पिछले पौने चार साल में बहुतों ने यह सेवा ली, बहुत-से बाद में पीछे हट गए और बहुत-से अब भी मैदान में डटे हैं। जो डटे हैं, वे यकीनन ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्रेडिंग का अपना सिस्टम बनाया होगा। गांठ बांध लें कि अपना सिस्टम बनाए बिना आप सटीक सलाहों से भी बराबर नहीं कमा पाएंगे। हम आपकी रिसर्च का बोझ हल्का करते हैं ताकि आप न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमा सकें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मासूम ट्रेडरों की ठगी को कैसे रोका जाए? ‘अर्थकाम’ ने ऐसे एक ठग को नजदीकी से पहचाना। हालांकि उस ठग की दुकान अब भी चालू है। उसमें एक राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता तक ने निवेश कर रखा है। खैर, रिसर्च का क्रम शुरू हुआ। बहुत सारी किताबें पढ़ डालीं। कई महंगी-महंगी क्लासें कीं। टेक्निकल एनालिसिस भी सीखी। अहसास हुआ कि बगैर अपना सिस्टम बनाकर ट्रेड करने वाले बाजार में हमेशा पिटते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाजार में ट्रेडिंग का यह कॉलम शुरू हुए करीब चार साल होने जा रहे हैं। इसकी प्रेरणा तब मिली, जब हमने देखा कि हिंदी, मराठी या गुजराती भाषी तमाम लोग टिप्स पर ट्रेडिंग करते हैं। कंपनी को ऑर्डर मिलनेवाले हैं, बड़ा एफआईआई खरीदने जा रहा है, म्यूचुअल फंड की खरीद आनेवाली है या बाज़ार का कोई बड़ा खिलाड़ी हाथ लगानेवाला है। ऐसे सफेद झूठ फैलाकर मासूम ट्रेडरों को ठगा जा रहा था। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

लोगबाग ऑप्शंस के दीवाने हैं, खासकर निफ्टी व बैंक निफ्टी ऑप्शंस के। इक्विटी डेरिवेटिव्स के टॉप-20 कॉन्ट्रैक्ट में आपको यही दो ऑप्शंस छाए मिलेंगे। धन भी ज्यादा नहीं लगता। मसलन, निफ्टी-8950 में कॉल का भाव है 16.75 रुपए और लॉट 75 का तो कुल लगे 1256 + 30 रुपए का ब्रोकरेज। डूबें तो यही 1286 रुपए, और फायदा महीने भर में 50-60%! बस डेल्टा, थीटा, गामा व वेगा सीख लें। फंसान है तगड़ी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जिस चीज़ के चाहनेवाले बढ़ जाते हैं तो उसके भाव चढ़ जाते हैं। यह बात शेयर बाज़ार पर भी लागू होती है। हां, यह छोटे या रिटेल निवेशकों की नहीं, बड़ों की खरीद असरकारी होती है। ट्रेडिंग में सफलता की कुंजी है कि इसे कैसे पकड़ा जाए। कुछ लोग इसके लिए शेयरों के फ्यूचर्स के ओपन इंटरेस्ट को आधार बनाते हैं। वे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से बाहर के शेयरों को हाथ नहीं लगाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

कंपनियों में पांच-दस नहीं, बल्कि साल-दो साल के लिए भी निवेश करनेवालों की संख्या घटती जा रही है क्योंकि अधिकांश लोगों के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ है। लगाया था सौ रुपए, दस साल में घटकर रह गया आठ रुपया। इसलिए आम निवेशक ट्रेडर बनते गए। उसमें भी कोई सिरा नहीं मिला तो मूल शेयरों के डेरिवेटिव्स, फ्यूचर्स व ऑप्शंस में खेलने लगे और कम से भयंकर जोखिम में धंस गए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हर समय, हर जगह लोगबाग न्यूनतम मेहनत में अधिकतम नोट बनाने की फिराक में लगे रहते हैं। वित्तीय बाज़ार के आम ट्रेडर इसमें औरों से चार कदम आगे हैं। शेयर बाज़ार में पेनी स्टॉक्स का झांसा बरकरार है। अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग का नया दौर चल निकला है तो सभी उसके पीछे भाग रहे हैं। इसमें भी फ्यूचर्स नहीं, ऑप्शंस के पीछे क्योंकि वो ऊपर-ऊपर काफी सस्ता नज़र आता है। यह कितना सही है? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

समय के साथ हम अपने तौर-तरीकों को अपग्रेड न करें तो पीछे रह जाएंगे। वित्तीय बाजार की ट्रेडिंग में भी विदेशी संस्थाओं व हेज फंडों के आने के साथ सिस्टम में बराबर नयापन आता जा रहा है। अर्थकाम अपना ट्रेडिंग सिस्टम अद्यतन बनाने में लगा है। इस काम में दो हफ्ते लग जाएंगे। इसलिए यह कॉलम अब अगली बार 20 फरवरी को आएगा। वर्तमान सब्सक्राइबरों का सब्सक्रिप्शन दो हफ्ते बढ़ा दिया गया है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शायद आपने भी गौर किया होगा कि अधिकांश शेयरों ने साल भर पहले फरवरी महीने में अपना न्यूनतम स्तर पकड़ा था। उसके बाद बाजार बराबर बढ़ता ही रहा। 2016 के आखिरी चार महीनों में करीब 12% बढ़त साफ हो गई। फिर भी बाज़ार का जोश एकदम टूटा नहीं है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि बाजार में नई खरीद से बढ़त का सिलसिला कम से कम अगले दो साल तक बदस्तूर चलता रहेगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2017-18 का बजट आ गया। अगले कुछ दिन जानकार लोग इसके विश्लेषण में लगे रहेंगे। जीएसटी का अहम सुधार बाद में लागू किया जाना है। वैसे, खांटी ट्रेडरों के लिए खबरों का बहुत ज्यादा मायने-मतलब नहीं होता। वे तो वित्तीय बाजार के स्वभाव से खेलने हैं जो कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। हमेशा ऊपर-नीचे होता रहता है। लहर की हर डुबकी उनके लिए कमाने का मौका होती है। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी