रामचरित मानस की यह चौपाई याद कीजिए कि मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी सोधि के लगन धरी, सीताहरण मरण दशरथ को, वन में विपति परी। जीवन और बाज़ार की यही खूबसूरती है कि वह बड़े-बड़े विद्वानों की भी नहीं सुनता। जहां लाखों देशी-विदेशी निवेशकों का धन-मन लगा हो, भाव हर मिनट पर बदलते हों, वहां बाज़ार को मुठ्ठी में करने का दंभ भला कैसे टिकेगा! इसलिए फायदे के साथ रखें घाटे का हिसाब। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

क्या शेयर बाज़ार में वाकई ऐसे लोग भरे पड़े हैं जो भावनाओं के गुबार में गुब्बारा बन जाते हैं या यह गुबार सिर्फ नई मछलियों को फंसाने का चारा भर होता है? बीते सोमवार को निफ्टी सुबह-सुबह 6670.30 तक उछलकर आखिर में 6363.90 पर बंद हुआ था। वही इस सोमवार तक हफ्ते भर में ही महीना भर पीछे जाकर 6154.70 पर बंद हुआ। भावनाओं के इस खेल में खिलाड़ी कौन है? चिंतन-मनन करते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

विदेशी निवेशक (एफआईआई) हमारे बाज़ार के गुब्बारे में हवा भर चुके हैं। करीब महीने पर पहले इकनॉमिक टाइम्स ने एक अध्ययन किया था। सेंसेक्स से ज्यादा एफआईआई हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 16000 पर आ गया और कम हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 41000 पर चला गया। घरेलू संस्थाओं से लेकर कंपनियों के प्रवर्तक तक बेच रहे हैं, विदेशी खरीदे जा रहे हैं। आखिर क्यों? जवाब जटिल है। अब इस हफ्ते की चाल…औरऔर भी

बाज़ार का सबसे अहम रोल है भावों का सही-सही स्तर पकड़ना। इस काम में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में है यह बड़ा मुश्किल काम। एक तो यहां हज़ारों दमदार खिलाड़ी हैं। दूसरे भाव हर मिनट पर बदलते हैं। तीसरे यहां पर्दे के पीछे बहुत सारा खेल चलता है। कंपनी प्रवर्तकों, ब्रोकरों व संस्थागत निवेशकों में मिलीभगत रहती है। ऐसी इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के उपाय तलाशे जा रहे हैं। अब बढ़े ट्रेडिंग की ओर…औरऔर भी

कल कोल इंडिया और एनटीपीसी दोनों में सुबह-सुबह मीडिया में नकारात्मक खबरें आ गईं। फिर भी कोल इंडिया का शेयर 1.26% और एनटीपीसी का शेयर 2.32% बढ़ गया। इसीलिए हम सावधान करते आए हैं कि आम लोगों को छपी खबरों के आधार पर ट्रेड नहीं करना चाहिए। असल में खबरों के आने और जाहिर होने का जो भी समीकरण है, वो हमारे लिए झांसे जैसा है। भावों में ही हर ऊंच-नीच समाहित है। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

विख्यात अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने 1776 में छपी किताब वेल्थ ऑफ नेशंस में लिखा था कि बाज़ार में सप्लाई मांग से ज्यादा होने पर वस्तु के भाव गिर जाते हैं। मशहूर वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन ने 1687 में बताया कि कोई भी वस्तु तब तक गतिशील रहेगी जब तक उसका मुकाबला उसके बराबर या उससे ज्यादा बल की वस्तु से नहीं होता। इन्हीं नियमों पर आधारित है मांग और सप्लाई की पद्धति। इसे अपनाते हुए करते हैं ट्रेडिंग…औरऔर भी

सेंसेक्स व निफ्टी ऐतिहासिक शिखर पर। पर 9 दिसंबर 2010 से 9 दिसंबर 2013 के बीच जहां सेंसेक्स 10.8% और निफ्टी 10.4% बढ़ा है, वहीं सन फार्मा 162%, हिंद यूनिलीवर 93.1%, आईटीसी 87%, टीसीएस 86.7% और एचडीएफसी बैंक 55.5% बढ़ा है। सो, सूचकांकों के ही दम पर निवेश या ट्रेडिंग करने वाले लोग प्रायः मुनाफे के अच्छे मौकों से चूक जाते हैं। तो कैसे देखें सूचकांकों के भी पार! इसे ध्यान में रखते हुए बढते हैं आगे…औरऔर भी

आज बाज़ार अगर बढ़ा तो बताया जाएगा कि चार राज्यों के चुनाव नतीजों ने अगले आम चुनाव में मोदी को लाने का जबरदस्त संकेत दिया है। बाज़ार गिरा तो कहा जाएगा कि अमेरिका में नवंबर माह में उम्मीद से ज्यादा रोज़गार पैदा हुआ और बेरोजगारी की दर घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 7% पर आ गई। इसलिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक सस्ते धन का प्रवाह रोक सकता है। यह सब कहने की बातें हैं। देखें असली दांवपेंच…औरऔर भी

इंसान होने के नाते हमारी दो बुनियादी कमज़ोरियां हैं। एक, हम सीधी-साधी चीज़ तक को जटिल बना देते हैं। दूसरे, हम बराबर नए-नए भ्रम बनाते जाते हैं। इन कमज़ोरियों को हम मिटा तो नहीं सकते। लेकिन भान हो जाए तो इनका असर न्यूनतम सकते हैं। उसी तरह जैसे गुरुत्वाकर्षण के नियम को बदल नहीं सकते। लेकिन उसे जान लेने के बाद हवा में हज़ारों टन का जहाज़ उड़ा सकते हैं। अब बढें शुक्रवार की ट्रेडिंग की ओर…औरऔर भी

कल एग्ज़िट-पोल आ ही रहे थे कि एक अभिन्न मित्र का फोन आया। बोले, मुझे लगता है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को छब्बीस सीटें मिलेंगी। मैंने पूछा, कैसे? बोले, कुछ नहीं, बस मेरा अंतर्मन कह रहा है। लेकिन यह आपके अंतर्मन की नहीं, औरों का मन समझने की बात है। बोले, इन्ट्यूशन भी तो होता है। दोस्तों! शेयर बाज़ार में भी बहुतेरे लोग यही इन्ट्यूशन चलाकर बराबर मुंह की खाते हैं। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी