दिमाग भी क्या स्वामिभक्त और जिद्दी किस्म का जीव है! जिस ढर्रे पर चला दो, चलता ही रहता है। जिस काम में लगा दो, बिना पूरा किए मानता ही नहीं। आप सो जाते हो, लेकिन इस बेचैन आत्मा को चैन नहीं पड़ता।और भीऔर भी

भगवान एक ट्रोज़ान हॉर्स है जो प्रकृति से हमारे मानस को मिले हर सॉफ्टवेयर की स्पीड स्लो कर देता है, मन की तमाम प्रोग्राम फाइलों को करप्ट कर देता है। पूरी क्षमता पाने के लिए इस वायरस से मुक्ति जरूरी है।और भीऔर भी

हम मन ही मन तमाम टोटके करते रहते हैं। तंत्र, मंत्र, अंधविश्वास। सिक्का सीधा पड़ा तो जीतेंगे। फूल खिला तो काम हो जाएगा। ये सब कुछ और कुछ नहीं, अनिश्चितता को नाथने के हमारे मूल स्वभाव का हिस्सा हैं।और भीऔर भी

मन शरीर के रसायनों से लेकर हार्मोंस और समाज की नैतिकताओं से लेकर पाखंडों तक का बोझ ढोता है। आगे बढ़ने के लिए सारे झाड़-झंखाड़ को काटता तराशता रहता है। इसलिए मन पर बराबर सान चढ़ाते रहना चाहिए।और भीऔर भी