विवेक और स्मृति
विवेक तर्क की स्वाभाविक परिणति है, स्मृति विवेकयुक्त साधना और एकात्मता साधनायुक्त स्मृति की। तर्क विवेक तक ले जाता है। स्मृति अपने उत्स की ओर लौटना है। एकात्मता की अवस्था में तो जीने-मरने जैसे द्वैतभाव ही मिट जाते हैं।और भीऔर भी
विवेक तर्क की स्वाभाविक परिणति है, स्मृति विवेकयुक्त साधना और एकात्मता साधनायुक्त स्मृति की। तर्क विवेक तक ले जाता है। स्मृति अपने उत्स की ओर लौटना है। एकात्मता की अवस्था में तो जीने-मरने जैसे द्वैतभाव ही मिट जाते हैं।और भीऔर भी
जो आनेवाले कल के सपने बुनते हुए जीते हैं, उनका आज अस्त-व्यस्त रहना स्वाभाविक है। जो गुजरे कल की नॉस्टैल्जिया में जीते हैं, उनका आज सीलन व घुटन भरा रहना भी उतना ही स्वाभाविक है।और भीऔर भी
शिव है तो शक्ति है। धरती है तो गुरुत्वाकर्षण है। शरीर है तो मन है। मन को निर्मल रखना है तो पहले शरीर को सहज व शुद्ध रखना जरूरी है। बाद में मन भी शरीर को साधने में मदद करता है।और भीऔर भी
सहजता का ही दूसरा नाम समाधि है। चालाकी हमें असहज बनाती है। लेकिन बुद्धि से हम हर चालाकी को काटकर सहज बन सकते हैं। इतने सहज कि लोगों की चालाकी पर हमें गुस्सा नहीं, हंसी आएगी।और भीऔर भी
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