सारे एक्जिट पोल गलत निकले। बस, एक्सिस-एड प्रिंट मीडिया का एक्जिट पोल ही सही निकला जिसमें उसने बिहार में महागठबंधन को 169 से 183 और एनडीए को 58 से 70 सीटें मिलने की बात कही थी। वही हुआ। पर, टीवी18 समूह ने उसे दिखाया नहीं क्योंकि वो उनकी सोच से मेल नहीं खाता था। भविष्य की गणना में ऐसी भूलचूक का होना स्वाभाविक है। शेयर बाज़ार भी इसका अपवाद नहीं है। अब पकड़ते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

कैलिफोर्निया के एक प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। बड़े बैंकों व संस्थाओं में रह चुके हैं। बड़ी ईमानदारी से डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की सलाह देते हैं। हाल ही उन्होंने निफ्टी ऑप्शंस में अल्गो-आधारित ट्रेडिंग सेवा शुरू की है। साल का सब्सक्रिप्शन एक लाख रुपए। हाल के उनके वेबिनार में सवाल उठे कि उनकी पुरानी सलाहें लगातार पिट क्यों रही हैं? सबक यह कि ट्रेडिंग में कोई भी अकाट्य नहीं; दूसरा मदद भर कर सकता है। अब शुक्र का अभ्सास…औरऔर भी

ट्रेडिंग में दिक्कत यह है कि इसमें बड़ी पूंजी चाहिए। कम से कम 50,000 रुपए महीने। फ्यूचर्स व ऑप्शंस में ट्रेड करना है तो उसमें सौदे का न्यूनतम आकार अब पांच लाख रुपए हो गया है। ऐसे में समझिए कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। इसलिए ट्रेडिंग उन्हें ही करनी चाहिए जिन्होंने बड़े अभ्यास व जतन से खुद अपना सिस्टम विकसित कर लिया हो। यहां भी महारथी तक अभिमन्यु को नहीं बचा पाते। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग अगर जम जाए तो महीने में ही 10-15% कमाया जा सकता है। लेकिन ज्यादा रिटर्न अपने साथ ज्यादा रिस्क भी लाता है। ट्रेडिंग में रिस्क रहता है कि आपकी सारी पूंजी ही डूब जाए। इसके बावजूद कोई सामान्य निवेशक बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग दोनों का फायदा उठाना चाहता है तो बेहतर यही होगा कि वो अपने धन का 95% निवेश के लिए रखे और केवल 5% ट्रेडिंग में लगाए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हर दिन 1500 से ज्यादा कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग। इनमें से 200 से ज्यादा के डेरिवेटिव्स के सौदे। ऊपर से निफ्टी के फ्यूचर्स व ऑप्शंस सौदे। बड़ा आसान लगता है कि इनमें से दो-चार को पकड़कर ट्रेडिंग करना। लेकिन आम नौकरीपेशा या बिजनेस करनेवाले के लिए यहां से कमाना कतई आसान नहीं। निवेश में रिस्क कम है तो रिटर्न भी कम है। साल में 15-25% मिल जाए तो पर्याप्त माना जाना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार को दूर से जाननेवाले लोग इसे शुद्ध सट्टा बाज़ार मानते हैं। जो इसके नजदीक आते हैं, वे उछल पड़ते हैं कि यहां तो एक ही दिन में कोई-कोई शेयर 10-20% छलांग जाते हैं। वाह-वाह! इससे तो 20 दिन की ट्रेडिंग में 200-400% कमाया जा सकता है। उसके बाद जो आखिरकार घुस पड़ते हैं, उनमें से 99% रोते हैं कि उनका हाथ लगनेवाला शेयर ही डूब क्यों जाता है। सुलझाएंगे यह गुत्थी। पहले सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इंसान का बुनियादी स्वभाव है कि वो सोचता है हादसा दूसरों के साथ होगा, उसके साथ नहीं। इसी सोच पर चलनेवाले बहुतेरे ट्रेडर मन ही मन स्टॉप लॉस लगाते हैं, जबकि सौदे के ऑर्डर के साथ ही उसे सिस्टम में डाल देना चाहिए। ऑनलाइन ट्रेडिंग में इसकी व्यवस्था है। साथ ही उसमें ऐसे अलॉर्म की भी व्यवस्था है कि जब भाव आपकी गणना के माफिक पहुंच जाए तो सिस्टम आपको अलर्ट कर दे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

निवेश में नियम है कि पहले कंपनी अच्छी तरह ठोंक-बजाकर चुनो। फिर कई महीने व साल तक निश्चिंत हो जाओ। इसी तरह स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड में भी बाज़ार को दिन में एक ही बार देखने के नियम का पालन करें। ट्रेडिंग करने लायक शेयर चुनें, अपनी पोजिशन चेक करें और अगले दिन शाम तक निश्चिंत हो जाएं। इससे फालतू का तनाव बच जाता है और आप सुसंगत निर्णय ले पाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

टेक्नोलॉज़ी ने बहुत सारी चीजें आसान कर दी हैं। लेकिन ध्यान भटकाने के साधन भी बढ़ा दिए हैं। बाज़ार में हर किसी के पास स्मार्टफोन है। फेसबुक से लेकर ट्विटर तक फैला नेटवर्क है। ऐसे में एक काम पर फोकस करना बहुत मुश्किल है। हमारी इच्छा-शक्ति भी अक्सर जवाब दे देती है। ऐसे में कुछ साधनों को छोड़ना ही उचित है। जैसे, ट्रेडिंग के लिए स्मार्टफोन के बजाय कंप्यूटर को ही तवज्जो दें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

घर का झगड़ा हो या कोई और लफड़ा। अगर आप तनाव में हों तो कड़ा नियम बना लें कि उस दिन ट्रेडिंग को हाथ नहीं लगाना है। असल में ट्रेडिंग अपने-आप में तनावपूर्ण काम है। इसलिए हमें दूसरी चीजों का तनाव न्यूनतम रखना चाहिए। नहीं तो आपके सीधे दांव भी उल्टे पड़ सकते हैं। ध्यान दें, ट्रेडिंग जूडो-कराटे जैसा खेल है जहां जो जितना शांत है, उसके जीतने की संभावना उतनी ज्यादा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी