अगर आपका रिस्क-प्रोफाइल कमज़ोर और ट्रेडिंग पूंजी भी कम है तो केवल स्टॉक्स के कैश सेगमेंट में ट्रेड करें। न स्टॉक्स डेरिवेरिव्स में जाएं और न ही निफ्टी या बैंक निफ्टी के फ्यूचर्स व ऑप्शंस को हाथ लगाएं। कारण यह कि फ्यूचर्स में लॉट बड़ा होने के कारण ज्यादा पूंजी लगती है, जबकि ऑप्शंस का चक्कर इतना जटिल है कि बिना समझे उतरेंगे तो वह धीरे-धीरे बतौर प्रीमियम आपकी सारी पूंजी निगल जाएगा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

अपनी श्रेणी समझने का मतलब कि आपका रिस्क प्रोफाइल क्या है? आप कितनी पूंजी गंवाकर भी पस्त नहीं होंगे और आपके पास ट्रेडिंग के लिए इफरात पूंजी बची रहेगी। रिस्क क्षमता कम है तो आपको कम उछल-कूद या बीटा वाले स्टॉक्स चुनने होंगे। सेंसेक्स व निफ्टी का बीटा एक होता है। किसी स्टॉक का बीटा एक से कम तो उसका रिस्क बाज़ार से कम। एक से ज्यादा तो उसका रिस्क बाज़ार से ज्यादा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले यह तय करें कि आप किस श्रेणी या टाइप के ट्रेडर हैं। आपका माइंडसेट क्या है, कमाने का नज़रिया क्या है और आपकी विशेषताएं या दक्षताएं क्या हैं? अगर आपको अपनी श्रेणी का भान नहीं है और आप किसी दूसरे के अंदाज़ में ट्रेडिंग करना चाहेंगे तो तय मानिए कि आप नाकाम होने और अपनी ट्रेडिंग पूंजी गंवा देने को अभिशप्त हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कहां ट्रेडिंग करे, कौन-सा स्टॉक खरीदें या स्टॉक्स को छोड़ इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेड करे? इन बातों पर प्रोफेशनल सलाह आप कहीं से ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए आप साल की एक लाख रुपए फीस दें या महीने के 1100 रुपए, इन सलाहों से कमाना आपकी कुशलता और अनुशासन पर निर्भर करता है। बाहरी सलाह महज एक इनपुट है। बाकी सारा काम आपकी सर्तकता, समझ और निर्णय लेने की क्षमता करती है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाज़ार के सामान्य होने का इंतज़ार करना चाहिए। इस बार बाज़ार गिरा तो गहरा आघात लगा सकता है। लेकिन कहां तक गिरने पर बाज़ार को सामान्य या स्थिर माना जाएगा। जानकारों के मुताबिक, निफ्टी गिरते-गिरते जब 11,200 से 11,350 की रेंज में आ जाए, तब माना जाएगा कि वह सामान्य अवस्था में लौट आया। फिलहाल ऐसा होने में देर है। तब तक रिटेल ट्रेडरों को दूर से तमाशा देखना होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

यह सावधानी बरतने का दौर है क्योंकि शेयर बाज़ार अर्थव्यवस्था या कंपनियों की ताकत पर नहीं, बल्कि तुरत-फुरत मुनाफा कमाने के लिए लगी उधार की पूंजी के दम पर उछल रहा है। यह भी रिवाज़ है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों तक बाज़ार को जबरन चढ़ाकर रखा जाता है। ऊपर से इधर कोरोना का नरम-गरम जारी है। ठंड बढ़ने पर कोरोना का प्रकोप विकट होने की आशंका है। फिर ट्रेड ही क्यों करें? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भीषण है यह दुष्चक्र। ज्यादा उफान ट्रेडरों को किनारे लगा देता है। लेकिन किनारे लगे ट्रेडर ज़ोर से पलटते हैं। इस छपाक-झपाक में उफान और ज्यादा बढ़ जाता है। दैनिक वोलैटिलिटी या चंचलता पहले से ज्यादा हो जाती है। हमें VIX सूचकांक से नापी जाने वाली और इस सांख्यिकी चंचलता का अंतर समझना होगा। इस समय VIX वाली वोलैटिलिटी घटकर 20-22% की रेंज में आ चुकी है जिसे खतरनाक नहीं माना जा सकता। अब बुद्ध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की शांत और उफनती धारा में क्या अंतर है? मोटेतौर पर जब निफ्टी दिन में 90-100 अंकों के दायरे में चले तो बाज़ार की धारा शांत मानी जा सकती है। वहीं, जब वह 120 अंकों के ज्यादा के दायरे में उछलता-कूदता है, तब बाज़ार की धारा उफनती मानी जा सकती है। फिलहाल औसतन यही स्थिति चल रही है। ट्रेडरों को घाटा, फिर उसे कवर करने की मशक्कत। बनता जाए घनघोर दुष्चक्र। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

आसानी से कमाना कौन नहीं चाहता! लेकिन शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना हर किसी के बूते की बात नहीं। यहां हाथी जैसी सुस्ती नहीं, चीते जैसी फुर्ती चाहिए। नहीं तो बाज़ार के मगरमच्छ पलक गिरते आपको निगल जाएंगे। शेयर बाज़ार ऐसा शांत तालाब नहीं कि कांटा लगाकर बैठ गए और इंतज़ार किया तो मछली हाथ लग जाएगी। यहां तो ट्रेडर उफनती धारा में शिकार करते हैं। जितना ज्यादा उफान, उतनी ज्यादा कमाई। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

डेरिवेटिव सेगमेंट में शॉर्ट और लॉन्ग दोनों तरह के सौदे लीवरेज्ड होते हैं। जितना धन लगाया है, उससे कहीं ज्यादा बड़ा असल सौदा होता है। लेकिन मार्क-टू-मार्केट भुगतान के दबाव में लॉन्ग सौदे करने वाले ट्रेडर को मजबूरी में अपनी पोजिशन छोड़नी होती है तो बाज़ार गिर जाता है। वहीं, शॉर्ट सेलिंग करने वाले ट्रेडर को अक्सर अपनी पोजिशन कवर करने के लिए घबराहट में खरीदना पड़ता है तो बाज़ार चढ़ जाता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी