लोकतंत्र में जितना महत्व चुनावों का है, उतना ही महत्व बाज़ार का होता है। जिस तरह सत्ता में बैठी पार्टी मतदाता की अवहेलना नहीं कर सकती, उसकी तरह उसे बाजार की भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। मगर, मोदी सरकार ने अपने गुरूर में आकर रिजर्व बैंक गवर्नर रघुरान राजन से कह दिया कि उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जाएगा। बाज़ार सकते में है। सोम के व्योम पर काले बादल छा गए हैं। बाहर निकलने में खतरा है…औरऔर भी

जिस तरह कस्तूरी हिरण की नाभि में बसती है और वो उसकी तलाश में हर तरफ मारा-मारा फिरता है, उसी तरह वित्तीय बाज़ार से कमाई का सूत्र किसी बाहरी टिप्स-दाता या एनालिस्ट के पास नहीं, आपके अपने पास हैं। रिस्क मैनजमेंट इसकी बुनियाद है। फिर आप में जो भी खास हुनर है, चाहे वो गणना का हो या कयास लगाने का, उसे बाज़ार के वास्तविक डेटा से मिलाइए, जीत की कस्तूरी मिल जाएगी। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे वित्तीय बाजार में अंग्रेज़ी तो शिकारियों की भाषा बन गई है जो भारी-भरकम, रटे-रटाए शब्द या जुमले फेंककर आम लोगों की कमाई साफ करते हैं। लेकिन हिंदी में भी ऐसे ‘सलाहकारों’ की कमी नहीं है जो बराबर कहते फिरते हैं कि महीनों पहले उन्होंने जहां कहा था, निफ्टी आज वहीं चल रहा है। बार-बार फेंटते रहते हैं कि बाज़ार उनके इशारे पर नाचता है। लेकिन गुरुजी! आप खुद क्यों नहीं कमा लेते? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

पता हो कि आगे क्या होनेवाला है, पूरा बाज़ार किधर जाएगा या कोई शेयर कहां तक गिरने के बाद पलट सकता है और जैसा पता था, हकीकत में वैसा ही हो जाए, तब भी बाज़ार में घाटा खानेवाले 95% ट्रेडर मुनाफा नहीं कमा सकते। इसका प्रमाण यहीं अर्थकाम के कॉलम से पाया जा सकता है। स्टॉक भीतर, लेकिन बाहर दाएं छोर पर निफ्टी की दशा-दिशा अक्सर सटीक बैठती है। लेकिन कमाया कितनों ने! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

कभी ध्यान से सोचिए, मनन कीजिए कि शेयर बाजार के 95% ट्रेडर घाटा क्यों खाते हैं। इसकी वजह यह नहीं कि वे बाज़ार की चाल नहीं भांप पाते, बल्कि यह है कि उन्हें जीत-हार का संतुलन बनाना नहीं आता, घाटे को कम से कम रखना और मुनाफे को अधिक से अधिक ले जाना नहीं आता। आसान शब्दों में कहा जाए तो उन्हें जीत को संभालना और हार को पचाना नहीं आता। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जितने भी लोगों की दिलचस्पी है, वे अक्सर मिलते ही पूछते हैं कि बाज़ार यहां से कहां जाएगा। फिर खुद ही बोल पड़ते हैं कि मुझे तो लगता है निफ्टी 8200 के पार नहीं जा पाएगा क्योंकि वहां तगड़ा रेजिस्टेंस है। हर कोई एक्सपर्ट। लगता है कि बाज़ार की लगाम और भविष्य उनके ही हाथ में है। इसी सोच का नतीजा है कि बाजार में 95% ट्रेडर घाटा खाते हैं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई का मूलमंत्र यह है कि यहां किसी भी स्थिति को अंतिम मानकर नहीं बैठा जा सकता। स्थितियां व संतुलन बहुत जल्दी बदल जाया करते हैं। लंबे निवेश में एंट्री के बाद निश्चिंतता रहती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने के कई भाव और निकलने के कई भाव पकड़ने पड़ते हैं। इसी के लिए हिसाब से स्टॉप-लॉस को बराबर उठाते रहना पड़ता है ताकि हासिल मुनाफा उड़नछू न जाए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कंपनी के शेयरों की सप्लाई दरअसल, प्रवर्तकों के हिस्से से बचे फ्लोटिंग स्टॉक पर बंधी रहती है। संस्थाएं भी अपने शेयरधारिता हड़बड़ी में नहीं निकालतीं। शेयर की नई मांग तभी बनती है जब उस कंपनी की उपलब्धि व संभावना बढ़ जाती है। फिर खरीद बढ़ने से उसके शेयर उछल जाते हैं। यही बात चार्ट पर दिखती है। चार्ट कंपनी की काया या धंधे की छाया है। इसलिए चार्ट को सर्वोपरि मानना सही नहीं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

अक्सर होता यह है कि अच्छे नतीजों के बाद भी कंपनियों के शेयर गिर जाते हैं। कारण, बेहतर नतीजे आने पर पहले से खरीद चुके लोग बेचकर मुनाफा निकालने में जुट जाते हैं। इसलिए नतीजों के आधार पर कोई फैसला करने से पहले चार्ट पर देखना होता है कि कहीं वो स्टॉक ओवरबॉट अवस्था में तो नहीं चला गया है। अच्छे नतीजे तभी असर दिखाते हैं, जब वो ओवरसोल्ड अवस्था में होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बेहतर नतीजों के असर पर तीन खास कंपनियों का जिक्र करना उपयुक्त होगा जिन्हें हमने चढ़ने से ठीक पहले पकड़ा था। एचडीएफसी 1105 से 1265 तक, हिंडाल्को 94 से 107 और लार्सन एंड टुब्रो 1295 से 1495 तक मार कर चुका है। इन तीनों के नतीजों के समय बाज़ार बंद या ठंडा था। इसलिए सबको सोचने और एंट्री करने का मौका मिल गया। साल में तिमाही नतीजों के चार ऐसे मौके आते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी