बोली बात से चिपके रहना है घातक
हाल ही में एक मंजे हुए ट्रेडर मिले। पहले नॉन-फेरस मेटल के ट्रेडर थे। रिटायरमेंट के बाद शेयरों में ट्रेडिंग करने लगे। लेकिन अब वहां से भी तौबा कर ली। बताने लगे कि उन्हें शॉर्ट करने का अच्छा-खासा अभ्यास है। गिना कि निफ्टी कहां तक गिर सकता है। फिर शॉर्ट करने लगे। स्टॉप-लॉस लगाने की ज़रूरत नहीं समझी। अपने पर भरोसा था। चिपकने के इस चक्कर में सारी ट्रेडिंग पूंजी स्वाहा हो गई। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
