जो खबर आनी थी, आ चुकी। अब आप हिसाब लगाते हैं कि उसका बाज़ार पर ज़रूरत से ज्यादा असर हुआ है या ज़रूरत से कम। दोनों ही स्थितियों में आप ट्रेडिंग कर सकते हैं। मसलन, ज्यादा गिरा तो वह पलटकर उठ सकता है। वहीं, कम गिरा तो ज्यादा गिर सकता है। यह एक तरह का अनुमान है जिसका सही-गलत होना बाज़ार के पैटर्न व स्वभाव से आपके परिचित होने पर निर्भर करता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नियत समय पर आनेवाली खबरों पर ट्रेड करने का एक तरीका हुआ, उनके आने से पहले अनुमान लगाकर रिस्क उठाना। दूसरा तरीका है खबर आने के बाद ट्रेड करना। यह तरीका अचानक टपक पड़नेवाली खबरों पर भी लागू होता है। ऐसा करने में होड़ बहुत ज्यादा होती है। इसलिए रिटेल ट्रेडर के पिट जाने का खतरा भी बहुत है। हालांकि बाज़ार बंद होने के बाद आनेवाले नतीजों/समाचारों पर खेलना थोड़ा आसान होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

खबरों पर ट्रेड करना बहुत रिस्की है। वैसे, शेयर बाज़ार स्वभाव से ही रिस्की है और रिस्क व रिवॉर्ड के बीच सीधा समानुपाती रिश्ता है। फिर, खबरों से कैसे खेला जाए? जैसे, आज ढाई बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा घोषित करेगा। अगर बाज़ार में आम धारणा है कि वो ब्याज दर घटाएगा। मगर आपको लगता है कि ऐसा नहीं तो आप औपचारिक घोषणा से पहले अपनी सोच के माफिक ट्रेड कर सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जब खबरों का ज़ोर चलता है तो टेक्निकल एनालिसिस कतई कोई काम नहीं करती। मगर, हमारे अधिकांश ट्रेडर ट्रेडिंग के लिए इसी का ही सहारा लेते हैं। ऐसे में खबरों को अपनी ट्रेडिंग रणनीति में कैसे शामिल किया जाए? खबरें दो तरह की होती है। एक का आना पहले से तय होता है। जैसे, कल रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा या कंपनियों के तिमाही नतीजे। दूसरी, जो अचानक टपक पड़ती हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

यूं तो शेयरों के भाव मुख्यतः कंपनी से जुड़ी खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अपने यहां खबर सब तक पहुंचते-पहुंचते इतनी जूठी हो चुकी होती है कि उसमें कोई दम नहीं बचता। ऐसा न भी हो तो उस पर खेलनेवाले इतने ज्यादा ताकतवर हैं कि रिटेल ट्रेडर के पास खेलने को कुछ बचता नहीं। इसीलिए नियम है कि आम ट्रेडर को खबरवाले दिन बाज़ार से दूर रहना चाहिए। लेकिन आखिर कब तक? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अचानक बाज़ार के गिर जाने पर सारी सावधानी के बावजूद दिल बैठ जाता है। जब अच्छी-खासी मजबूत कंपनियों के शेयर भी गोता लगाने लगते हैं और सारी पूंजी उड़ने लगती है, तब किसी का भी आहत होना स्वाभाविक है। लेकिन हम बराबर कहते रहे हैं कि अगर बुद्ध नहीं बन सकते तो आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। आपको अपना भावनात्मक संतुलन किसी भी हाल में नहीं टूटने देना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार का मूड बड़ा अस्थिर है। ऐसे में मान लीजिए, आपने 5-10 दिन की ट्रेडिंग के लिए कोई शेयर खरीदा है तो उसमें स्टॉप-लॉस उठाते जाने के साथ आपको उसका ट्रिगर भी लगाना चाहिए। जैसे, ‘एबीसी’ कंपनी का शेयर आपने 120 पर 132 के लक्ष्य के साथ खरीदा। पहला स्टॉप-लॉस 118 का। बढ़कर 128 तक पहुंचा तो आपने स्टॉप-लॉस 125 का कर दिया। लेकिन साथ ही स्टॉप-लॉस ट्रिगर 125.45 का रख देना चाहिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमारा बाज़ार बराबर उस कगार तक खिसकता जा रहा है, जहां पर कोई नकारात्मक खबर आते ही निफ्टी व सेंसेक्स 10% से ज्यादा टूट सकते हैं। ऐसा होना लंबे समय के निवेशकों के लिए बड़ा सुखद होगा। लेकिन ट्रेडरों का क्या होगा? तब तो सारे स्टॉप-लॉस टूट जाते हैं। बाज़ार निकलने का मौका नहीं देता। इसीलिए नियम है कि शेयर बाजार में लगाने के लिए रखे धन का 5% ही ट्रेडिंग में लगाएं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था जब जमकर बढ़ रही हो, तब शेयर बाज़ार चढ़ता जाए तो उसके टिके रहने पर काफी हद तक भरोसा किया जा सकता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां जब देश की रेटिंग को निवेश के सबसे निचले पायदान से उठाने को तैयार न हों, तब बाज़ार की दशा-दिशा को लेकर हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए। बता दें कि पिछले दस सालों में निफ्टी छह बार एक दिन में 10% से ज्यादा गिर चुका है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्र में अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने पर इसे बड़ी उपलब्धि बताया कि शेयर बाज़ार ने ऐतिहासिक ऊंचाई छू ली है। सेंसेक्स 31,000 और निफ्टी 9600 के पार जा चुका है। लेकिन पिछले के पिछले गुरुवार को ब्राज़ील का शेयर बाज़ार जिस तरह अचानक 10% से ज्यादा गिर गया था, वैसा अपने यहां हो गया तो! सोचिए कि क्या तब इसे सरकार की नाकामी माना जाएगा? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी