इस हफ्ते साल 2015 विदा ले रहा है। लेकिन जाते-जाते अपना बैटन नए साल 2016 के हाथों में थमाता जा रहा है। हफ्ता बीतते-बीतते हम नए साल में पहुंच जाएंगे क्योंकि इसका आखिरी ट्रेडिंग दिन नए साल का पहला ट्रेडिंग दिन है। इस साल 1 जनवरी से 24 दिसंबर तक निफ्टी 5.11% और सेंसेक्स 6.07% गिर चुका है। नई सरकार का उन्माद उतर चुका है। अब बाज़ार का दारोमदार सच पर टिका है। देखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दुनिया के मशहूर ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का कहना है कि हमें उस रुझान को पकड़ना है जिसका आधार झूठा है और उसके खिलाफ दांव लगाना है। यह वही मौका होता है जब रुख पलटनेवाला होता है। रुझान के साथ चलकर बहुत मामूली मुनाफा कमाया जा सकता है और अक्सर तगड़ा झटका लग जाता है। लेकिन झूठे रुझान के खिलाफ सही दांव लगाने की कला आ जाए तो कोई भी सोरोस बन सकता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में लालच व डर की दो प्रमुख भावनाओं का व्यापार चलता है। भावनाओं में बहने के मामले में हम सभी मूर्ख हैं। हममें से कुछ लोग ज्यादा मूर्ख होते हैं, कुछ लोग कम। इनमें बुद्धिमान इंसान वो जो जानता है कि वो मूर्ख है। दरअसल, यहीं से वो अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाने की क्षमता विकसित करता है और दूसरों की भावनाओं का फायदा उठाकर बाज़ार से कमाने लगता है। अब निकालते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

तैरने का सिद्धांत जानकर अगर तैरना आ जाता तो हर कोई तैराक बन जाता। सिद्धांत अपनी जगह है और व्यवहार अपनी जगह। हर सिद्धांत व्यवहार से निकलता है और बाद में व्यवहार की सेवा कर पुख्ता बनता है। ट्रेडिंग के सारे सिद्धांत और दांवपेंच आपको किताबों में मिल जाएंगे। इंटरनेट ऐसी जानकारियों से पटा पड़ा है। लेकिन कठिन व लंबे अभ्यास के बाद ही हम उसे अपने काम का बना पाते हैं। अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

दुनिया के सबसे बुरे निवेशकों में बड़े-बड़े विद्वान, अर्थशास्त्री व वैज्ञानिक तक शामिल है। आइजैक न्यूटन का धन जब ब्रिटेन की साउथ सी कंपनी में साल 1720 में डूब गया तो उनका कहना था – मैं नक्षत्रों की गति की गणना कर सकता हूं, लेकिन इंसानों के पागलपन की नहीं। शेयर बाज़ार में अपना और दूसरों का धन डुबाने वालों में नोबेल विजेता माइरॉन शोल्स व रॉबर्ट मेर्टन भी शामिल हैं। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

जबरदस्त हल्ला था कि अमेरिका के ब्याज दर बढ़ाते ही आसमान टूट पड़ेगा। लेकिन यहां तो अमेरिका ही नहीं, यूरोप व एशिया तक के बाज़ार चहक रहे हैं। सबक यह कि जहां हर हरकत पर नोट बनाए जाते हैं वहां हर खबर और उससे उपजे डर/उल्लास के पीछे निहित स्वार्थ होता है। वित्तीय बाज़ार में निरपेक्ष सत्य जैसा कुछ नहीं होता। इसलिए हमें हर शोर में छिपी हकीकत को समझना होगा। इसीलिए करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

फेडरल रिजर्व ने जून 2006 के बाद आखिरकार पहली बार ब्याज दरें बढ़ा दीं। ब्याज की रेंज 0.25-0.50% रखी गई है। इसी के साथ सारी दुनिया में महीनों से मची उहापोह का पटाक्षेप हो गया। फेड की अगली जिम्मेदारी सिस्टम में आई नोटों की बाढ़ को संभालना होगा। फेडरल रिजर्व के पास इस समय 4.5 लाख करोड़ डॉलर के बांड हैं, जबकि अमेरिकी बैंकों के पास 2.6 लाख करोड़ डॉलर के रिजर्व हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अमेरिका में फेडरल ओपन मार्केट कमिटी की दो दिन की बैठक भारतीय समय के हिसाब से कल रात शुरू हो चुकी है और कल ब्राह्म मुहूर्त में पौने चार बजे फेडरल रिजर्व की चेयरमैन जैनेट येलेन प्रेस कॉन्फ्रेंस में फैसले का ऐलान करेंगी। इसकी धमक अमेरिकी बाज़ार पर तो फौरन दिखाई देगी, जबकि भारत समेत एशिया के अन्य देशों पर इसका असर कल गुरुवार को पड़ेगा। इसलिए आज सांस रोकने का समय है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हल्ला ऐसा उठा है मानो अमेरिका में ब्याज दर बढ़ते ही सारा कुछ बरबाद हो जाएगा। लेकिन इसके कई फायदे भी हैं। इससे अमेरिका के जो बुजुर्ग अपनी बचत पर मिली ब्याज पर निर्भर हैं, उनकी आय बढ़ जाएगी। इसके बाद अमेरिका में मुद्रास्फीति बढ़कर 2% हो सकती है जिससे डॉलर की विनिमय दर बढ़ेगी और वहां आयातित चीजों के दाम घट जाएंगे। इससे शेयर बाज़ार का बुलबुला भी संभलने लगेगा। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

यह हफ्ता भारत ही नहीं, दुनिया भर के वित्तीय बाज़ारों के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। भारत में बुध-गुरु की रात और अमेरिका में बुधवार का दिन वो खबर लेकर आएगा जिस पर सारी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है। 70-75% प्रायिकता इस बात की है कि उस दिन फेडरल रिजर्व लगभग एक दशक से ठहरी ब्याज दरों को बढ़ा देगा और यह दर 0.25% से बढ़ाकर 0.50% की जा सकती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी