कभी आपने गौर किया है कि मनीकंट्रोल जैसी वेबसाइटों या बिजनेस चैनलों पर आनेवाले एनालिस्ट ज्यादातर ऐसे शेयर खरीदने को कहते हैं जो पहले ही काफी चढ़ चुके होते हैं। ऊपर से उनमें बढ़ने की जितनी संभावना होती है, उतना ही गहरा स्टॉप-लॉस लगाने को कहते हैं। मसलन, रैम्को सीमेंट्स को 720 पर 790 के लक्ष्य के साथ खरीदो, जबकि स्टॉप-लॉस 650 का है। यानी, 9.72% बढ़त तो उतना ही फटका! इनसे बचें। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

अब तक जो चुका है, उसका इशारा कुछ और होता है, जबकि हो जाता है कुछ और। फिर भी हम भविष्य की योजना बनाना नहीं छोड़ सकते क्योंकि पूरी तरह भाग्य भरोसे रहना इंसान की मूल फितरत नहीं है। जहां जानवर हमेशा परिस्थितियों के माफिक खुद को ढालते हैं और इंसान भी कुछ हद तक ऐसा करता है, वहीं इंसान हालात को बदलता भी है। यही मानव सभ्यता की विकासगाथा का मूल है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

दो दिन के व्यवधान के बाद यह कॉलम दोबारा हाज़िर है। असल में यही अनिश्चितता है जिस पर आपका कोई वश नहीं चलता। यहां आकर आपकी सारी योजना धरी की धरी रह जाती है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग करते वक्त हमें अनिश्चितता का यह पहलू हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। यह सकारात्मक भी होती है और नकारात्मक भी। फायदा तो अच्छा और घाटा तो हमें उसके सामने हाथ खड़ा करके निकल जाना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

हमें बाज़ार की तथाकथित ‘गोपनीय’ या ‘गुप्त’ जानकारियों के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। आखिर जिसके पास पूरी नदी हो, उसे कुंओं या बावड़ी में झांकने की क्या ज़रूरत! एक तो ये जानकारियां भरोसा करने लायक नहीं होतीं। दूसरे, इन्हें पूरा निचोड़ लेने के बाद बाहर फेंका जाता है। तीसरे, शेयरों के भाव व उसके पैटर्न में काम की सारी जानकारियां समाहित रहती हैं। उसके बाद का कमाल हमारी बुद्धि करती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बैंक व देशी-विदेशी वित्तीय संस्थान पुख्ता इंतज़ाम रखते हैं कि उनकी ट्रेजरी डेस्क को कंपनियों की जो खास अंदरूनी जानकारियां हासिल हैं, वे किसी भी तरह लीक न हों। उनके इस विभाग के किसी भी नए-पुराने कर्मचारी को शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की इजाज़त नहीं होती। मसलन, मेरे एक दोस्त की बेटी आईआईएम से एमबीए करने के बाद जेपी मॉर्गन में कार्यरत है, लेकिन वो ट्रेड या निवेश नहीं कर सकती। अब पकड़ते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अंदर की, अघोषित सूचनाओं के आधार पर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश करना अपराध है। इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहते हैं। यह अलग बात है कि यह अपराध तय होने में दसियों साल लग जाते हैं। उसके ऊपर भी अपील पर अपील चलती रहती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का ताज़ा मामला साल 2007 का है। इसमें बड़े मलाई खाते हैं, जबकि छोटे व रिटेल ट्रेडरों को ‘इनसाइडर’ खबरों के नाम पर फंसाया जाता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का युद्ध है जिसमें आप अपनी चाल से दूसरों के बैंक खाते का धन अपने खाते में खींचते हो। दूसरे को कम समझना या अपने को उस्ताद समझना यहां घातक है। शांत मन, साफ बुद्धि व सटीक विश्लेषण आपके हथियार हैं। सिद्धांतः जो सूचनाएं सबको उपलब्ध हैं, वही आपको भी मिल सकती हैं। अंदर की सूचनाओं पर आधारित इनसाइडर ट्रेडिंग भी चलती है। लेकिन वो अपवाद है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हम एक ही शेयर में बार-बार निवेश नहीं कर सकते। लेकिन एक ही शेयर में बार-बार ट्रेडिंग कर सकते हैं। वजह यह है कि निवेश में हम शेयर के भाव की दीर्घकालिक दिशा पर नज़र रखते हैं, उसकी लाइन को ध्यान में रखते हैं। लेकिन भाव असल में रेखा के रूप में नहीं, बल्कि लहरों के रूप में चलते हैं। उनकी इस अल्पकालिक लहरों के उतार-चढ़ाव को पकड़कर हम ट्रेडिंग में कमाते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बात साफ बड़ी साफ है कि वित्तीय बाज़ार में कमाई शुद्ध रूप से साफ समझ और अनुशासन का खेल है। हर सौदे का रिस्क व रिवॉर्ड का अनुपात समझा और मुनाफे को अधिकतम व घाटे को न्यूनतम रखने का अनुशासन माना तो दिल-दिमाग के साथ आपका बैंकखाता भी सुरक्षित रहेगा। लेकिन बुद्धि को छोड़ मन या इन्ट्यूशन पर चले तो कभी भी किनारा नहीं मिलेगा। आपको अपनी ट्रेडिंग पूंजी हमेशा बचाकर चलनी है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

महीनेभर में बीस दिन ट्रेडिंग की। सौदे वैसे चुने जिसमें गिरने की आशंका एक और बढ़ने की संभावना दो हो। रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात 1:2 का। मान लें कि बीस में से 60% यानी बारह सौदे गलत हों और आपने स्टॉप-लॉस 2% लगाया हो तो कुल नुकसान हुआ 12×2 यानी 24% का। लेकिन बाकी आठ सौदों में फायदा होगा 8×4 यानी 32% का। इस तरह बहुत खराब स्थिति में भी महीने भर में 8% कमाई। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी