बिजनेस चैनल और ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम बहुत सारी जानकारियां व आंकड़े फेंकते रहते हैं। मान भी लें कि इस डेटा से ज्ञान बढ़ता है, तब भी सच्चाई यही है कि वित्तीय बाज़ार में सफलता पाने के लिए जो चीज़ें चाहिए, ज्ञान उसका महज एक हिस्सा है। क्लच, गियर, ब्रेक व स्टीयरिंग का ज्ञान पढ़कर आप ड्राइवर नहीं बन जाते और न ही सर्जरी की किताबें पढ़कर आप कुशल सर्जन बन सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग और निवेश पर सारी अच्छी किताबें अंग्रेज़ी में हैं और बहुत दुरूह हैं। वैसे भी भारतीय बाज़ार की हकीकत उनमें लिखी बातों से अलग है। हां, ऑनलाइन मीडिया पर हिंदी में भी खूब जानकारी व सूचनाएं मिलती हैं और एकदम मुफ्त में। ऊपर से बिजनेस के कुछ हिंदी चैनल भी हैं। लेकिन मुफ्त में मिल रही तमाम जानकारियां अक्सर गलत व बेहद खतरनाक होती हैं। उनका मज़ा अंततः सज़ा बन जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बहुत-से लोग किताबें व ऑनलाइन लेख पढ़कर या वीडियो देखकर वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश की दुनिया में उतरते हैं। उन्हें लगता है कि इससे वे ट्रेडिंग व निवेश की सारी विद्या सीखकर चंद सालों में सचमुच बहुत धनवान हो जाएंगे। सचमुच ऐसा होता तो आज दुनिया में वॉरेन बफेट और जॉर्ज सोरोस की भरमार होती। ऑनलाइन माध्यमों व किताबों से ज्ञान ज़रूर मिलता है। पर सफलता के लिए ज्ञान पर्याप्त नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाने का कौशल कोई रॉकेट साइंस नहीं। दिक्कत यह है कि अधिकांश ट्रेडरों का माइंडसेट गड़बड़ होता है। कुछ लोग फंडामेंटल आधारित निवेश को ट्रेडिंग से गड्डम-गड्ड कर देते हैं। दरअसल, उन्हें सारा ‘ज्ञान’ किनारे रखकर सामान्य व्यापार का सूत्र मन में बैठा लेना चाहिए कि थोक के भाव पर खरीदना और रिटेल के भाव पर बेचना है। इस तरह बराबर 5-10% का मार्जिन कमाते जाना है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयरों के भावों के चार्ट पर डिमांड-सप्लाई के स्तरों के बीच के फासले को ‘प्रॉफिट ज़ोन’ कहते हैं। यह ज़ोन दिखाता है कि उस शेयर को डिमांड के स्तर पर खरीद और सप्लाई के स्तर पर बेचकर कितना फायदा कमाया जा सकता है। डिमांड-सप्लाई के स्तर टेक्निकल एनालिसिस के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल से भिन्न होते हैं। हालांकि डिमांड और सप्लाई के स्तर चिन्हित करने में आखिरी कैंडल का आकार निर्णायक होता है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में शेयरों का फ्लोटिंग स्टॉक सीमित है। इसलिए भाव डिमांड से सप्लाई और सप्लाई से डिमांड ज़ोन का चक्कर काटते हैं। भाव सीधी रेखा नहीं, बल्कि लहरों में चलते हैं। डिमांड ज़ोन से शुरू खरीद जब तक चलती है, तब तक भाव चढ़ते हैं। वहीं, खरीद के सारे ऑर्डर चुक जाने पर शेयर सप्लाई ज़ोन में पहुंच जाता है। वहां से बिक्री के सारे ऑर्डर चुकने तक शेयर गिरता रहता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में डिमांड-सप्लाई का असंतुलन बैंक, प्रोफेशनल ट्रेडरों और वित्तीय संस्थाओं की खरीद-फरोख्त से बनता है। ये दिग्गज कब खरीद या बेच रहे हैं, इसे हम किसी शेयर के भावों के चार्ट पर देख सकते हैं। तब हम भी उसी स्तर पर खरीद या बेचकर उनकी तरह ट्रेडिंग से मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन वहां तक हम तभी पहुंच सकते हैं जब शेयर बाज़ार में भावों के उठने-गिरने का मूल नियम समझ लें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

भावों के रुख बदलने का सूत्र शेयर बाज़ार जैसे वित्तीय बाज़ार ही नहीं, बल्कि हर बाज़ार पर लागू होता है चाहे वो बांड, फ्यूचर्स व ऑप्शंस, विदेशी मुद्रा, बिटकॉइन या रीयल एस्टेट ही क्यों न हो। इसे हम छोटे समय की ट्रेडिंग, लंबे समय के निवेश, वित्तीय सुरक्षा और रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे तमाम वित्तीय उद्देश्यों को पूरा करने में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हम सप्लाई और डिमांड के असंतुलन को पकड़े कैसे? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार कहां मुड़ेगा और उसकी भावी चाल क्या होगी, इसका सटीक तो नहीं, लेकिन काफी हद तक सही अनुमान लगाना संभव है। सीधा-सा सूत्र है कि भाव वहीं रुख बदलते हैं, जहां सप्लाई और डिमांड का संतुलन एकदम बिगड़ जाता है। बैंक, प्रोफेशनल ट्रेडर व वित्तीय संस्थान बाज़ार से बराबर जमकर मुनाफा कमाते हैं और वे ही वहां सबसे ज्यादा असंतुलन पैदा करते हैं क्योंकि वे भारी मात्रा में खरीदते या बेचते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मसला चाहे दीर्घकालिक निवेशक का हो या अल्पकालिक ट्रेडर का, उन्हें अगर शेयर बाज़ार से बराबर कमाना है तो दो ही सवाल मायने रखते हैं। पहला यह कि शेयर के भाव कहां से पलटी मारेंगे और दूसरा यह कि भाव उठते-उठते फिलहाल कहां तक जाएंगे। बहुत-से लोग सोचते हैं कि बाज़ार कहां मुड़ेगा और उसकी चाल क्या होगी, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। लेकिन यह पूरा नहीं, अधूरा सच है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी