वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के दो अकाट्य सच अमूमन हम स्वीकार नहीं कर पाते। पहला यह कि सारी तैयारियों के बावजूद यहां परिणाम का कोई भरोसा नहीं। यहां सारा खेल अनिश्चितता का है। इसे कोई नहीं बांध सकता। दूसरा सच यह कि यहां उस्तादों के लिए भी घाटे से बचना नामुमकिन है। यहां सफल ट्रेडर वही है जो जानता है कि ठीक से घाटा कैसे खाया जाए, घाटे को न्यूनतम कैसे रखा जाए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आगे-पीछे का सारा ध्यान रख अगर हम योजना बनाकर चलेंगे और बाज़ार के रिस्क को समझते हुए स्टॉप लॉस या पोजिशन साइज़िंग के अनुशासन का पालन करेंगे तभी शेयर बाज़ार से नियमित मुनाफा कमा सकते हैं। वहीं, अंधेरे में तीर चलाएंगे तो दो-चार तुक्कों के बाद हमारा लहूलुहान होना तय है। अब तो भावनाएं जोर न मार सके, इसकी व्यवस्था ऑर्डर देते समय ही स्टॉप लॉस व लक्ष्य बांधकर की जा सकती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

चार्ट पर लगातार हरी-हरी कैंडल बनती जाती है तो हर किसी को लगता है कि खरीदते जाओ क्योंकि शेयर का बढ़ना तो पक्का है। लेकिन हम भूल जाते हैं कि बाज़ार में हर कोई मुनाफा कमाने आया है और शेयर के चढ़ने के बाद बेचेगा नहीं तो सचमुच का मुनाफा कहां से कमाएगा। इसलिए हमें साप्ताहिक या महीने के चार्ट से देखना पड़ता है कि ठीक पिछली बार कहां पर मुनाफावसूली चली थी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

चार्ट की भाषा फॉर्मूलों में बांधकर नहीं समझी जा सकती। इसीलिए टेक्निकल एनालिसिस के पच्चीसों इंडीकेटर लेकर भी 95% ट्रेडर बाज़ार में पिटते-पिटाते रहते हैं। हमें रूढ़िगत धारणाओं से निकलना होगा। जैसे, माना जाता है कि हरी कैंडल तेज़ी और लाल कैंडल गिरावट का संकेत देती है। लेकिन रंग से ज्यादा कैंडल का आकार और स्थान मायने रखता है। उससे भी ज्यादा अहम है कि ये कैंडल किस ज़ोन में बने हैं। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

कोई खबर नहीं, कोई सूत्र नहीं, कोई सनसनी या टिप्स नहीं। रिटेल ट्रेडरों को अगर शेयर या किसी वित्तीय बाज़ार से कमाना है तो उनके पास एकमात्र साधन है उनके भावों का चार्ट और उसे पढ़ने की कला। इसमें टेक्निकल एनालिसिस केवल वर्णमाला है। अक्षरों को पहचानने के बाद शब्द और वाक्य हमें ही बनाने पड़ते हैं। मूल बात है चार्ट पर बाज़ार की सबल भावना को पढ़ना और उससे खेलना। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर कोई रिटेल ट्रेडर सोचता है कि वह खबरों पर खेलकर बाज़ार से नोट बना लेगा तो यह उसकी निपट मूर्खता है। खबरों पर या तो कंपनी के प्रवर्तक व अंदर के लोग या उनसे गहरा ताल्लुक रखनेवाली संस्थाएं ही कमाती हैं। प्रवर्तक अमूमन खुद सीधे कुछ नहीं करते, बल्कि कामयाब निवेशकों का पट्टा पहने ऑपरेटरों का सहारा लेते हैं। कई तो रिसर्च कंपनियों की आड़ में धूर्त प्रवर्तकों की सेवा करते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अपनी भावनाओं का सारथी बनना और दूसरों की भावनाओं का शिकार करना। यही वह असली सॉफ्टवेयर है जिससे आप शेयर बाज़ार ही नहीं, हरेक वित्तीय बाज़ार में बड़े सुकून से बराबर कमाई कर सकते हैं। जिस दिन आप शेयरों के भाव के पीछे घहराती भावनाओं के बादल को समझने लग जाते हैं, उसी दिन से आपको इस खेल में आनंद आने लगता है और यही आनंद फिर आपको कमाई तक ले जाता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

भीड़ से अलग चलने के लिए बड़ा जिगरा चाहिए। यह एक ऐसी शर्त है जिसे पूरा किए बिना आप वित्तीय बाज़ार से बराबर मुनाफा नहीं कमा सकते। इस शर्त का मूलाधार है खुद अपने भीतर की भावनात्मक बाधाओं पर जीत हासिल करना। इसमें ध्यान काफी मददगार साबित हो सकता है। ऐसे ध्यान से आप अपनी भावनाओं के प्रेक्षक बनने का अभ्यास करते हैं। फिर एक दिन आप भावनाओं के सारथी बन जाते हो। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर हम अपने नैसर्गिक/प्राकृतिक स्वभाव से शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश करने लग जाएं तो भयंकर मुसीबत में फंस सकते हैं। बराबर मुनाफा कमानेवाला ट्रेडर तब खरीदता है, जब हर कोई बेच चुका होता है। वहीं, वह तब बेचता है जब हर कोई खरीद चुका होता है, शेयर के भाव काफी चढ़ चुके हैं और चार्ट पर हरे-हरे कैंडल ही दिख रहे होते हैं। वह भीड़ की मानसिकता से अलग चलता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

गीता में मन को मनुष्यों के बंधन और मुक्ति का कारण बताया गया है। बुद्ध भी मानते थे कि मानव-मन में जो सहज भावनाएं उठती हैं, वे अक्सर छलिया होती हैं। इसलिए मन व भावनाओं को साधना जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है। ट्रेडिंग भी इसका अपवाद नहीं। हमारे अवचेतन में भरा है कि सब डरें तो डरो और चहकें तो चहको। लेकिन यह सोच निवेश व ट्रेडिंग के लिए आत्मघाती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी