नया साल शुरू और ब्रोकर से लेकर एनालिस्ट व शेयर बाज़ार के ‘ठग’ तक सभी लंबी फेंकने लगे। जबरदस्त कमाई का झांसा। कोई कहता है कि निफ्टी साल भर में 9400 तक पहुंच जाएगा तो कोई 9800 का स्तर बता रहा है। 15% से लेकर 20% कमाई की गारंटी। जीडीपी बढ़ेगा, एफआईआई आएंगे। चाहे कुछ हो जाए, बाज़ार पक्का चढ़ेगा। इसलिए चढ़ जा बेटा सूली पर, भला करेंगे राम। लेकिन आप फंसना नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

चार्ट पर समय के हर फ्रेम में आपको दिख जाएगा कि सामान्यतः किस भाव पर पहुंचते ही खरीद या बिक्री बढ़ जाती है। इंट्रा-डे ट्रेडर अमूमन 1-5 मिनट, 30 मिनट या घंटे का चार्ट देखते हैं। स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडर साप्ताहिक चार्ट में घुसने-निकलने का स्तर देखते हैं, दैनिक चार्ट से स्टॉप-लॉस की गणना करते हैं और 30 मिनट के चार्ट से एंट्री की माफिक रेंज तय करते हैं। चलिए अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हम एक्स-रे कराने जाएं तो अस्पताल एक कोण से नहीं, कई कोण से एक्स-रे रिपोर्ट बनाता है ताकि डॉक्टर सही स्थिति को कायदे से समझ सके। इसी तरह जब हम किसी शेयर के स्वभाव व चाल को चार्ट पर समझना चाहते हैं तो उसे समय के एक फ्रेम में देखना पर्याप्त नहीं। स्विंग/मोमेंटम ट्रेडर तीन फ्रेम का इस्तेमाल तो करते ही हैं। ये हैं – 30 मिनट दो हफ्ते, दैनिक व साप्ताहिक चार्ट। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग करते हुए हम अतीत में पैठकर बाज़ार की दिशा तय करनेवाली शक्तियों की मनोदशा समझने की कोशिश करते हैं ताकि उनकी भावी चाल समझ सकें। एक पैर अतीत में, एक पैर भविष्य में। देखने-समझने को हमारे पास अतीत ही होता है। इस अतीत के तीन हिस्से हैं। एक अभी से 20 दिन, दूसरा 50 दिन से एक साल और तीसरा है कम से कम पांच साल का। शॉर्ट, मीडियम व लॉन्ग टर्म। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश में मनचाहा परिणाम हासिल करना है तो हमें समय का बड़ा ध्यान रखता पड़ता है। मसलन, अगर हर तरफ निराशा छाई हो, नकारात्मक खबरों का ही बोलबाला हो तो उस समय हमारे या आप जैसे रिटेल ट्रेडर को छोटी अवधि की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए और उन कंपनियों में पोजिशनल या लंबे समय का निवेश करना चाहिए, जिनके शेयर मजबूती के बावजूद गिरे पड़े हों। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

गुजरे समय में देखो तो लगता है कि वो कर लिया होता तो कितना अच्छा होता। अपनी गलतियां देखना और सुधारना बड़ा आसान दिखता है। लेकिन आज और अभी जिस पल में हम खड़े हैं, उसमें पैर टिकाकर भविष्य को देखना बड़ा मुश्किल होता है और गलतियों की आशंका को खत्म नहीं किया जा सकता। ट्रेडिंग में हमें हर दिन यही काम करना होता है। इसके लिए समय को साधना बड़ा ज़रूरी है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

क्या फंडामेंटल्स से ट्रेडिंग पर फर्क पड़ता है? बाजार की दशा-दिशा सटीक मालूम हो तो क्या इतने से ही ट्रेडिंग से कमाई की जा सकती है? इसका स्पष्ट जवाब है: नहीं। कारण, ट्रेडिंग में कमाई का वास्ता महज बाज़ार या स्टॉक के भावों की दिशा से नहीं, बल्कि माकूल समय पर घुसने और बाहर निकलने से है। ट्रेन्ड जोर पकड़े, उससे पहले उसे पकड़ना और ट्रेन्ड पलटे, उससे पहले निकलना ज़रूरी है। अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नोटबंदी को अब व्यापक स्तर पर एक नाकाम आर्थिक प्रयोग माना जाने लगा है। इससे काला धन, आतंकवाद, जाली नोट व भ्रष्टाचार में से किसी भी समस्या का हल नहीं निकला है। उलटे, इससे अर्थव्यवस्था में आधे से ज्यादा का योगदान दे रहे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों की कमर टूट गई है। इनमें काम करनेवाले करीब 27 लाख मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। देश के आर्थिक फंडामेंटल कमज़ोर पड़ गए हैं। अब देखें गुरु की दशादिशा…औरऔर भी

बात बड़ी साफ है। भले ही तमाम जानकार कह रहे हों कि नोटबंदी से भारतीय जीडीपी एक-डेढ़ प्रतिशत घट सकता है। लेकिन इस माहौल में भी ट्रेडिंग से कमाने के मौके निकल सकते हैं। बाज़ार का हाल तो निफ्टी और सेंसेक्स जैसे सूचकांक बताते हैं। लेकिन उनसे बाहर सैकड़ों ऐसे शेयर हैं जो स्वतंत्र चाल से चलते हैं। उनकी अलग चाल को पकड़ लिया जाए तो बाज़ार में बराबर कमाया जा सकता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आप यह जानकर अचंभे में पड़ जाएंगे कि नोटबंदी के बाद कई शेयर हैं जो मात्र महीने भर के अंदर 45% से लेकर 90% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। ऐसे पांच शेयर हैं – टान्ला सोल्यूशंस, आईटीआई, बारट्रॉनिक्स, आर एस सॉफ्टवेयर और टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स। इन सभी का वास्ता आईटी उद्योग में हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर बनाने से है। माना जा रहा है कि नोटबंदी से इन्हें फायदा होगा तो इनके शेयर उछल गए। अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी