भावों में निहित हैं सारी जानकारियां
हमें बाज़ार की तथाकथित ‘गोपनीय’ या ‘गुप्त’ जानकारियों के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। आखिर जिसके पास पूरी नदी हो, उसे कुंओं या बावड़ी में झांकने की क्या ज़रूरत! एक तो ये जानकारियां भरोसा करने लायक नहीं होतीं। दूसरे, इन्हें पूरा निचोड़ लेने के बाद बाहर फेंका जाता है। तीसरे, शेयरों के भाव व उसके पैटर्न में काम की सारी जानकारियां समाहित रहती हैं। उसके बाद का कमाल हमारी बुद्धि करती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
