अतिविश्वास जीवन के हर क्षेत्र के लिए बुरा है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के लिए तो यह बेहद खतरनाक है। इससे आपमें सुरक्षा का झूठा भाव आ जाता है। गुमान हो जाता है कि बाज़ार पर आपकी राय हमेशा सही बैठती है। इस गफलत में आप अपनी औकात से ज्यादा बड़े सौदे कर बैठते हैं। नतीजतन भयंकर घाटे के शिकार या दिवालिया तक हो जाते हैं। इस अहंकार से बचना ज़रूरी है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक ऐसा बिजनेस है जो आपके आत्मसम्मान को हर दिन चुनौती देता है। बाज़ार चंद मिनट में आपको गलत साबित कर सकता है। आप उससे तर्क-वितर्क भी नहीं कर सकते। आपकी निजी धारणा या अनुमान हो सकता है। पर, बाज़ार उसकी रत्ती भर परवाह नहीं करता। उसे जो करना है, वो ही करेगा। इसलिए आप लंबे समय तक सफलता से ट्रेड करना चाहते हैं तो विनम्रता बड़ी ज़रूरी है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में सौदे छिपाकर नहीं किए जाते। बैंक, बीमा या देशी-विदेशी संस्थाओं के सारे सौदे सरे-बाज़ार होते हैं। उनकी हर हरकत स्टॉक के भावों में दर्ज होती है। जिनके पास सही दृष्टि होती है, वे यह सच भावों के चार्ट पर अलग-अलग टाइमफ्रेम और गिने-चुने इंडीकेटरों की मदद से देख लेते हैं। बाकी लोग टिप्स खोजते हैं कि कौन-सा फंड, एफआईआई व बड़ा खिलाड़ी क्या खरीदने या बेचने जा रहा है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हर कोई हर काम नहीं कर सकता। न ही सभी सूचनाएं हर किसी के काम की होती हैं। शेयर बाज़ार के ट्रेडर के लिए सबसे अहम सूचना है सूचकांक या स्टॉक के भाव। हर खबर का असर उनमें समाहित होता है। यह काम करवाती हैं बड़ी-बड़ी रिसर्च फर्में व संस्थान। खबरों व विश्लेषण को पचाकर बैंक, बीमा कंपनियों व म्यूचुअल फंड जैसी संस्थाएं खेल कर चुकी होती हैं। इसे समझना हमारा काम है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हम अक्सर अपनी भूमिका भूल जाते हैं और पीर, बाबर्ची व भिश्ती सभी का काम करने लगते हैं। न भूलें कि हम शेयर बाज़ार के ट्रेडर हैं। माल/सेवा देना कंपनी का काम, उपभोक्ता तक पहुंचाना डीलर व डिस्ट्रीब्यूटर का काम। भाव इनकी ऊंच-नीच समेत सरकारी नीतियों और विदेशी बाज़ार की हलचल का सारा असर सोख चुका होता है। हमें तो थोक के भाव खरीदना और रिटेल के भाव में बेचकर मुनाफा कमाना है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग में सफलता के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है अपने दिमाग को सही तरह से प्रशिक्षित करना। इसमें मन, बुद्धि व भावना तीनों आते हैं। बाज़ार में शोर बहुत है। सूचनाओं के अंबार में मन भटकता है, भावनाएं उबाल मारती हैं और बुद्धि भ्रमित हो जाती है। देश-विदेश की खबरें, सरकार की नीतियां व फैसले, कंपनियों के नतीजे और बाज़ार में हर पल बदलते भाव। क्या पकड़ें, क्या छोड़ें? अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सड़क सभी की होती है। लेकिन गाड़ी, पेट्रोल और ड्राइविंग का संतुलन बनाकर चलें तो आप सलामत अपनी मंज़िल पर पहुंच जाते हैं। इसी तरह वित्तीय बाज़ार सभी का है। इसमें दिमाग, पूंजी और सिस्टम का संतुलन बनाकर चलें तो आप लक्षित मुनाफा कमा लेते हैं। इन तीनों चीज़ों में आप दूसरों से सीख व मदद हासिल कर सकते हैं। लेकिन फैसला और अमल पूरी तरह आपके हाथ में होता है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बिना किसी सिस्टम व अनुशासन वाले ट्रेडरों को शुरू में सफलता मिलती है तो उनका जोश बढ़ जाता है। ब्रोकर भी उसकी पीठ थपथपाते हुए लिमिट बढ़ा देता है। ट्रेडर बड़ी पोजिशन में खेलने लगता है और ब्रोकर को ज्यादा सौदों पर ज्यादा कमीशन मिलता है। दोनों की मौज। लेकिन ट्रेडर जब हारना शुरू करता है तो ज्यादा सौदे करके बरबाद हो जाता है। मगर, ब्रोकर का कमीशन बढ़ता जाता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अक्सर होता यह है कि लोग ब्रोकर के ऑफिस पहुंच जाते हैं। जो भी स्टॉक खबर या किसी वजह से भाग रहा होता है, उसे खरीद लेते हैं। फायदा हुआ तो उसी दिन शाम को सौदा काट देते हैं। अन्यथा, शुक्रवार को फायदा हो या नुकसान, उससे निकल जाते हैं। दरअसल, वे ब्रोकर की मार्जिन सुविधा का इस्तेमाल करते हैं जिसमें उन्हें पांच दिन का क्रेडिट मिलता है। यह तरीका बेहद खतरनाक है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के ट्रेडर को सफलता के लिए जिन पांच बुनियादी सवालों का जवाब खुद से पूछना चाहिए, वे हैं: आप खरीदने या बेचनेवाले स्टॉक्स का फैसला कैसे करते हैं; कैसे तय करते हैं कि कितना खरीदना या बेचना है; कैसे तय करते हैं कि कब खरीदना या बेचना है; घाटे में फंस गई पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए; और अंतिम सवाल कि जीतनेवाली पोजिशन से कब निकल जाना चाहिए। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी