कैंडल का आकार ही नहीं, चार्ट पर उनकी पोजिशन भी अहमियत रखती है। हैमर सबसे नीचे और रिवर्स हैमर सबसे ऊपर होने पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। बीच में इधर-उधर कहीं हों तो उनका खास मायने-मतलब नहीं होता। कैंडल के अलावा टेक्निकल एनालिसिस में हम ज्यादा नहीं, बस दो-तीन इंडीकेटर की समझ बनाकर अभ्यास कर लें तो काम भर की स्पष्टता आ जाती है। इसमें आरएसआई और मूविंग औसत सबसे अहम हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में हमेशा खरीदे-बेचे गए शेयरों की सख्या बराबर होती है। खरीदनेवालों का जोश ज्यादा तो उसके भाव बढ़ते हैं, जबकि बेचनेवाले हावी तो भाव गिरते हैं। किसी दिन हुई ट्रेडिंग में भावों ने चार्ट पर कैसा कैंडल बनाया है, इसके संकेत मिलता है कि तेजड़ियों का पलड़ा भारी है या मंदड़ियों का। इसमें भी कैंडल का रंग नहीं, आकार खास मायने रखता है। हथौड़ा/हैमर तो तेज़ी। रिवर्स/इन्वर्टेड हैमर या लट्टू तो मंदी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर आपने शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने की ठान ही ली है तो पूंजी लगाने व बचाने के साथ ही कुछ बुनियादी काम आपको करने होंगे। इसमें से पहला है टेक्निकल एनालिसिस का व्यावहारिक अध्ययन। इसके दम पर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसी स्टॉक में किन भावों पर खरीद का पलड़ा भारी हो सकता है और कहां बिकवाली का। अमूमन इसी के आधार पर स्टॉक की अगली चाल तय होती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जमे-जमाए ईमानदार वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि आम लोगों को शेयर बाज़ार में वही धन लगाना चाहिए जो आवश्यक ही नहीं, आकस्मिक ज़रूरतों तक के इंतज़ाम के बाद इफरात बचता है। इसमें से भी 95% निवेश में लगाना चाहिए और केवल 5% ट्रेडिंग में। ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम अगर 5 लाख रुपए चाहिए तो सिद्धांततः उनके पास एक करोड़ रुपए इफरात होने चाहिए। लेकिन आम आदमी का दिल है कि मानता ही नहीं! अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

वैसे तो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग 10,000 रुपए से भी शुरू की जा सकती है। लेकिन ट्रेडिंग से प्रतिमाह 50,000 रुपए कमाना चाहते हैं तो कम से कम 5 लाख रुपए की पूंजी होनी चाहिए। प्रतिमाह 10% नियमित कमाना कोई मामूली बात नहीं। आप सचमुच ट्रेडिंग के उस्ताद बन गए हैं, तभी इतना कमाने की उम्मीद पाल सकते हैं। हालांकि शेखचिल्ली तो महीने भर में दुगुना-तिगुना कमाने का भी मंसूबा पाल सकते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग सिस्टम में तेज़ी-मंदी दोनों से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। मतलब, आपको शॉर्ट सेलिंग भी आनी चाहिए। तभी आप बाज़ार से गिरने के दौर में कमा सकते हैं। शॉर्ट सेलिंग केवल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में की जा सकती है। चूंकि कम पूंजी है तो आपके पास ऑप्शंस को ही आजमाने का विकल्प बचता है। लेकिन ट्रेडिंग किसी सेगमेंट में करें, हर हाल में आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलना होगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

काम का ट्रेडिंग सिस्टम आपके अनुरूप होने के साथ-साथ सरल होना चाहिए। लेकिन उसमें बाजार की जटिलताओं को पकड़ने का दमखम होना ज़रूरी है। दरअसल, जटिलताओं को हम जितना सुलझा लेते है, सिस्टम उतना ही आसान या सरल होता चला जाता हैं। जटिल सिस्टम किसी को भरमाने के काम आ सकता है, ट्रेडिंग से कमाने में नहीं। उस सिस्टम में तेज़ी और मंदी दोनों के बाज़ार से पार पाने की क्षमता होनी चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जीवन, युद्ध या ट्रेडिंग में कोई भी रणनीति हमें अपनी सीमाओं और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए। अन्यथा हम नाकाम होने को अभिशप्त हैं। वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग का मूल मकसद है कम से कम रिस्क और कम से कम समय में अधिकतम कमाना। इसके लिए हम किसी को अपने टेम्परामेंट के हिसाब से ट्रेडिंग सिस्टम बनाना होता है। यहां तक ट्रेडिंग के स्टॉक्स भी अपने माफिक चुनने होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इस साल कोरोना संकट के उभरने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक हमारे शेयर बाज़ार में अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपए लगा चुके हैं। इसी दौरान रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म और रिटेल उद्यम के लिए विदेशियों से 2.07 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। आखिर विदेशी निवेशकों के पास इतना इफरात धन कहां से आ रहा है और वे क्यों पिछले छह सालों में तबाह हो चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दांव लगा रहे हैं? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कोविड-19 के प्रकोप के बाद दुनिया के वित्तीय जगत का विचित्र हाल है। तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा छापे गए नोटों से उपजे सस्ते धन का प्रवाह भारत जैसे देशों के शेयर बाज़ारों में आ रहा है। पिछले नौ महीनों में हमारे बाज़ार में इतना विदेशी धन आया है, जितना पिछले बारह सालों में नहीं आया था। हमारे कैश सेगमेंट में एफआईआई/एफपीआई निवेश कोरोना के मामलों जैसी रफ्तार से बढ़ता ही गया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी