तूफान में दो तरह के लोग बाहर निकलते हैं। एक, राहतकर्मी और दूसरे ऐसे दुस्साहसी लोग जो तूफान से भी मौजमस्ती खींच लाने में पारंगत होते हैं। अगले सोमवार, 12 मई को लोकसभा चुनावों का अंतिम चरण पूरा हो जाएगा। उसी हफ्ते शुक्रवार, 16 मई को नई सरकार का फैसला होगा। ऐसे में बेहद दुस्साहसी या उस्ताद ट्रेडर ही शुक्रवार 9 मई के बाद अपनी पोजिशन खुली रखेंगे। निकालने के लिए कैश, आगाज़ करें नए हफ्ते का…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग खुद गाड़ी ड्राइव करने जैसा है, जबकि लंबा निवेश ट्रेन से लंबी दूरी के सफर जैसा है। ड्राइविंग के तौर-तरीके आप सीख सकते हैं। लेकिन ट्रैफिक के बीच अगल-बगल की गाड़ियों से दूरी का सेंस, कहां से कट मारकर कहां निकलना है, यह हरेक के अपने अंदाज़, फितरत और अभ्यास पर निर्भर करता है। वहीं, ट्रेन में टिकट लिया और निश्चिंत होकर सो गए। मंज़िल आने पर उतर लिए। अब शुक्र की ट्रेडिंग…औरऔर भी

अक्सर बेहद छोटी-छोटी बातें हमें उलझाए रखती हैं। जैसे, अपने एक सबसक्राइबर ने ई-मेल से काफी पहले पूछा था कि स्विंग या मोमेंटम ट्रेड कैसे करें क्योंकि उनका ब्रोकर केवल इंट्रा-डे ट्रेड की ही सुविधा देता है। इतनी देर से जवाब देने के लिए मैं उनसे माफी चाहता हूं। मेरा कहना है कि नाम में न जाएं। स्विंग या मोमेंटम सामान्य खरीद-फरोख्त के ही सौदे हैं। खरीदा और पांच-दस दिन बाद बेच दिया। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बहुत से लोगों में डर बैठा हुआ है कि अभी विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के दम पर शेयर बाज़ार जिस तरह उठ रहा है, वह 16 मई को एनडीए की सरकार न बनने पर बैठ सकता है। यकीनन ऐसा होगा। पर ज्यादा समय के लिए नहीं क्योंकि दुनिया के पेंशन फंड भारत में निवेश नहीं करेंगे तो जरूरी रिटर्न हासिल नहीं कर सकते। इसलिए भारत में निवेश एफआईआई की मजबूरी है। अब समझते है मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कुल 1575 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग। 592 बढ़े, 907 गिरे, 76 अपरिवर्तित। हर दिन बाज़ार में मोटामोटी यही हाल रहता है। 95% शेयर बढ़ने या गिरते हैं। सोचिए ट्रेडर के सामने कितने अवसर हैं! चाहे तो खरीदकर कमाए, चाहे तो बेचकर। दरअसल असली चुनौती होती है चुनने की। यह चुनाव हर ट्रेडर को अपने टेम्परामेंट के हिसाब से खुद करना होता है। दूसरा इसमें बस मदद भर कर सकता है। अब करें नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

बहुत सारी सूचनाएं हमारे सामने रहती हैं। लेकिन हम उनका महत्व नहीं समझते तो देखते हुए भी गौर नहीं करते। वीवैप (वीडब्ल्यूएपी) ऐसी ही एक सूचना है जो स्टॉक एक्सचेंज पर हमें हर दिन मिलती है। इसका मतलब होता है कि वोल्यूम वेटेट एवरेज प्राइस। देशी व विदेशी संस्थाएं आमतौर पर इसी भाव पर अपने ऑर्डर पेश करती हैं। इसलिए हमारे लिए भी एंट्री का यह अच्छा स्तर हो सकता है। अब शुक्र की ट्रेडिंग का सूत्र…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में खरीदना तो आसान है, बेचकर निकलना बेहद कठिन। खासकर तब, जब सूचकांक और स्टॉक हर दिन नया शिखर बना रहा हो। पर सुना है, इसका एक सूत्र है। स्टॉक के आरएसआई के अब तक के उच्चतम स्तर और अभी के स्तर का अंतर निकालें। देखें कि वो अंतर उच्चतम स्तर का कितना प्रतिशत है। उतना प्रतिशत स्टॉक के अभी के भाव को बढ़ा दें। वो आपके निकलने का स्तर होगा। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर सबसे ज्यादा माकूल खबरों से उठते/गिरते हैं। मसलन, कल खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में सशर्त खनन की इजाजत दे दी तो सेसा स्टरलाइट तीन मिनट में 4.55% उछल गया। लेकिन गौर फरमाइए। एजेंसी व चैनलों पर यह खबर दोपहर 3.09 बजे आई। पर शेयर में उछाल 2.48 से 2.51 बजे के बीच आया। खबर आने से 21 मिनट पहले! हमारे-आप जैसे लोगों के पास इतनी तेज़ी हो नहीं सकती। अब वार मंगलवार का…औरऔर भी

दुनिया में कुछ स्थिर नहीं। सब कुछ निरंतर बदलता रहता है। ऐसे में किसी विचार या रणनीति से चिपक जाना घाटे का सबब बन सकता है। शेयर बाज़ार में भी यही होता है। बाज़ार की वर्तमान अवस्था में घुसने और निकलने की अलग रणनीति होनी चाहिए। फिलहाल पूरा बाज़ार व अच्छे स्टॉक्स लगातार बढ़ रहे हैं तो एंट्री का सर्वोत्तम तरीका है मूविंग औसत। ऐसा ही एकदम अलग तरीका निकलने का है। अब चुनावी माहौल का ट्रेड…औरऔर भी

शेयर बाज़ार लंबे समय में किसी देश की अर्थव्यवस्था और वहां की कंपनियों की सेहत व भावी संभावना का आईना होता है। लेकिन छोटे समय में वहां इसका पैसा उसकी जेब में ही बहता है। लोगबाग इसलिए खरीदते हैं ताकि बेचकर मुनाफा कमा सकें। इसीलिए बाज़ार और भाव हमेशा चक्र में चलते हैं। उठने व गिरते रहते हैं। जापान का बाजार करीब बीस साल डूबता रहा। लेकिन भारत में संभावना है तो बढ़ेगा। अब गुरु का बाज़ार…औरऔर भी