अगर आम लोग शेयर बाज़ार में आना ही चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करतब करना चाहिए जिससे उन्हें थोड़ी बहुत बंधी-बंधाई रकम मिल जाए। मुझे पक्का नहीं पता, लेकिन शायद इंट्रा-डे ट्रेडर कुछ ऐसा की काम करते हैं। उन्हें दिन भर में कुछ घंटे शेयरों के भावों के उतार-चढ़ाव पर खेलना होता है। यकीनन इसमें काफी रिस्क है। लेकिन वे स्टॉक्स के सही चुनाव और उपयुक्त चार्ट अपनाकर रिस्क न्यूनतम कर सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश उनके लिए, जिनके पास रोजमर्रा व आकस्मिक ज़रूरतों के इंतज़ाम के बाद अतिरिक्त धन बच जाता है, वहीं ट्रेडिंग उनके लिए है जिनके पास कहीं ज्यादा इफरात धन है। आज जब अपने यहां नौकरी-धंधों में मंदी छाई है तब लोग घबराहट व लालच में शेयर बाज़ार की ओर भाग रहे हैं। यह मनःस्थिति उन्हें आसानी से औरों का शिकार बना सकती हैं और उनका बचा-खुचा सुरक्षा-कवच टूट सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ऊपर-ऊपर दिखते हैं शेयरों के भाव। लेकिन उनके पीछे होती है अदृश्य हाथों की सम्मिलित व सामूहिक ताकत। भावों के पैटर्न से हम शेयरों का स्वभाव जान सकते हैं। लेकिन शेयरों का स्वभाव उन लोगों से बनता है जो अपने स्वभाव से उन कंपनियों व स्टॉक्स की तरफ खिंचे चले जाते हैं और नियमित रूप से उन्हीं में ट्रेड करते हैं। हमेशा याद रखें कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग धनवानों का खेल है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों का स्वभाव हम पिछले पांच साल, तीन साल, एक साल, तीन महीने, हफ्ते या उसके दैनिक भावों का चार्ट देखकर जान सकते हैं। असल में समूचा शेयर बाज़ार ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शेयरों के भाव भी खास पैटर्न में चलते हैं। थोड़ा-बहुत ही इधर-उधर होता है। चूंकि हम रोज़ाना ट्रेड हो रहे करीब 1950 शेयरों को नहीं पकड़ सकते तो हमें ट्रेडिंग के लिए निफ्टी-50 और निफ्टी नेक्स्ट-50 तक सीमित रहना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेन की पटरियां अमूमन दशकों तक वही की वही रहती हैं। लेकिन शेयर अपने स्वभाव से बंधे होने के बावजूद ट्रैक बदलते रहते हैं तो हम शेयरों की गति पुरानी जानकारी के आधार पर यांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि उसे प्रभावित करनेवाले कारकों को गणना में अच्छी तरह शामिल करके पता लगा सकते हैं। मगर भावनाओं, धन के प्रवाह और अर्थव्यवस्था व उद्योग की स्थिति जैसे कारक सारा कुछ जटिल बना देते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आप ट्रेन में बैठे हैं। चलते जाना उसका स्वभाव है। स्टेशनों पर रुकते-रुकाते वह बराबर चली जा रही है। कोई आपसे पूछे कि अगला स्टेशन कौन-सा आएगा, आप सहजता से बता देंगे। इसी तरह अगर आपको किसी खास शेयर का स्वभाव पता है, ट्रैक-रिकॉर्ड मालूम है जिस पर वह बराबर चलता रहा है तो आप सहजता और काफी सटीकता से बता सकते हैं कि उसका अगला पड़ाव या मोड़ क्या हो सकता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वैज्ञानिक सच्चाई यह है कि धरती व सृष्टि से लेकर हमारे शरीर तक में हर पल असंख्य क्रिया-प्रतिक्रिया चलती रहती है। यह सतत परिवर्तन ही जीवन का सबब है। यह रुक जाए तो जीवन खत्म हो जाता है। लेकिन अज्ञान/अविद्या के चलते हमारे मन में यह धारणा बैठी रहती है कि सब कुछ स्थिर, शाश्वत है। अविद्या को मिटाकर हम यह धारणा तोड़ दें तो शेयरों की सही गति का भान संभव है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने के सूत्र के पीछे एकमात्र सोच यही है कि वहां सब कुछ पल-पल बदल रहा है। वित्तीय बाज़ार आज ग्लोबल हो चुका है। हमारा बाज़ार बंद रहे, तब भी बदलाव का चक्र चौबीसों घंटे अनवरत चलता रहता है। लेकिन बदलाव की यह सोच समग्र व संपूर्ण तभी बनती है जब इसे बाकी जीवन में भी देख-समझ व महसूस किया जाए। दो नांवों की सवारी घातक होती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार ज्यादा न गिरे, इसके लिए पूंजी बाज़ार नियामक, सेबी ने भी उपाय कर रखे हैं। आपको पता ही होगा कि बाज़ार के गिरने पर शॉर्ट-सेलिंग आग में घी का काम करती है। नतीजतन, बाज़ार और ज्यादा गिरता जाता है। सेबी ने इस पर बैन नहीं लगाया, लेकिन इसे इंडेक्स डेरिविव्स तक सीमित कर दिया है। साथ ही उसने चलने वाले शेयरों पर मार्जिन काफी बढ़ा और मार्केट-वायड पोजिशन लिमिट घटा दी है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

अब तक देशी निवेशक संस्थाओं, खासकर म्यूचुअल फंडों ने अपने शेयर बाज़ार को ज्यादा गिरने से रोक रखा था। विदेशी निवेशक तो पहले से बेचे जा रहे हैं। ऐसे में अब बाजार को गिरना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार अपनी बिगड़ती छवि के बीच शायद ऐसा नहीं होने देगी। इस मसकद को पूरा करने के लिए उसके पास एलआईसी जैसी शानदार संस्था है जो उसके इशारे पर बाज़ार में जमकर अरबों झोंक सकती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी