शेयर बाज़ार समेत समूचा वित्तीय बाज़ार फाइनेंस का बाज़ार है। इस बाज़ार का सच यही है कि जिनके पास अपनी ज़रूरत से बहुत-बहुत ज्यादा इफरात धन है, वही यहां के मूल व्यापारी हैं। हमें लगता है कि इसमें धन की नदी बह रही है। मुठ्ठी या बर्तन डालो, जितना चाहो, निकालते जाओ। लेकिन प्यासे पांडवों और यक्ष के तालाब का किस्सा याद करें। प्यास मिटाने से पहले यक्ष प्रश्नों का जवाब देना पड़ेगा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मान्यताओं और धारणाओं में फंसकर आप सच तक नहीं पहुंच सकते। लगेगा कि आप अपना भला कर रहे हो, लेकिन दरअसल दूसरे लोग आपके भोलेपन का फायदा उठाकर ऐश करते हैं। जीवन की तरह शेयर बाज़ार में भी यही होता है। धंधेबाज़ आपको तरह-तरह मान्यताओं और धारणाओं में उलझा देते हैं। आप उछाले गए बड़े नामों को आदर्श और उन्हीं की बातों को सच मान बैठते हो। फिर निरंतर घोखा खाते रहते हो। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयरों में दीर्घकालिक निवेश बैक एफडी या प्रॉपर्टी में धन लगाने जैसा काम है। लेकिन शेयर बाज़ार में की गई ट्रेडिंग विशुद्ध बिजनेस है। इस पर टैक्स-निर्धारण भी उसी हिसाब से होता है। निवेश में धन लगाकर हम सालों तक के लिए भूल सकते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में किसी भी बिजनेस की तरह पल-पल की हलचलों पर ध्यान देना पड़ता है। स्टॉप-लॉस में गया धन इस बिजनेस की लागत है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयरों की ट्रेडिंग से कमाना है तो दूसरे की सलाह नहीं, बल्कि अपने सिस्टम और अनुशासन पर चलें। इसका पहला कारण यह है कि पूंजी आपकी लगी है, दूसरे की नहीं। दूसरा यह कि पल-पल बदलते भावों में आपका सिस्टम और अनुशासन नहीं रहा तो आप कभी भी फिसल जाएंगे। बफेट के दो नियम जानते ही होंगे। पहला, हमेशा अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलें और दूसरा यह कि पहला नियम बराबर याद रखें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ‘आसान, सरल व सुलभ’ राह पर चलते-चलते जब अचानक वास्तविक सच्चाई से हमारा वास्ता पड़ता है, तब पता चलता है कि बड़ी मशक्कत से जोड़ी गई बचत कैसे देखते ही देखते एक झटके में स्वाहा हो जाती है। दो-चार हज़ार भी डूब जाएं तो हम घबरा जाते हैं, भयंकर असुरक्षा छा जाती है। लेकिन संस्थाएं रोज़ाना करोड़ों दांव पर लगाती हैं। फिर भी बगैर किसी असुरक्षा के जमकर कमाती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अब तो बिचौलिये ब्रोकर का भी झंझट खत्म होनेवाला है। पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी रिटेल निवेशकों को सीधे बाज़ार तक पहुंच (डीएमए) देने पर विचार कर रही है। यह सुविधा अभी तक संस्थागत निवेशकों को उपलब्ध है। सेबी की पेशकश लागू हो जाने पर हमारे-आप जैसे आम निवेशक व ट्रेडर सीधे-सीधे बीएसई और एनएसई से डील करेंगे। ब्रोकर हटा तो खर्च भी थोड़ा घट सकता है। मतलब, शेयर बाज़ार की राह आसान। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाहर से बेहद आसान लगता है शेयर बाज़ार से कमाना। सारी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर है और सारा माल-मत्ता बाज़ार में। हर स्टॉक के पल-पल के भाव, कंपनी के पूरे के पूरे वित्तीय नतीजे। ऊपर से वोल्यूम और ओपन इंटरेस्ट का सारा डेटा। साथ ही भावों के चार्ट के साथ जितने चाहो, उतने इंडीकेटर्स का फ्लो। सब कुछ मुफ्त में। समय व ध्यान लगाओ और बाज़ार से मनचाहा धन बटोर लो! अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर अपने यहां कमाने के अच्छे अवसर होते तो हर पांच-दस साल पर घोटालों से घिरे शेयर बाज़ार में इतने-सारे लोग ट्रेडिंग से कमाने की दौड़ नहीं लगाते। महाराष्ट्र व गुजरात में तो लोगबाग पतंगों की तरह शेयर बाज़ार की आग में कूदते हैं, यह भूलकर कि उनसे पहले अधिकांश आम लोग इसमें अपनी जमा-पूंजी स्वाहा कर बैठे हैं। उनको लगता है कि यह धन की खुली खिड़की/बाज़ार है, हाथ डालो और निकालो। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग में नज़र साफ करने के झंझट कम नहीं। एनएसई की वेबसाइट से डेरिवेटिव्स की भाव कॉपी डाउनलोड करो। फिर उसमें से केवल फ्यूचर्स का डेटा निकालो। फिर हर स्टॉक में इस महीने, अगले महीने और दूर के महीने के ओपन इंटरेस्ट पर नज़र डालो। उनकी घट-बढ़ को स्टॉक के भाव के साथ जोड़कर देखो। फिर उनमें से 2-4 स्टॉक चुनकर निकालो। इतनी मशक्कत के बाद उनके भावों को अनेक इंडीकेटर पर परखो। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग के स्टॉक्स को चुनने के बाद मसला यह है कि किनमें बढ़ने की प्रायिकता ज्यादा है और किनमें गिरने की? कुछ विशेषज्ञ इसके लिए डेरिवेटिव सेगमेंट में ओपन इंटरेस्ट का सहारा लेते हैं। अगर डेरिवेटिव सेगमेंट में स्टॉक का ओपन इंटरेस्ट बढ़ने के साथ कैश सेगमेंट में भाव भी बढ़ रहा हो तो उसमें खरीदने और जिनमें ओपन इंटरेस्ट बढ़ने के साथ भाव घट रहा हो, उनमें शॉर्ट करने को कहते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी