शेयर बाज़ार में अगर आप यह सोचकर आते हैं कि मैं दस लाख रुपए लगा रहा हूं और मुझे साल के अंत 400% रिटर्न चाहिए तो पक्का समझें कि बाज़ार आपको निचोड़ डालेगा। दरअसल, उसमें लाखों लोग, हज़ारों शक्तियां सक्रिय हैं। बाज़ार को अपने तरीके से काम करने दें। आप अपनी योजना के हिसाब से चलें। अगले आधे समय भी आपकी योजना सही बैठ गई तो आप ट्रेडिंग से ठीकठाक मुनाफा कमा लेंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

स्टॉप-लॉस का मकसद है सौदा उल्टा पड़ने पर नुकसान को न्यूनतम रखना। लेकिन इसे तय करने का कोई पक्का फॉर्मूला नहीं। हालांकि हम वही सौदे चुनते हैं जिनमें 1.5-2% घाटे की आशंका होती है। लेकिन हकीकत में स्टॉप-लॉस का स्तर अलग-अलग स्टॉक के स्वभाव पर निर्भर करता है। भावों में ज्यादा उछलकूद या वॉलैटिलिटी होती है तो उनमें इसका स्तर ज्यादा होता है। पर हम ऐसे स्टॉक्स से दूर भी रह सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

स्टॉप-लॉस हिट हुआ तो हुआ। आपको अगले बीस साल तक बाज़ार में रहना है। इस दौरान स्टॉप-लॉस लगते रहेंगे। आपको उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। पैसा बना तो बना, नहीं तो बाज़ार गया तेल लेने। ज़िंदगी आगे बढ़ती रहती है। आपको इस मनोविज्ञान के साथ ट्रेडिंग करनी चाहिए। इस धारणा के साथ बाज़ार में आते हैं तो खोएंगे कुछ नहीं, पाकर जाएंगे। याद रखें, ट्रेडिंग में सफलता का पैसे से कोई लेनादेना नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

यह समझें कि स्टॉप-लॉस एक तरह का बीमा है। हम स्टॉप-लॉस लगाते ही इस तरह हैं ताकि उसके हिट होने की नौबत न आए। लेकिन अगर खुदा न खास्ता हिट हो गया तो बड़े नुकसान से बच जाएं। दो-चार करोड़ की पॉलिसी खरीदने का मतलब यह नहीं कि हमें असमय मरना है, बल्कि यह कि अगर हम किसी आकस्मिकता में निपट लिए तो परिवार पर अचानक आर्थिक मुसीबत न आ जाए। अब समझते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ज़नाब बोले: मेरे बाप बड़े बहादुर थे। जंगल में अकेले जाकर शेर से भिड़ गए। पूछा: फिर क्या हुआ तो बोले: शेर उन्हें मारकर खा गया। शेयर बाज़ार में भी ऐसे बहादुर ‘शहीदों’ की कोई कमी नहीं। आए दिन होते रहते हैं। ऐसे लोग स्टॉप-लॉस लगाने को अपनी तौहीन समझते हैं। दरअसल, इस मानसिकता में इंसान खुद को तुर्रमखां समझता है। लेकिन बाज़ार उनकी रत्ती भर भी परवाह किए बगैर चलता जाता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

आप सुनते-सुनते एकदम पक गए होंगे कि वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार बहुत रिस्की है। हालांकि ज़िंदगी भी बहुत रिस्की है क्योंकि हर अगले पल हम अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगाते हैं। लेकिन अपना विचार, नज़रिया व तरीका हम सही कर लें तो ज़िंदगी का रिस्क सहज बन जाता हैं। इसी तरह निरंतर शिक्षा से बाज़ार के प्रति हम अपना बर्ताव सही कर लें तो उसका रिस्क पकड़ में आ जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ब्रेकआउट का सीधा-सा मतलब है कि खरीदनेवाले ज्यादा हैं और बेचनेवाले बहुत कम। मांग सप्लाई से ज्यादा। ऐसे में नहीं पता रहता कि बाज़ार या कोई स्टॉक कहां तक ऊपर जाएगा। कोई लक्ष्य नहीं बांध नहीं सकते कि कहां तक पहुंचे तो निकल जाना चाहिए। इसलिए ऐसे ट्रेड में हमेशा ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाकर चलना चाहिए। अचानक गिरने पर नहीं तो बड़ा घाटा लग सकता है। भाव जितना बढ़े, स्टॉप लॉस उठाते जाएं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ब्रेकआउट ट्रेड तभी होता है जब शेयर का उच्चतम व न्यूनतम भाव पहले से ऊपर जा रहा हो या कम से कम न्यूनतम भाव बराबर उठ रहा हो। पिछले कुछ दिनों के भावों के ऊपरी-नीचे स्तर को मिलाकर रेखा खींचें तो उठता हुआ त्रिभुज बनता है। अमूमन ऐसी स्थिति में आरएसआई 45-50% के आसपास होता है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड में बढ़ने-गिरने की प्रायिकता लगभग बराबर होती है तो ये काफी रिस्की होते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार जब बराबर चढ़ रहा हो, अधिकांश शेयर नई ऊंचाइयां छू रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड करने का सलीका ही सबसे सही व कारगर रणनीति है। लेकिन ब्रेकआउट ट्रेड के कई तरीके हैं। इनमें से एक है फ्लैग-पैटर्न जिसे हमने कल इस्तेमाल किया। इसके अलावा टेक्निकल एनालिसिस में कुछ अन्य तरीके भी हैं जिन पर हम अगले दिनों  चर्चा करेंगे। मगर, इनमें समान पहलू यह है कि ऐसे ट्रेड बड़े रिस्की होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के तमाम सूचकांक ऐतिहासिक ऊंचाई पर। हर पांच लिस्टेड कंपनी में से चार के शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर। 20% गिरे हुए शेयरों को हाथ लगाने में भी डर लगता है कि कहीं और न गिर जाएं। अखबार, चैनल व विश्लेषक सभी ‘बुल-रन’ का हल्ला मचाने लगे हैं। रिटेल निवेशक भी अपनी पूंजी लेकर बाज़ार की तरफ दौड़ पड़ा है। लालच के इस दौर में क्या हो ट्रेडिंग रणनीति? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी