नेता व कंपनी से मोह अच्छा नहीं
हम नेता बडा सोच-समझकर चुनते हैं। लेकिन दो-ढाई साल में पता चलता है कि वो पूरा हवाबाज़ है तो हम कुछ नहीं कर पाते। कंपनियां भी हम बहुत सोच-समझकर चुनते हैं। पर उन्हें चलाना हमारे नहीं, बल्कि उसके प्रबंधन पर निर्भर करता है। वो गलत निकल गया तो हमारी उम्मीदें टूट जाती हैं। मगर, नेता और कंपनी में फर्क यह है कि कंपनी से हम बीच में ही निकल सकते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
