आज अर्थजगत और शेयर बाज़ार के लिए बड़ी खबरों का दिन है। महीने का आखिरी गुरुवार होने के नाते अगस्त के डेरिवेटिव सौदों की एक्पायरी का दिन है। दूसरे, आज बाज़ार बंद होने के बाद शाम को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर के आंकड़े आएंगे। यह आंकड़े काफी अहम हैं क्योंकि मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था मात्र 6.1% बढ़ी थी। कहीं हालत और ज्यादा खराब न हो जाए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मुंबई बारिश से सराबोर है। लेकिन बाज़ार का शोर बदस्तूर जारी है। इस शोर में सच तक पहुंचना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा काम है। ऐसे में हमें सरकार या कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट की थाह लेनी पड़ती है। साथ ही चूंकि सच पका-पकाया नहीं मिलता, इसलिए हमें विश्लेषण का सहारा लेना पड़ता है। दूसरे के विश्लेषण में पक्षधरता होती है, इसलिए हमें विश्लेषण की अपनी क्षमता विकसित करनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

किसी सार्थक फैसले के लिए सच जानना बहुत ज़रूरी है। लेकिन सच तक पहुंचने के लिए सही सूचनाओं या खबरों का मिलना आवश्यक है। मुश्किल यह है कि जब मीडिया अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा हो, आम अखबार व न्यूज़ चैनल राजनीतिक दलों और बिजनेस अखबार व चैनल कंपनियों के भोंपू बन गए हों, तब सच्चाई तक कैसे पहुंचा जाए। शुक्र है कि वेब मीडिया का एक हिस्सा अभी निष्पक्ष बना हुआ है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

सुबह से शाम ही नहीं, देर रात तक खबरों की बमबारी। पहले मामला अखबार तक सीमित था। अब चौबीस घंटों के न्यूज़ चैनल हमेशा ब्रेकिंग न्यूज़ परोसते रहते हैं। उनका मकसद हमें खबर देना नहीं, बल्कि हमारा ध्यान खींचना होता है ताकि हम ज्यादा से ज्यादा संख्या में उनके कार्यक्रम देखें, उनकी टीआरपी बढ़े और उन्हें ज्यादा व महंगे विज्ञापन मिलें। हमें पता भी नहीं चलता कि सच क्या है और झूठ क्या। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में जब हम गलत साबित होते हैं तो इससे हमारा कुछ घटता नहीं। भले ही स्टॉप-लॉस थोड़ा घाटा लगा दे। लेकिन सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हमारा अहं पहले से छोटा पड़ जाता है। यह अहं छोटा पड़ते-पड़ते जिस दिन एकदम खत्म हो जाता है, शून्य हो जाता है, उसी दिन से वित्तीय बाज़ार में हमारी कमाई की राह खुलती है। अहं घर पर चलता है, बाज़ार में कतई नहीं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार की संभवतः सबसे बड़ी सीख है विनम्रता। वह हमें आईना दिखाता है। यह भी सिखाता है कि हम दूसरों की आंख में आंख डालकर कह सकें कि हां, मैं गलत था। यहां अपनी गलती माननेवाले जीतते हैं। वहीं, जो अहंकारवश जिद पकड़े रहते हैं, बाज़ार उनकी सारी हेंकड़ी भुला लेता है। जो बुद्धिजीवी बाज़ार के बजाय सत्ता की ताकत पर भरोसा करते हैं, वे इतिहास के कूड़ेदान में जाने को अभिशप्त हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार की खूबसूरती यह है कि वो पूरी तरह स्वायत्त है। वह किसी व्यक्ति की छोड़िए, ताकतवर से ताकतवर सरकार तक का हुक्म नहीं मानता। बाज़ार से फ्रॉड करने वाले देर-सबेर धरे जाते हैं। देश या विदेश, कहीं इसका अपवाद नहीं। यह फेसबुक या ट्विटर जैसा नहीं कि आप मुफ्त में बढ़ते और फैलते चले जाएं। बाज़ार में अनुभव व ज्ञान हासिल करने की कीमत हर किसी को नुकसान उठाकर चुकानी पड़ती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार बड़ा निर्मम और उदार गुरु है। उदार इसलिए क्योंकि वो हर पल कुछ न कुछ नया सिखाता रहता है। इस सीख में अनेक ऐसी अहम बातें होती हैं जिन्हें आप जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी अपना सकते हैं। निर्मम इस मायने में कि आपने सीखा नहीं तो वह आपको बरबाद कर सकता है। नहीं सीखने पर एक दिन आप पाई-पाई को मोहताज हो जाएंगे और वो अपनी रौ में चलता जाएगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के साथ आज क्यों न कुछ अपनी और देश की बात कर लें। यह महीना असल में बड़ा खास है। 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ व 15 अगस्त को आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से बोलेंगे तीसरी बार। अर्थव्यवस्था ठीक, पर अपग्रेड ज़रूरी। हम भी करेंगे तकनीकी व संपादकीय अपग्रेड। इसलिए 6 ट्रेडिंग सत्रों की छुट्टी। अगला कॉलम आएगा सोमवार, 21 अगस्त को। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जो 5% ट्रेडर कामयाब होते हैं, वे वहां खरीदते हैं जहां से गिरने की प्रायिकता न्यूनतम और बढ़ने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इसी तरह वे वहां पर बेचकर निकल जाते हैं जहां बढ़ने की प्रायिकता न्यूनतम और गिरने की प्रायिकता अधिकतम होती है। इन बिंदुओं का फैसला वे पिछले डेटा के मद्देनज़र डिमांड व सप्लाई ज़ोन निकालकर करते हैं। वे गलत साबित होते हैं तो कम घाटा खाते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी