखे हैं। इन प्रवर्तकों ने कंपनी व धंधे के लिए ही शेयर गिरवी रखकर लोन लिया होगा। अगर लोन देनेवाले इनके शेयर बेचने लगे तो पूरा बाज़ार धराशाई हो जाएगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

तथ्य अलग, बाज़ार का सत्य अलग। एक तो अपने यहां पहले से ही बेरोज़गारी जैसे अहम आर्थिक कारकों के ताज़ा आंकड़े उपलब्ध नहीं है। दूसरे, 2015 में जीडीपी की नई सीरीज़ आने के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था के सरकारी आंकड़े बड़े अविश्वसनीय हो गए हैं। कॉरपोरेट क्षेत्र अगर वाकई इतना बढ़ रहा होता तो बीएसई में लिस्टेड 4684 में से 2947 यानी 62.9% कंपनियों के प्रवर्तकों ने अपने शेयर गिरवी नहीं रखे होते। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी